Surguja: Amidst 38–39°C heat parents appeal to postpone classes until July 1: सरगुजा:अंबिकापुर (18 June 2026):लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के बीच क्षेत्रों में स्कूलों के संचालन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। सरगुजा जिले के कई स्थानों पर अधिकतम तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित नजर आए। उन्होंने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि मानसून की अनिश्चितता और भीषण गर्मी के कारण स्कूलों की कक्षाएँ 1 जुलाई तक स्थगित कर दी जाएँ या कम से कम दोपहर की पढ़ाई को हटाकर समय सारिणी में बदलाव किया जाए।
ज्ञापन सौंपने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों का कहना है कि जून के अंतिम सप्ताह में अचानक तेज़ गर्मी ने छोटे बच्चों के लिए परिस्थितियाँ कठिन कर दी हैं। “बच्चों को स्कूल में गए बिना ही सिरदर्द, उल्टी और जलस्त्राव जैसी समस्याएँ देखने को मिल रही हैं,” कहा गया। एक संगठक ने बताया, “सरगुजा के कई हिस्सों में मौके पर छाया और जलपान की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में यह आवश्यक है कि प्रशासन संवेदनशील होकर अस्थायी कदम उठाए।”
प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के कई अभिभावक सुबह-शाम की बजाय दिन के अधिक तापमान वाले घंटों में बच्चों को स्कूल भेजने में असहजता जता रहे हैं। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारे छोटे बच्चे पेट, सिर और त्वचा संबंधी समस्या से जूझ रहे हैं। स्कूलों में पंखे काम नहीं कर रहे या पर्याप्त छाया नहीं है। बेहतर होगा कि कक्षाएँ 1 जुलाई तक स्थगित कर दी जाएँ और तब तक बच्चों की सेहत के मद्देनज़र वैकल्पिक ऑनलाइन या घर पर अध्ययन की व्यवस्था सुझायी जाए।”
सामाजिक कार्यकर्ता यह भी मांग कर रहे हैं कि यदि पूरी तरह बंद करना संभव न हो तो स्कूल समय बदला जाए — सुबह जल्दी 7:00 बजे से 10:00 बजे तक या शाम को ठंडे समय में कक्षाएँ आयोजित की जाएँ। साथ ही, प्रत्येक स्कूल में पर्याप्त पेयजल, छाया, प्राथमिक उपचार किट और एक तात्कालिक मेडिकल संपर्क सूची सुनिश्चित करने की आवश्यकता बतायी गयी है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे बच्चों के गणित, भाषा और अन्य विषयों के लिए सुनियोजित शॉर्ट-सेशन तय किए जाएँ ताकि गर्मी के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो।
दैनिक गतिविधियों और स्कूल की उपस्थिति पर भी असर पड़ा दिख रहा है। कई अभिभावक ने बताया कि गर्मी के कारण बच्चों की उपस्थिति में गिरावट आई है और कई स्थानों पर छात्र सुबह-शाम की बसों में यात्रा करने में असहजता जता रहे हैं। कुछ अभिभावकों का तर्क है कि मानसून के आने से पहले तापमान में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और प्रातःकालीन थर्मल शॉक बच्चों की रोग-प्रतिक्रिया को बढ़ा सकता है।
Surguja: Amidst 38–39°C heat parents appeal to postpone classes until July 1
जिला प्रशासन ने फिलहाल मामले पर औपचारिक बयान नहीं दिया है। कलेक्टर कार्यालय से संपर्क करने पर बताया गया कि ज्ञापन प्राप्त हो गया है और उसे प्रासंगिक विभागों — शिक्षा, स्वास्थ्य तथा लोक निर्माण — के साथ साझा किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रशासन नीति बनाते समय बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों को ध्यान में रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल खोलने या बंद करने का फैसला मौसम विभाग की भविष्यवाणियों, स्वास्थ्य विभाग की सलाह और स्कूलों की तैयारियों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
स्थानीय स्कूलों के कुछ प्रधानाध्यापक और शिक्षकों का मानना है कि पढ़ाई में देरी होने से अकादमिक कैलेंडर प्रभावित हो सकता है। एक स्कूल प्रधान ने कहा, “हम समझते हैं कि गर्मी गंभीर मुद्दा है, पर वर्षों का सिलेबस और परीक्षा शेड्यूल भी हमारे पीछे है। अगर प्रशासन चाहता है तो विद्यालयों को आवश्यक संसाधन और सुविधा दी जाए ताकि गर्मी में भी पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।” उन्होंने स्कूलों में शेड, पेयजल, पंखे व प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था को सुधारने का सुझाव दिया।
अत्यधिक गर्मी में बच्चों के लिए ताप संबंधी समस्याएं — हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और त्वचा सम्बन्धी विकार — अधिक सामान्य हो सकती हैं। विभाग के एक चिकित्सक ने कहा, “छोटे बच्चों की शरीर तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है। अगर स्कूलों में पर्याप्त पानी और ठंडी जगह नहीं होगी तो जोखिम बढ़ सकता है।” उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल स्टाफ को पहले से जानकारियाँ दी जानी चाहिएं कि किस तरह के लक्षण पर तत्काल चिकित्सकीय मदद ली जाए।

नागरिकों और स्थानीय संगठनों की मांगों के साथ ही कई लोग प्रशासन से शीघ्र निर्णय की अपील कर रहे हैं ताकि अभिभावक अपने बच्चों की छुट्टियों और घरेलू व्यवस्थाओं का प्रबंध कर सकें। यदि प्रशासन जल्द ही कोई निर्देश जारी करता है तो उसके असर से स्कूल संचालन, परिवहन और बच्चों की पढ़ाई पर सीधे प्रभाव पड़ेगा।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन मांगों और स्वास्थ्य सम्बन्धी चिंताओं को किस समयसीमा में परखकर क्या फैसला लेता है। अभिभावक और सामाजिक संगठन भी कहा रहे हैं कि यदि उनके सुझावों पर सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो वे और अधिक व्यापक आंदोलन या जन-आंदोलन के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। फिलहाल मामला चुपि-चाप नहीं रह रहा और गर्मी के बीच शिक्षा व स्वास्थ्य दोनों की रक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर संवेदनशीलता पर जोर दिया जा रहा है।
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