Directs Priority Fuel Supply for Ambulance Services Amidst Petrol-Diesel Crisis : रायपुर :राज्य में बढ़ते पेट्रोल–डीजल संकट के बीच स्वास्थ्य विभाग ने चिंता जताते हुए एक आंतरिक अलर्ट जारी कर दिया है। हेल्थ कमिश्नर की ओर से कलेक्टरों और जिला चिकित्सा अधिकारियों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ईंधन की उपलब्धता सीमित होने की स्थिति में एम्बुलेंस व आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को ईंधन मुहैया कराने को प्राथमिकता दी जाए।
राजधानी रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल–डीजल आपूर्ति में गड़बड़ी आने से ईंधन की किल्लत का दौर चल रहा है। रायपुर के दर्जनों पेट्रोल पंप बंद रहे या “नो पेट्रोल–नो डीजल” का बोर्ड लगा हुआ दिखाई दिया। जहां ईंधन उपलब्ध है, वहां वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है।
जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने इसे “संकट नहीं, आपूर्ति गड़बड़ी” करार देते हुए भी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्धारित राशि में ही ईंधन देने, ड्रम व बोतल में विक्रय पर रोक लगाने जैसी रोक–थाम की कार्रवाइयां शुरू की हैं, ताकि जमाखोरी और अनियमितता को रोका जा सके।
हेल्थ कमिश्नर का आंतरिक आदेश
इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी चिंता राज्य भर के जिला अधिकारियों तक पहुंचाई है। हेल्थ कमिश्नर की ओर से जारी पत्र में कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि ईंधन की आपूर्ति नियमित न होने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं पर असर न पड़े, इसलिए 102, 108 और अन्य एम्बुलेंस, जरूरतमंद मरीजों के लिए चलाई जाने वाली सरकारी व निजी एम्बुलेंस तथा आपातकालीन मेडिकल वाहनों को पेट्रोल–डीजल की आपूर्ति में विशेष प्राथमिकता दी जाए।
पत्र में यह भी बताया गया है कि जहां भी पेट्रोल पंप पर निर्धारित मात्रा से ज्यादा या बिना पहचान–पत्र के ईंधन दिया जा रहा हो, वहां जिला प्रशासन नियम लागू करके अतिआवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को ईंधन दिलाना सुनिश्चित करे। इस तरह से निर्देश जारी करने का उद्देश्य यह है कि बीमार होकर भी मरीज समय पर अस्पताल तक पहुंच सकें और आपातकालीन उपचार में कोई रुकावट न आए।
हाल के दिनों में अन्य राज्यों में डीजल की कमी के कारण कई जगह एम्बुलेंस पंपों के बाहर खड़ी हो गई थीं और मरीजों को समय पर अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जा सका, जिससे स्वास्थ्य सेवा पर खतरा बढ़ गया था। छत्तीसगढ़ में भी जब से ईंधन की किल्लत की चर्चा तेज हुई है, तब से स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता और सुरक्षा उपायों को बढ़ाया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रायपुर व अन्य जिलों में स्थित निजी एम्बुलेंस संचालकों को भी जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर ईंधन आवंटन की योजना बनानी चाहिए, ताकि आपात स्थिति में कोई एम्बुलेंस ईंधन की कमी से बंधक न बने। इसके लिए जिला चिकित्सालय, जिला प्रशासन और पेट्रोल पंप अधिकारियों के बीच एक छोटी समन्वय समिति भी गठित करने की संभावना पर विचार चल रहा है।
पेट्रोल–डीजल संकट ने आम जन पर सीधा असर डाला है। टैक्सी, ऑटो, ट्रैक्टर–ट्रॉली और छोटे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए ईंधन की उपलब्धता कम होने से लोग घंटों पंपों पर इंतजार कर रहे हैं। इस दबाव के बीच अगर एम्बुलेंस सेवाओं को भी ईंधन न मिला, तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है, जिसके मद्देनजर हेल्थ कमिश्नर ने यह आंतरिक आदेश जारी किया है।
स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि घर से लेकर जिला अस्पताल तक एम्बुलेंस सेवा अब एक जरूरी जन सुविधा बन चुकी है, खासकर रात के समय, मानसून और आपात चिकित्सा में। ऐसे में ईंधन संकट के दौर में उन्हें प्राथमिकता देना नैतिक और नैसर्गिक दोनों हक से जरूरी है। डॉक्टरों ने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन निजी एम्बुलेंस को भी रजिस्टर करके उनकी सूची बनाए, ताकि आवंटन में न्याय और निगरानी दोनों हो सके।
Directs Priority Fuel Supply for Ambulance Services Amidst Petrol-Diesel Crisis
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में जनता से अपील की कि वे घबराहट या अफवाहों में न आएं, क्योंकि राज्य में पेट्रोल, डीजल और गैस का भंडार पर्याप्त है और आपूर्ति धीरे‑धीरे सामान्य हो रही है। फिर भी, जिला प्रशासन ने जमाखोरी और ज्यादा मात्रा में ईंधन खरीदने पर रोक लगा दी है ताकि बुनियादी जरूरतों को तरजीह मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग के इस कदम को जनहित के लिए आवश्यक कदम बताया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में जब तक ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक जिला कलेक्टर, जनपद पंचायत अधिकारी और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच नियमित बैठकों के माध्यम से एम्बुलेंस सेवाओं को ईंधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था को जारी रखने का आह्वान किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग इस घटनाक्रम को एक लंबे समय तक चलने वाली रणनीति के तौर पर देख रहा है। जिला स्तर पर यह तय किया जा रहा है कि अगली बार भी ईंधन संकट या आपूर्ति गड़बड़ी की स्थिति आए तो एम्बुलेंस, रेफरल वाहन, आपात चिकित्सा टीम और जरूरी दवा वितरण वाहनों को ईंधन देने की प्राथमिकता नियम के रूप में बना दी जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों की जान बचाने वाली यह सेवा न रुके।
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