Taliban-style Punishment in Surajpur: सूरजपुर : 24 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में लोक न्याय के नाम पर एक ऐसी घटना सामने आई है, जिससे ग्रामीण समाज के साथ‑साथ प्रशासन पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यहां चारों ओर पैनल तार चोरी के शक में एक युवक को तालिबानी अंदाज में सज़ा दी गई, जिसमें उसका सिर मुंडवाया गया, फिर जूतों की माला पहनाकर उसे गांव में घुमाया गया। इस मामले में ग्राम पंचायत स्तर के व्यक्ति का हाथ बताया जा रहा है, जिसके बाद पीड़ित पक्ष ने रामानुजनगर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना जिले के ग्राम पस्ता की है, जहाँ सोलर पैनल के तार चोरी के संदेह में एक युवक पर शक हो गया। सूचना मिलते ही एक बड़ा ग्रुप जमा हुआ, जिसमें ग्राम पंचायत के एक प्रभावशाली व्यक्ति का नाम भी जुड़ा है। इस व्यक्ति (जिसे ग्रामीण सरपंच के पति के तौर पर बता रहे हैं) ने युवक को गांव के बीचो‑बीच रोका और उसके ऊपर “लोक न्याय” की फतवा जारी कर दिया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक को पहले बेल्ट व छड़ी से पीटा गया, फिर उसका सिर मुंडवा दिया गया। इसके बाद उसे अर्ध‑नग्न कर जूतों और चप्पलों का माला पहना दिया गया और पेट व पीठ पर “चोर” लिखे तख्ती लगाकर गांव के चारों तरफ घुमाया गया। ग्रामीणों का आरोप था कि युवक ने पैनल तार चुराकर बिक्री की है, लेकिन इसके लिए कोई आधिकारिक जांच या रिकॉर्ड नहीं बनाया गया।
पीड़ित युवक के परिजनों का कहना है कि गांव में सिर्फ जमा‑खर्च की अफवाह थी, जिसके आधार पर बिना किसी जांच या गिरफ्तारी के उसके बेटे के ऊपर यह तालिबानी सज़ा थोपी गई। उन्होंने बताया कि युवक ने कभी चोरी का इत्तेफाक नहीं किया, लेकिन गांव में उसके नाम की इच्छा‑शत्रुता के चलते उसे निशाना बनाया गया।
घटना के बाद युवक के पिता ने रामानुजनगर थाने में मामला दर्ज कराया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि न केवल युवक के साथ दुर्व्यवहार किया गया, बल्कि उसकी इज्जत भी गंवाई गई। परिजनों का कहना है कि गांव में वीडियो बनाकर भी इस घटना को दर्ज किया गया, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है। वे मांग कर रहे हैं कि जिन लोगों ने यह अमानवीय खेल खेला, उनके खिलाफ FIR दर्ज हो और उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
Taliban-style Punishment in Surajpur
सूरजपुर सहित पूरे मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों में हाल के महीनों में ऐसी ही “तालिबानी सज़ा” वाली घटनाएं बार‑बार सामने आ रही हैं, जहाँ चोरी, अवैध संबंध या अन्य आरोपों के आधार पर युवकों को जूतों से पीटा गया, सिर मुंडवाया गया या गांव में निर्लज्ज तरीके से घुमाया गया है। इन मामलों में पुलिस या प्रशासन की ओर से समय पर हस्तक्षेप न होना इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है।
स्थानीय कार्यकर्ता और विधिक सहायता समूहों का मानना है कि यह “लोक न्याय” का नाम पर कानून और संविधान के खिलाफ ग्राम‑ग्राम में अत्याचार फैलाने का एक खतरनाक ट्रंड बन रहा है। इन घटनाओं में अक्सर ग्रुप‑विज़िलेंस (mob‑justice) का चेहरा नजर आता है, जहाँ कुछ शक्तिशाली व्यक्ति या पंचायत अपने विरोधियों को नीचा दिखाने के लिए बेकसूर युवकों को निशाना बना रहे हैं।
सूरजपुर पुलिस प्रशासन से जब इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो अधिकारियों ने यह कहा कि मामले की जांच जारी है और शिकायतकर्ता की तरफ से दिए गए बिंदुओं को देखा जा रहा है। लेकिन ग्रामीणों में यह नाराज़गी भी है कि ऐसी घटनाओं के बाद पुलिस अक्सर सिर्फ “जांच” की बात दोहराती है, जबकि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार या प्रशासनिक तरीके से निलंबित करने की जगह नहीं मिलती।
भारतीय दंड संहिता और अन्य कानूनों के तहत ऐसे किसी भी अपराध की जांच और सज़ा सिर्फ अधिकारिक तंत्र – पुलिस, न्यायालय और प्रशासन का हक है। ग्राम पंचायत या किसी भी ग्रुप को यह अधिकार नहीं दिया गया। इसलिए जो लोग युवक को बेल्ट से पीटते हैं, सिर मुंडवाते हैं या उसके गले में जूतों की माला पहनाते हैं, वे खुद दुर्व्यवहार, आपराधिक धमकी और सार्वजनिक अपमान जैसे गंभीर अपराध के अपराधी हो सकते हैं।
सूरजपुर की इस घटना को अकेले गांव का दुर्घटनात्मक विवाद नहीं माना जा सकता; यह उस बड़ी समस्या का हिस्सा है, जिसमें कानून को हाथ में लेने वाले लोग समाज को डर और अत्याचार के जाल में फंसा रहे हैं। पीड़ित युवक और उसके परिवार को न्याय मिले या न मिले, लेकिन इस तरह की “तालिबानी सज़ा” के खिलाफ जिला प्रशासन, पुलिस और विधिक संस्थानों को सख्त रुख अपनाना होगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आम आदमी की इज्जत और सुरक्षा दोनों बरकरार रह सकें।
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