करोड़ों खर्च किए गए पीजी कॉलेज ग्राउंड का दुखद सच : प्रशासनिक लापरवाही से सूख रहे पौधे, क्षतिग्रस्त संरचनाएं : The Tragic Reality of the PG College Ground—Where Crores Were Spent

Uday Diwakar
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The Tragic Reality of the PG College Ground—Where Crores Were Spent: सरगुजा:​​​अंबिकापुर (23 मई 2026):शहर के गौरवमानी माने जाने वाले पीजी कॉलेज ग्राउंड की हालत अब चिंताजनक हो चुकी है। करोड़ों रुपये की लागत से हाल ही में ग्राउंड का सौंदर्यीकरण किया गया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में वही विकास कार्य अब धीरे-धीरे दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच ग्राउंड में लगाए गए नए पौधे सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं, जबकि वॉकिंग ट्रैक, बेंच, लाइटिंग और अन्य संरचनाएं भी क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। स्थानीय निवासी और छात्र दोनों इस बदहाली पर गहरा रोष व्यक्त कर रहे हैं और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।

ग्राउंड का सौंदर्यीकरण कार्य पिछले वर्ष समाप्त हुआ था, जिसमें लगभग 3.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस परियोजना के तहत ग्राउंड के चारों ओर पक्की वॉकिंग ट्रैक बनवाई गई थी, नए पेड़-पौधे लगाए गए थे, लाइटिंग सिस्टम को नया रूप दिया गया था और बच्चों के लिए खेलने का क्षेत्र भी सुव्यवस्थित किया गया था। स्थानीय लोग इसे अंबिकापुर शहर का एक महत्वपूर्ण आकर्षण और गौरव का प्रतीक मानते थे। लेकिन अब केवल कुछ ही महीनों में ही ग्राउंड की हालत इतनी बिगड़ गई है कि पहले जैसा आकर्षण बचाना मुश्किल लग रहा है।

ग्राउंड में लगाए गए पौधों की स्थिति सबसे चिंताजनक है। गर्मी के मौसम में पानी की कमी और नियमित सिंचाई के अभाव में कई पौधे पीले पड़कर सूख रहे हैं। कुछ जगहों तो पौधे पूरी तरह मर चुके हैं और उनके खूंटे खड़े हैं। स्थानीय बागवानी विभाग के अनुसार, नए पौधों को स्थापित होने के लिए कम से कम दो वर्ष तक नियमित देखभाल की आवश्यकता होती है, लेकिन ग्राउंड के प्रबंधन में कोई भी निकाय इसकी जिम्मेदारी नहीं ले रहा है। छात्रों ने बताया कि सुबह और शाम के समय यात्रा करने पर ग्राउंड में पानी की टंकी खाली दिखाई देती है और सिंचाई का कोई प्रबंध नहीं है।

वॉकिंग ट्रैक की स्थिति भी खराब होती जा रही है। गर्मी और बारिश दोनों के प्रभाव से ट्रैक की सतह पर दरारें पड़ने लगी हैं, कुछ जगहों तो टूटकर खंडित हो गई है। ट्रैक के किनारे लगे प्लास्टर और ईंटों का भी गिरना शुरू हो गया है। ग्राउंड का उपयोग करने वाले बुजुर्ग और व्यायाम करने वाले युवाओं के लिए यह अब खतरनाक हो सकता है। वहीं, बच्चों के खेलने वाले क्षेत्र में भी कुछ पुराने उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए हैं, लेकिन उनकी मरम्मत का कोई प्रयास नहीं किया गया है।

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लाइटिंग सिस्टम भी पूरी तरह कार्यशील नहीं है। ग्राउंड में लगे कई स्ट्रीट लाइट बंद हैं और कुछ जगहों तारों के खुले हुए हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक है। शाम के समय ग्राउंड अंधेरे में डूबा रहता है, जिससे वहां आने वाले लोगों को असुरक्षा का अनुभव होता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लैंपपोस्ट और वायरिंग की जांच तो होनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनदेखी की है।

प्रशासनिक लापरवाही पर स्थानीय निवासी और छात्र गहरा रोष व्यक्त कर रहे हैं। पीजी कॉलेज के छात्रों ने कहा कि ग्राउंड हमारे शहर का गौरव है और हमें लगता है कि करोड़ों रुपये व्यर्थ गिर गए हैं। “हमने ग्राउंड को सुंदर और व्यवस्थित देखा था, लेकिन अब वही जगह उजाड़ और दुर्दशा का प्रतीक बन गई है,” एक छात्र ने कहा। स्थानीय व्यापारी और बुजुर्ग भी इसी प्रकार की चिंता व्यक्त कर रहे हैं। वे कहते हैं कि ग्राउंड का उपयोग शहर के लोगों के लिए आराम और व्यायाम के लिए किया जाता था, लेकिन अब वहां आना भी मुश्किल हो रहा है।

बागवानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, जबकि नगर पालिका का कहना है कि ग्राउंड का प्रबंधन college administration के हाथों में है। इस प्रकार जिम्मेदारी का टालमटोल जारी है और कोई भी निकाय स्पष्ट रूप से कार्य नहीं कर रहा है। अधिकारियों ने कहा कि वे जल्द ही एक बैठक बुलाकर समस्या का समाधान करने की कोशिश करेंगे, लेकिन छात्रों और स्थानीय निवासियों को इसमें विश्वास नहीं है।

The Tragic Reality of the PG College Ground—Where Crores Were Spent

स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है और कहा कि यह प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण है। “करोड़ों रुपये खर्च कर विकास कार्य किया गया, लेकिन रखरखाव का कोई प्रबंध नहीं है। यह विकास की नकल है, असली विकास नहीं,” एक नेता ने कहा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ग्राउंड के रखरखाव के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए और तुरंत पौधों की सिंचाई, ट्रैक की मरम्मत और लाइटिंग की जांच की जाए।

अंबिकापुर के पीजी कॉलेज ग्राउंड की यह दुर्दशा न केवल स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह शहर की प्रशासनिक क्षमता और विकास योजनाओं की प्रभावीता पर भी सवाल खड़ा करती है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो करोड़ों के विकास कार्य पूरी तरह बर्बाद हो सकते हैं और ग्राउंड फिर से एक उजाड़ जगह बन सकता है। स्थानीय लोग और छावर चाहते हैं कि प्रशासन तुरंत जिम्मेदारी ले और ग्राउंड को फिर से सुंदर और व्यवस्थित बनाए।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर कदम उठाता है या फिर ग्राउंड की बदहाली और बढ़ती जाएगी। स्थानीय लोगों की आशा है कि जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई होगी और अंबिकापुर का यह गौरव फिर से चमक उठेगा।

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