Stray Dog Sterilization and Vaccination Drive in Full Swing in Ambikapur: सरगुजा:अंबिकापुर: 25 अप्रैल 2026: अंबिकापुर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उससे जुड़ी शिकायतों को देखते हुए बिसुनपुर में एबीसी सेंटर की शुरुआत स्थानीय प्रशासन की एक अहम पहल मानी जा रही है। इस केंद्र के जरिए कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रैबीज टीकाकरण को तेज कर शहर में आबादी नियंत्रण, सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र के बिसुनपुर में शुरू हुआ एबीसी सेंटर आवारा कुत्तों के वैज्ञानिक और व्यवस्थित नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्र के चालू होने से अब कुत्तों को पकड़ने, उनकी नसबंदी करने और टीका लगाने की प्रक्रिया पहले से अधिक नियमित रूप से की जा सकेगी। इससे न केवल आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण होगा, बल्कि रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को भी कम करने में मदद मिलेगी।
नगर निकायों के लिए आवारा पशु और कुत्तों का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती रहा है। सड़कों, मोहल्लों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते कुत्तों को लेकर लोगों की शिकायतें लगातार बढ़ती रही हैं। ऐसे में एबीसी सेंटर की शुरुआत को स्थानीय प्रशासन की व्यवहारिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
सेंटर शुरू होने के बाद नसबंदी-टीकाकरण अभियान को तेज किया गया है। पशु चिकित्सकों और संबंधित कर्मियों की टीम कुत्तों को पकड़कर उन्हें केंद्र में लाती है, जहां उनकी चिकित्सकीय जांच की जाती है। इसके बाद नसबंदी और एंटी-रैबीज टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी की जाती है। निर्धारित अवधि पूरी होने पर कुत्तों को सुरक्षित रूप से उनके मूल क्षेत्र में छोड़ा जाता है।
यह प्रक्रिया पशु जन्म नियंत्रण के तय मानकों के अनुरूप मानी जाती है। इससे कुत्तों की अनियंत्रित बढ़ोतरी रुकती है और एक ही इलाके में बार-बार नई संतानों के आने से जो समस्या बढ़ती है, उसे भी कम किया जा सकता है। प्रशासन का मानना है कि निरंतर अभियान से कुछ महीनों में इसका असर दिखने लगेगा।

आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या केवल जनस्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी मुद्दा है। कई बार बच्चे, बुजुर्ग और सुबह-शाम पैदल चलने वाले लोग इनसे परेशान होते हैं। खासकर कुत्तों के काटने की घटनाएं लोगों में भय पैदा करती हैं। एबीसी सेंटर और उससे जुड़ा अभियान ऐसे ही जोखिमों को कम करने का एक प्रयास है।
इस पहल से मोहल्लों में कुत्तों की संख्या धीरे-धीरे संतुलित होगी और आक्रामक व्यवहार की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को भी यह महसूस होगा कि शिकायत के बाद अब प्रशासन के पास एक ठोस व्यवस्था मौजूद है। यही वजह है कि यह कदम केवल पशु नियंत्रण नहीं, बल्कि नागरिक सुविधा से भी जुड़ा हुआ है।
Stray Dog Sterilization and Vaccination Drive in Full Swing in Ambikapur
नसबंदी के साथ टीकाकरण इस अभियान का सबसे अहम हिस्सा है। आवारा कुत्तों में एंटी-रैबीज टीका लगाने से न केवल पशु सुरक्षित रहते हैं, बल्कि इंसानों में संक्रमण फैलने का खतरा भी घटता है। रेबीज एक घातक बीमारी है, और इसके रोकथाम में समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी माना जाता है।
नगर निकायों के लिए यह मॉडल इसलिए भी उपयोगी है क्योंकि इससे समस्या का समाधान भावनात्मक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है। कुत्तों को हटाने के बजाय उनकी संख्या और स्वास्थ्य पर नियंत्रण रखा जाता है। यही संतुलित दृष्टिकोण शहरी क्षेत्रों में दीर्घकालिक समाधान दे सकता है।
एबीसी सेंटर का सफल संचालन केवल भवन या मशीनरी पर निर्भर नहीं करता। इसके लिए प्रशिक्षित स्टाफ, पशु चिकित्सकीय निगरानी, पकड़ने की सुरक्षित प्रक्रिया, रिकॉर्ड-रखरखाव और नियमित फॉलोअप की जरूरत होती है। यदि ये सभी व्यवस्थाएं ठीक से चलें, तो अभियान प्रभावी बन सकता है।
स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है कि अभियान को केवल औपचारिक उद्घाटन तक सीमित न रखें। नियमित निगरानी, फील्ड टीम की सक्रियता और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई जरूरी है। साथ ही नागरिकों को भी यह समझना होगा कि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान केवल सामूहिक और सुनियोजित प्रयासों से ही संभव है।
बिसुनपुर में शुरू हुआ एबीसी सेंटर अंबिकापुर के लिए एक नई शुरुआत है। यदि यह केंद्र तय मानकों के साथ लगातार संचालित होता है, तो शहर में आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा भी बेहतर होगी। यह पहल तब और असरदार होगी जब इसे जागरूकता, शिकायत-निवारण और नियमित अभियान के साथ जोड़ा जाएगा।
अंबिकापुर जैसे तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था समय की जरूरत बन चुकी है। बिसुनपुर का एबीसी सेंटर अगर सफल रहता है, तो यह मॉडल अन्य वार्डों और आसपास के क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
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