Protest Against Online Medicines: सरगुजा:अंबिकापुर (21 मई 2026):सरगुजा में एक दिन के लिए ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ केमिस्टों ने जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया। ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (एआईओसीडी) के आह्वान पर संयुक्त रूप से आयोजित “देशव्यापी बंद” के तहत अंबिकापुर समेत सरगुजा संभाग की लगभग सभी मेडिकल दुकानें बंद रहीं। इसके बाद दवा व्यापारियों ने बाइक–स्कूटी रैली निकालकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग केन्द्र व राज्य सरकार से की।
मेडिकल दुकानें पूरी तरह बंद
सरकारी दिशा‑निर्देशों के तहत भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए खुलने वाली मेडिकल दुकानों का यह दिन अलग नजर आया। अंबिकापुर की व्यस्त बाजारों जैसे अग्रसेन चौक, जय स्तंभ चौक, महामाया चौक, संगम चौक और घड़ी चौक पर लगभग सभी दवा दुकानें शटर बंद हालत में दिखाई दीं। दुकानदारों ने 20 मई को एक दिवसीय आंशिक बंद के रूप में बंद रखने का ऐलान किया था, जिसका व्यापक असर सरगुजा जिले में देखने को मिला।
पुष्टि के अनुसार, सरगुजा औषधि विक्रेता संघ के नेतृत्व में यहां की दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। कई दुकानों पर ताले लटके हुए थे, जबकि शेष पर “आज दवा दुकानें बंद – ऑनलाइन दवा विरोध” जैसे पोस्टर चिपकाए गए थे। मरीजों को दिनभर दवा के लिए आस–पास के गांवों या प्राइवेट क्लिनिक तक जाना पड़ा, जिससे आम जन को परेशानी हुई।
इस दौरान केमिस्टों ने शहर में बाइक और स्कूटी रैली का आयोजन किया। रैली के दौरान व्यापारियों ने ओरल थर्मोमीटर और दवा की खाली पैकिंग उठाकर संकेत दिया कि ऑनलाइन दवाओं की बढ़ती लोकप्रियता “पारंपरिक फार्मेसी व्यवसाय को तोड़ रही है”। रैली अग्रसेन चौक से शुरू होते हुए जय स्तंभ चौक, महामाया चौक, संगम चौक होते हुए घड़ी चौक तक पहुंची, जहां केमिस्टों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से ऑनलाइन दवा प्लेटफॉर्म पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
“हम दिन‑रात काम कर रहे हैं, लेकिन ऑनलाइन कंपनियां बिना डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन के दवा बेच रही हैं,” एक दुकानदार ने बताया। उनका कहना था कि कई ऑनलाइन फार्मेसी ऐप्स पर बिना योग्य रजिस्ट्रेशन के दवा बिक्री की जा रही है, जिससे नकली या गुणवत्ता रहित दवा लोगों के हाथों में पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
केमिस्टों के नेता शेखर चौधरी ने कहा कि ऑनलाइन दवा विक्रेताओं के कारण लोकल फार्मेसी व्यवसाय का 40 से 50 फीसदी कारोबार कम हो चुका है। उनका आरोप है कि बड़ी कॉरपोरेट फर्मों को भारी छूट और डिस्काउंट दिए जा रहे हैं, जबकि पारंपरिक दवा दुकानों पर लगातार बढ़ता टैक्स और लाइसेंस शुल्क उनकी आर्थिक स्थिति को और खराब कर रहा है।
इसके साथ ही केमिस्टों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा डिलीवरी के दौरान भंडारण और तापमान के सही मानक नहीं रखे जाते हैं, जिससे विटामिन, इंसुलिन और अन्य ठंड में रखी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। “हमारी दुकानों पर डॉक्टर की प्रिस्क्रिप्शन चेक करके ही दवा बेची जाती है, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह नियम ढीला रखा जा रहा है,” एक अन्य दुकानदार ने बताया।
Protest Against Online Medicines
सरगुजा के साथ रायपुर, बिलासपुर, बस्तर जैसे अन्य जिलों में भी दवा दुकानें बंद रहीं और वहां भी बाइक रैलियां निकाली गईं। छत्तीसगढ़ के ज्वाला प्रसाद ठाकुर, जो राज्य स्तरीय केमिस्ट संघ के पदाधिकारी हैं, ने कहा कि राज्य में हजारों मेडिकल स्टोर इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं। देशभर में लगभग 12 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर 20 मई को बंद रखने का आह्वान किया गया था, जिसका असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिला।
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से दुकान बंद होने के कारण मरीजों को दवा के लिए दूर–दूर तक जाना पड़ा, जिससे लोगों की आलोचनाएं भी उठीं। लेकिन केमिस्टों का कहना है कि यह एक संकेत के रूप में आयोजित हड़ताल है, जिससे सरकार का ध्यान ऑनलाइन दवा बाजार के नियमन की ओर खींचा जा सके।
सरगुजा में बंद के दौरान कई लोगों ने शिकायत की कि सामान्य और टाइम‑बाउंड दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हुई। वहीं, कुछ दुकानों ने विशेष रूप से आपात स्थिति के लिए मोबाइल नंबर जारी किए, ताकि इमरजेंसी में दवा घर तक पहुंचाई जा सके। इस तरह स्थानीय स्तर पर कुछ छूट भी देखने को मिली, लेकिन संगठन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि यह आंदोलन “सेहत और व्यवसाय दोनों की रक्षा” के लिए जारी रहेगा।
केमिस्ट नेताओं ने मांग की कि केन्द्र सरकार ड्रग कंट्रोल रूल्स को कड़ा बनाकर ऑनलाइन दवा विक्रेताओं को स्थानीय फार्मेसी की तर्ज पर लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और नियमित निरीक्षण के दायरे में लाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे भी आंदोलन की शक्ल बदल सकती है और हड़ताल लंबे समय तक जारी रह सकती है।
सरगुजा के युवा डॉक्टर डॉ. राजेश पटेल ने कहा कि दवा की ऑनलाइन बिक्री से आरामत और घर तक पहुंच मिलती है, लेकिन बिना डॉक्टर की राय के दवा लेना खतरनाक हो सकता है। उनका सुझाव है कि ऑनलाइन फार्मेसी को लाइसेंस आधारित व्यवस्था में लाया जाए और उन्हें डॉक्टर की औषधि पर्ची की वैधता जांचने की अनिवार्यता लागू की जाए।
सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऑनलाइन दवा बिक्री के नियमन पर चर्चा जारी है। इस बीच सरगुजा के केमिस्टों की उम्मीद है कि आने वाले दिनों में नीति निर्माता उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों तरह की दवा बाजार के बीच संतुलन बनाने की दिशा में उपाय सामने लाए जाएंगे।
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