Ambikapur: Political Showdown Over Mukesh Firecracker and Plastic Shop Blaze: सरगुजा:अंबिकापुर: 25 अप्रैल 2026: अंबिकापुर के राम मंदिर रोड स्थित मुकेश पटाखा और प्लास्टिक गोदाम में लगी भीषण आग के बाद अब मामला सियासी रंग भी लेने लगा है। आग से आसपास के घरों को नुकसान पहुंचने और प्रभावित परिवारों की मुश्किलें बढ़ने के बीच कांग्रेस ने प्रशासन से भारी मुआवजे की मांग की है।
शहर के घनी आबादी वाले इलाके में स्थित इस दुकान और गोदाम में 22 अप्रैल 2026 को आग भड़क उठी थी। आग इतनी तेज थी कि उसे काबू में लाने में घंटों लग गए और दमकल की कई गाड़ियां मौके पर जुटानी पड़ीं। रिपोर्टों के मुताबिक आसपास के कई मकान भी इसकी चपेट में आए और क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
आग लगने के बाद लोगों को सुरक्षा के लिहाज से घर खाली करने पड़े और कुछ इलाकों की बिजली भी काटी गई। प्रशासन, दमकल और एसडीआरएफ की टीम ने लगातार राहत और बचाव कार्य किया, लेकिन भारी गर्मी और प्लास्टिक-पटाखों के कारण आग बार-बार विकराल होती रही।
कांग्रेस की मांग
अग्निकांड के बाद कांग्रेस जिला नेतृत्व प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा दिखा। पार्टी के जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक कलेक्टर से मिले और मांग की कि प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाए तथा पटाखा-प्लास्टिक व्यवसायी पर एफआईआर दर्ज हो। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि मामले में व्यवसायी को बचाने की कोशिश हुई तो पार्टी आंदोलन करेगी।
कांग्रेस का कहना है कि घनी बस्ती में इस तरह के खतरनाक कारोबार की अनुमति देना गंभीर लापरवाही है। पार्टी ने प्रभावित परिवारों की स्थिति को देखते हुए त्वरित सहायता, पुनर्वास और नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
इस आग का असर सिर्फ दुकान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के कई घरों और परिवारों पर भी पड़ा। कुछ घरों को एहतियात के तौर पर खाली कराया गया, जबकि कई लोग रात खुले में या घरों से बाहर बिताने को मजबूर हुए। भीषण गर्मी, धुएं और दहशत ने स्थानीय निवासियों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।
लोगों का कहना है कि ऐसी घनी आबादी में पटाखा और प्लास्टिक जैसे ज्वलनशील सामान का भंडारण पहले से ही खतरे की घंटी था। अब आगजनी के बाद लोग प्रशासन से कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं।
यह घटना शहरी सुरक्षा, लाइसेंस व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों का कहना है कि यदि जांच में अनुमति, सुरक्षा उपाय या निगरानी में चूक साबित होती है, तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसी कारण कांग्रेस मुआवजे के साथ-साथ कार्रवाई की मांग को भी मुद्दा बना रही है।
कई रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि आग बुझाने के दौरान दर्जनों दमकल वाहनों का पानी इस्तेमाल हुआ और घंटों तक आग पर काबू पाने की कोशिश होती रही। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह एक साधारण आग नहीं, बल्कि बड़े पैमाने का अग्निकांड था।
Ambikapur: Political Showdown Over Mukesh Firecracker and Plastic Shop Blaze
अग्निकांड जैसे मामलों में अक्सर राहत, मुआवजा और जवाबदेही को लेकर राजनीति तेज हो जाती है। अंबिकापुर में भी यही होता दिख रहा है, जहां कांग्रेस पीड़ितों के पक्ष में खड़ी होकर प्रशासन पर दबाव बना रही है। यह मुद्दा अब केवल नुकसान की भरपाई का नहीं, बल्कि शहर में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी बन गया है।
प्रभावित परिवार चाहते हैं कि उन्हें जल्द राहत मिले और नुकसान की भरपाई पारदर्शी ढंग से की जाए। दूसरी ओर, प्रशासन पर यह दबाव है कि वह जांच, मुआवजे और भविष्य की रोकथाम तीनों मोर्चों पर ठोस कदम दिखाए।
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