अंबिकापुर: तालाब भराव पर BJP-कांग्रेस भिड़ी, तहसीलदार के फैसले से हड़कंप : Ambikapur: BJP and Congress Clash Over Pond Filling

Uday Diwakar
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Ambikapur: BJP and Congress Clash Over Pond Filling: सरगुजा:​​​अंबिकापुर: 15 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर में बस स्टैंड के समीप रिंग रोड से सटे प्राचीन तालाब को मिट्टी भरकर पाटने के विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। तहसीलदार के एक फैसले पर सत्ता पक्ष भाजपा और विपक्ष कांग्रेस के पार्षदों के बीच ठन गई, जिससे शहर में हड़कंप मच गया। रविवार रात शुरू हुए भराव कार्य को देखते हुए नगर निगम और जिला प्रशासन ने तत्काल रोक लगा दी है। दोनों दलों के कार्यकर्ता सोमवार सुबह साइट पर पहुंचे और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आए।

विवाद का केंद्र बिंदु अंबिकापुर का वह प्राचीन जलाशय है, जो दशकों से शहरवासियों की प्यास बुझाता आ रहा था। स्थानीय पार्षदों के अनुसार, यह तालाब रिंग रोड विस्तार के लिए बाधा बन रहा था। तहसीलदार ने शनिवार को एक नोटिस जारी कर तालाब को सरकारी जमीन घोषित करते हुए भराव की अनुमति दी, जिसके बाद रविवार रात जेसीबी मशीनें लगाकर मिट्टी भरना शुरू हो गया। कांग्रेस पार्षद रमेश सिंह ने आरोप लगाया, “यह तालाब शहर का ऐतिहासिक जलस्रोत है। भाजपा इसे रिंग रोड के बहाने व्यापारियों को सौंपना चाहती है। तहसीलदार का फैसला पक्षपातपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि भराव कार्य रात में गुप्त रूप से शुरू किया गया, ताकि विरोध न हो सके।

भाजपा पार्षद सीमा वर्मा ने पलटवार किया, “यह तालाब सूख चुका है और जर्जर हालत में खतरा पैदा कर रहा था। रिंग रोड विस्तार से ट्रैफिक सुगम होगा, जो शहर के हित में है। कांग्रेस वाले वोटबैंक के लिए तालाब बचाने का नाटक कर रहे हैं।” दोनों पक्षों के समर्थक सोमवार सुबह साइट पर जमा हो गए, जहां नारेबाजी और धक्कामुक्की की स्थिति बन गई। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया। नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रियंका शर्मा ने बताया, “शिकायत मिलते ही हमने भराव कार्य रोक दिया। अब तकनीकी टीम जांच करेगी कि तालाब सरकारी है या निजी। रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।”

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Ambikapur: BJP and Congress Clash Over Pond Filling

जिला कलेक्टर ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने तहसीलदार को नोटिस वापस लेने और वैकल्पिक योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। स्थानीय पर्यावरणविद् डॉ. राकेश पांडे ने चेतावनी दी, “अंबिकापुर जैसे शहर में जलस्रोतों का संरक्षण जरूरी है। तालाब भरने से भूजल स्तर गिरेगा और बाढ़ का खतरा बढ़ेगा। प्रशासन को पुरातत्व विभाग से सलाह लेनी चाहिए।” शहरवासी दोहरी मार झेल रहे हैं—एक तरफ ट्रैफिक जाम, दूसरी तरफ जल संकट। एक दुकानदार ने कहा, “यह तालाब हमारी जिंदगी का हिस्सा था। अब रिंग रोड बनेगा तो अच्छा, लेकिन तालाब क्यों नष्ट?”

यह विवाद सरगुजा की राजनीति को गर्मा सकता है। आगामी नगर निगम चुनावों से पहले दोनों दल इसे मुद्दा बना सकते हैं। कांग्रेस ने जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है, जबकि भाजपा रिंग रोड परियोजना को जनहित का बताकर समर्थन जुटा रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि 48 घंटे में जांच पूरी कर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, साइट पर पुलिस तैनात है और भराव कार्य पूरी तरह बंद है।

अंबिकापुर के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि विवाद शांत हो और शहर विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन बना रहे। यह घटना स्थानीय प्रशासन के फैसलों की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।

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