Ambikapur: On the bulldozer drive former Deputy Chief Minister TS Singh Deo stated—taking action solely against the poor is not right: सरगुजा:अंबिकापुर:11 मई 2026: छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह अनुचित है कि शहरी विकास और कानून की अनुपालन का भार सिर्फ गरीब और कमजोर वर्गों पर थोपा जा रहा है, जबकि बड़े बाबू–माफिया नेटवर्क पर कार्रवाई लगभग नजरअंदाज होती दिखती है। सिंहदेव ने यह भी कहा कि बुलडोजर का इस्तेमाल “न्याय” की बजाय “निवेश दोस्त” और “सत्ता‑संरक्षित” ताकतों के हितों को बचाने के उपकरण की तरह हो रहा है, जो लोकतंत्र और न्याय के विचार के खिलाफ है।
टीएस सिंहदेव ने यह बातें अंबिकापुर और आसपास के इलाकों में हाल के दिनों में हुई लगातार बुलडोजर वाली “अतिक्रमण हटाओ” अभियानों के मद्देनजर रखी हैं, जहां झुग्गी‑झोपड़ियों के अलावा छोटे व्यापारियों की दुकानें और अवैध माने गए निर्माण भी ढाहे गए। सिंहदेव ने बताया कि जब अतिक्रमण और अनाधिकृत निर्माण की बात उठती है, तो आमतौर पर निगम या प्रशासन उन्हीं को निशाना बनाता है, जिनके पास न वकील हैं न राजनीतिक संरक्षण, जबकि बड़ी इमारतों और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्सों पर लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा, “कानून का डंडा सिर्फ गरीबों पर नहीं चलना चाहिए; यदि अतिक्रमण और नियम तोड़ने की बात की जा रही है, तो इसमें सभी वर्गों को बराबर शामिल होना चाहिए–चाहे वह बड़ा बिल्डर हो, डाकूमेंटेड इंडस्ट्रियलिस्ट हो, या छोटा फुटपाथ वाला ठेला वाला।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि बुलडोजर की छवि अक्सर “सख्त कानून‑व्यवस्था” की तरह बेची जाती है, लेकिन अगर यह छवि सिर्फ गरीबों की कमर तोड़ने के लिए है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
गरीबों पर अत्याचार या नियम का पालन?
टीएस सिंहदेव ने बताया कि राजनीतिक रूप से बुलडोजर आज एक “संकेतक तस्वीर” बन गया है, जिसकी मदद से दिखाया जाता है कि प्रशासन “सख्त” है, लेकिन अगर इसका टारगेट लगातार उन्हीं परिवारों और व्यापारियों के ठिकानों पर रहता है जिनके घर–दुकान का निर्माण वर्षों पहले हो गया था और उनके पास वैध दस्तावेजों की कमी थी, तो यह असल में नीतिगत विफलता को छुपाने का तरीका है।
उन्होंने कहा, “क्या यह न्याय है कि किसी झोपड़ी या झुग्गी को रातों‑रात ढहा दिया जाए, जहां बच्चे पढ़ते हैं, बूढ़े रहते हैं, मजदूर आराम करते हैं, और दूसरी तरफ वही निगम जो ‘अतिक्रमण’ की बात करता है, बकाया टैक्स और बिना लाइसेंस चल रही बड़ी इमारतों के मालिकों के खिलाफ लंबे समय तक कार्रवाई से पीछे भागता है?” सिंहदेव ने यह भी बताया कि झुग्गी‑झोपड़ीवालों को अक्सर बेघर करने के बाद उन्हें वैकल्पिक आवास या नुकसान की भरपाई देने की बात भुलाई जाती है, जिससे न केवल आर्थिक तबाही आती है, बल्कि उनका सामाजिक अस्तित्व भी डगमगा जाता है।
Ambikapur: On the bulldozer drive former Deputy Chief Minister TS Singh Deo stated—taking action solely against the poor is not right
सिंहदेव ने सत्ताधारी दल और प्रशासन पर सीधा सवाल उठाया कि “क्या बुलडोजर कार्रवाई शहरी नियोजन की जरूरत है, या यह मीडिया और सोशल मीडिया पर ‘सख्त नेता’ की छवि बनाने का दृश्यमय प्रचार है?” उन्होंने कहा कि अगर सच में शहर अव्यवस्थित और अतिक्रमणमुक्त होना है, तो उसके लिए पहले नियम‑नीतियां और योजना सुधारनी चाहिए, न कि गरीबों के घर ढहाने को “सख्त कदम” बताकर दिखाया जाए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब‑जब अंबिकापुर और आसपास बड़े प्रोजेक्ट के नाम पर जमीन उपयोग और निर्माण नीति में लचीलापन दिखा, तब उसे “विकास” का नारा दिया गया, लेकिन जब छोटे आवास या दुकानों की बारी आती है, तो उन पर कठोरता से नियम लागू किए जाते हैं। टीएस सिंहदेव ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल गरीबों के लिए असुरक्षा का संकेत हैं, बल्कि न्यायप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती हैं कि क्या भारतीय संविधान के दायरे में “समानता का अधिकार” हर वर्ग के लिए बराबर लागू हो रहा है।
बयान में सिंहदेव ने बुलडोजर के बजाय वैकल्पिक नीतियों का सुझाव रखा। उनका मानना है कि अतिक्रमण‑मुक्त शहर बनाने के लिए पहले तो एक लंबी अवधि की योजना‑आधारित नीति होनी चाहिए, जिसमें घर‑दुकान‑अस्थायी निर्माण की निर्माण‑समय और नियमों की उल्लंघन की स्थिति का वस्तुनिष्ठ आकलन हो। उन्होंने यह भी कहा कि जहां औपचारिक दस्तावेजों की कमी है, वहां जुर्माना या फाइन‑सिस्टम, री‑सेटलमेंट योजनाएं और छोटे दुकानदारों के लिए नई पंजीकृत जगहें देना ज्यादा न्यायसंगत रहेगा, बजाय उन्हें बिना चेतावनी और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्त करने के।
उन्होंने जोर देकर कहा कि “सख्ती तभी न्यायसंगत होती है, जब वह समान रूप से सभी पर लागू हो; और तभी प्रभावी होती है, जब उसके साथ विकल्प और न्याय‑अधिकार भी जुड़े हों।” सिंहदेव ने राज्य सरकार से अपील की कि बुलडोजर कार्रवाई जैसी दृश्यमय कार्यवाही के बजाय एक पारदर्शी, न्यायाधारित और समावेशी शहरी नीति बनाई जाए।
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