Fire at Ambikapur Plastic and Firecracker Agency Brought Under Control After 19–20 Hour Struggle: सरगुजा:अंबिकापुर: 24 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मुख्य नगर अंबिकापुर में स्थित मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा होलसेल एजेंसी में लगी भीषण आग पर लगभग 19–20 घंटे की लगातार जद्दोजहद के बाद अंततः नियंत्रण हासिल कर लिया गया है। गुरुवार दोपहर शुरू हुई यह आग शुक्रवार तड़के तक तपती रही और शहर के राम मंदिर रोड इलाके में अफरातफरी मचा दी। हालांकि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है, लेकिन तीन मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिल से अब भी धुआं उठ रहा है और इमारत का एक बड़ा हिस्सा आग की भयंकर तपिश व भारी पानी की बौछार से ढह चुका है, जिससे दृश्य और भी भयावह लग रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, गुरुवार की दोपहर करीब 12.30 बजे मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा होलसेल एजेंसी में तेज धमाके के साथ आग लग गई। शुरू में आस‑पास के लोगों को लगा कि शायद किसी वाहन का टायर फट गया है, लेकिन जब वे बाहर निकले तो देखा कि दुकान व गोदाम के भीतर भयंकर आग लगी हुई है। इस गोदाम में प्लास्टिक के सामान सहित बड़ी मात्रा में पटाखे और अन्य ज्वलनशील सामान भंडारित था, जिसके कारण आग एकदम तेजी से फैल गई।
घटना की सूचना मिलते ही आस‑पास के लोगों में अफरातफरी मच गई। फायर ब्रिगेड की टीमों को सूचित किया गया और मौके पर पांच‑छह दमकल गाड़ियों के साथ दमकलकर्मी पहुंचे। लेकिन प्लास्टिक और पटाखे की आग इतनी तेज थी कि पहले कुछ घंटों तक आग नियंत्रण में आने का नाम नहीं ले रही थी। कलेक्टर अजीत बसंत और एसपी सहित जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।

19‑20 घंटे की कड़ी जद्दोजहद और नियंत्रण
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस आग को बुझाने के लिए लगभग 8–10 घंटे तक निरंतर लगातार 25–30 टैंकर पानी उपयोग में लाया गया। अंबिकापुर के अलावा विश्रामपुर, सूरजपुर, दरिमा एयरपोर्ट और आसपास के कई दमकल स्टेशनों से टीमें लगातार मौके पर पहुंचती रहीं। आग पर काबू पाने की प्रक्रिया इतनी कठिन थी कि यह लगभग 19–20 घंटे तक चलती रही, जिसमें दमकल कर्मियों को उबरती गर्मी, धुएं की घनी चादर और बार‑बार होने वाले छोटे‑बड़े धमाकों के बीच खड़े होकर काम करना पड़ा।
इस दौरान आग की लपटें कई बार इमारत की ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गईं, जिससे इमारत की संरचना पर भारी दबाव पड़ा। आग की तीव्र गर्मी और बार‑बार डाले गए जल के भार के कारण इमारत की ऊपरी मंजिल और दीवारों का एक बड़ा हिस्सा धीरे‑धीरे ढहने लगा। अंत में जब आग की जांच में लपटें कम होती दिखीं, तो अधिकारियों ने औपचारिक तौर पर घोषणा कर दी कि आग पर नियंत्रण हासिल कर लिया गया है, हालांकि ऊपरी मंजिल से अभी भी धुआं निकल रहा है और वह खंडहर जैसी दशा में है।

इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया
मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा होलसेल एजेंसी अंबिकापुर के राम मंदिर रोड पर स्थित तीन मंजिला इमारत में था, जहां नीचे की मंजिल पर दुकान और ऊपर की मंजिलों पर बड़े‑बड़े गोदाम थे। इस आग से पूरी इमारत काफी हद तक जलकर राख हो चुकी है और ऊपरी मंजिल का एक बड़ा हिस्सा ढहकर नीचे गिर चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत अब पूरी तरह “खंडहर” जैसी दिख रही है और यह जायजा लेने में बहुत समय लगेगा कि क्या यह बहरहाल ठीक हो सकती है या नहीं।
इस आगजनी में लाखों रुपये का प्लास्टिक सामान और पटाखे जलकर खाक हो गए। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, इस एजेंसी से पूरे सरगुजा और आसपास के क्षेत्रों के लिए प्लास्टिक व आतिशबाजी का सामान सप्लाई होता था, इसलिए आर्थिक नुकसान की गुंजाइश और भी बड़ी है। कुछ रिपोर्ट्स में इस नुकसान को “करोड़ों के करीब” तक बताया जा रहा है, लेकिन अभी सटीक आकलन नहीं हुआ है।
Fire at Ambikapur Plastic and Firecracker Agency Brought Under Control After 19–20 Hour Struggle
आग लगने की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने आसपास के रिहायशी घरों के निवासियों को सुरक्षा के लिए समय रहते खाली करवाना शुरू कर दिया। स्थानीय निकाय और थाना प्रशासन की टीमें गली‑मोहल्लों में घूमकर लोगों से कहा कि वे अपने परिवारों सहित ऊपरी या सुरक्षित स्थानों पर जाएं, क्योंकि पटाखों व प्लास्टिक की आग के कारण छोटे‑बड़े धमाके लगातार हो रहे थे।
कई घरों के बाहर धुआं‑धुआं हो गया था और लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। जिला कलेक्टर ने जारी बयान में कहा कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई और न ही किसी को गंभीर चोटें आईं, जो इतने भयंकर तांडव के बावजूद एक राहत भरी बात है। फिर भी आसपास की कई दुकानों और घरों की दीवारों पर जलन के निशान दिखे और कुछ स्थानों पर नुकसान की बात बताई जा रही है।
घटना के बाद क्षेत्रीय मंत्री राजेश अग्रवाल सहित कई नेता और अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने कहा कि आग कैसे और किस कारण लगी, इसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। कुछ स्थानीय हलकों में शॉर्ट सर्किट या निर्माण संबंधी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं, लेकिन अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई कारण घोषित नहीं किया गया।
यह भी पढ़ें-सूरजपुर में तालिबानी सजा: चोर समझकर युवक का सिर मुंडवाया, जूतों की माला डालकर घुमाया








