सरगुजा: नवापारा सीएचसी में अटैचमेंट समाप्त, दो डॉक्टरों के भरोसे इलाज, मरीजों की बढ़ी परेशानी : Sarguja: Attachments at Nawapara CHC Terminated; Patient Care Now Relies on Just Two Doctors

Uday Diwakar
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Sarguja: Attachments at Nawapara CHC Terminated; Patient Care Now Relies on Just Two Doctors: सरगुजा:​​​अंबिकापुर: 15 अप्रैल 2026: स्वास्थ्य विभाग के अचानक फैसले ने सरगुजा जिले के शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नवापारा को गहरे संकट में डाल दिया है। विभाग द्वारा जिलेभर में अटैच्ड 69 डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को उनके मूल स्थान पर वापस भेजे जाने के बाद नवापारा सीएचसी सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां से तीन डॉक्टरों सहित करीब 20 कर्मचारियों की विदाई हो गई, जिससे अब सिर्फ दो डॉक्टरों के भरोसे मरीजों का इलाज चल रहा है। ग्रामीणों में भारी असंतोष है और विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह स्वास्थ्य सेवाओं पर लंबे समय तक बुरा असर डाल सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश स्तर पर की गई समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोविड-19 के बाद आपात स्थिति में अटैचमेंट व्यवस्था शुरू की गई थी, जो अब सामान्य हो जाने पर समाप्त कर दी गई। सरगुजा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. एसएन सिंह ने बताया, “यह फैसला मानव संसाधन की तर्कसंगत व्यवस्था के लिए लिया गया है। सभी कर्मचारी अब अपने मूल पद पर लौट चुके हैं, लेकिन नवापारा जैसे केंद्रों के लिए नए भर्ती की प्रक्रिया तेज की जा रही है।” हालांकि, स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि यह व्यवस्था अचानक समाप्त होने से अस्पताल की क्षमता आधी रह गई है।

नवापारा सीएचसी सरगुजा जिले का एक प्रमुख शहरी स्वास्थ्य केंद्र है, जो अंबिकापुर से मात्र 25 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां प्रतिदिन औसतन 150-200 मरीज ओपीडी में आते हैं, जिनमें बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। अटैचमेंट समाप्त होने से पहले यहां सात डॉक्टर उपलब्ध थे—तीन नियमित और चार अटैच्ड। अब सिर्फ दो डॉक्टर (एक आयुर्वेदिक और एक एलोपैथिक) बचे हैं, जबकि नर्सिंग स्टाफ भी न्यूनतम स्तर पर सिमट गया है। परिणामस्वरूप, आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एक स्थानीय निवासी रमILA बाई ने बताया, “मेरा पोता बुखार से तड़प रहा था, लेकिन डॉक्टर ने इंतजार कराने को कहा। रात में एम्बुलेंस भी उपलब्ध नहीं हुई। अब हम अंबिकापुर जाना पड़ता है, जो गरीबों के लिए मुश्किल है।”

यह समस्या केवल नवापारा तक सीमित नहीं है। सरगुजा जिले के अन्य सीएचसी जैसे उदयपुर, लखनपुर और मुख्यपुर में भी अटैच्ड स्टाफ कम हुआ है, लेकिन नवापारा पर प्रभाव सबसे गंभीर है। जिला अस्पताल अंबिकापुर पर अब अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जहां पहले से ही ओपीडी में भीड़ है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अटैचमेंट के बिना ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी पुरानी समस्या है। यहां तो भर्तियां रुकी हुई हैं, जबकि मलेरिया और डेंगू का सीजन शुरू हो चुका है।”

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स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। Surguja जिला पंचायत अध्यक्षिया रीता वर्मा ने कहा, “यह फैसला बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लिया गया, जो असंवेदनशील है। हम जल्द ही कलेक्टर से मिलकर स्थायी डॉक्टरों की मांग करेंगे।” वहीं, भाजपा के स्थानीय विधायक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर स्वास्थ्य मंत्री को टैग किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्यकर्मियों की कुल कमी 30 प्रतिशत से अधिक है, और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल जिले इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

इस संकट के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अनिल तिवारी बताते हैं, “डॉक्टरों की कमी से रोग निदान में देरी होती है, जो जटिलताओं को न्योता देती है। खासकर प्रसव और बाल रोगों में जोखिम बढ़ जाता है। नवापारा जैसे केंद्र जनजातीय परिवारों पर निर्भर हैं, जहां सुपर-सिटीज दूर हैं।” आंकड़ों से भी स्थिति स्पष्ट है—पिछले वर्ष नवापारा सीएचसी ने 25 हजार से अधिक ओपीडी केस हैंडल किए थे, लेकिन अब क्षमता घटने से 40 प्रतिशत मरीज बाहर जा रहे हैं।

Sarguja: Attachments at Nawapara CHC Terminated; Patient Care Now Relies on Just Two Doctors

सरकार की ओर से अब भर्ती प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया गया है। सीएमएचओ ने बताया कि अगले दो माह में 15 नए डॉक्टरों की नियुक्ति होगी, साथ ही टेलीमेडिसिन सुविधा बढ़ाई जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोग तत्काल समाधान चाहते हैं। एक मरीज संगठन ने धरना देने की चेतावनी दी है।

नवापारा के निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि उनका स्वास्थ्य केंद्र जल्द सामान्य हो। लेकिन यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की कमजोरियों को उजागर करती है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो छोटी बीमारियां बड़े महामारी का रूप ले सकती हैं। सरगुजा प्रशासन को अब ठोस योजना बनानी होगी, ताकि मरीजों की परेशानी कम हो और स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रहें।

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