सूरजपुर जिला चिकित्सालय में इंजेक्शन के बाद गर्भवती की हालत बिगड़ी : प्रसव के दौरान गर्भवती और अजन्मे शिशु की मौत, परिजनों का प्रदर्शन : Pregnant womans condition deteriorates after injection at Surajpur District Hospital

Uday Diwakar
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Pregnant womans condition deteriorates after injection at Surajpur District Hospital: सूरजपुर : जिले के मुख्य सरकारी अस्पताल, सूरजपुर जिला चिकित्सालय के मातृ-शिशु विभाग में आज हुए एक दर्दनाक हादसे ने क्षेत्र में भारी आक्रोश फैला दिया। अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला की स्थिति अचानक बिगड़ने के बाद प्रसव के दौरान उसकी और उसके गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशु की मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और डॉक्टरों तथा अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए।

परिजनों का कहना है कि भर्ती के दौरान महिला को किसी औषधि या इंजेक्शन के बाद हालत बिगड़ी। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही समय बाद महिला बेहोश हो गई और तत्काल बीमार पड़ गई। परिवार का आरोप है कि तुरंत प्रभावी चिकित्सीय देखभाल नहीं दी गई, जिससे उसकी और अजन्मे बच्चे की जान बचायी नहीं जा सकी। परिजनों ने घटना की वीडियो क्लिप और मोबाइल पर बातचीत दर्ज कराने का दावा भी किया और इसे सोशल मीडिया पर वायरल करने की चेतावनी दी।

घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल में एक बड़ी भीड़ जमा हो गई और परिजनों समेत गुस्साए स्थानीय लोग प्रशासन से जवाबदेही की मांग करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने डॉक्टरों व अस्पताल कर्मियों के खिलाफ नारेबाजी की और कई लोग मौके पर ही कथित घोर लापरवाही का जिम्मेदार ठहराते हुए उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे ताकि स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके।

अस्पताल प्रशासन ने प्रारम्भिक बयान में कहा कि मरीज की हालत अचानक गंभीर हुई और तत्काल चिकित्सकीय व आपातकालीन टीम ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल के मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट ने कहा कि घटना की स्वतंत्र चिकित्सा जांच करायी जा रही है और किसी भी तरह की लापरवाही साबित होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मरीज को दिए गए इंजेक्शन और दवाओं का रिकार्ड और चिकित्सीय डायरी उघा ली गयी है और परीक्षण के लिए भेजी जाएगी।

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पुलिस ने भी मामले की संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रबंधन और परिजनों से बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। पुलिस उपाधीक्षक ने कहा कि तहरीर मिलने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यदि कोई आपराधिक कदाचार पाया गया तो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। उन्होंने बताया कि महिला की मौत की वास्तविक वजह चिकित्सकीय परीक्षण और पोस्टमार्टेम रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी। पोस्टमार्टेम के नतीजे मिलने के बाद ही मृतक के परिजनों को विस्तृत रिपोर्ट दी जाएगी।

चिकित्सकों के अनुसार प्रसव के दौरान जटिलताएँ कई कारणों से हो सकती हैं—खून की कमी, संक्रमण, गर्भाशय संबंधी समस्याएँ या एलर्जी जैसी दवा-प्रतिक्रिया। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक ने हालांकि यह भी कहा कि अभी तक यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि इंजेक्शन ही सिर्फ़ कारण था; कारणों का पता लगाने के लिए दवा का सैंपल, मरीज के चिकित्सा इतिहास और पोस्टमार्टेम रिपोर्ट का विश्लेषण आवश्यक होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से की जाएगी।

स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने मामले पर चिंता जताई और मातृ-शिशु सुरक्षा को लेकर तत्काल समीक्षा के आदेश दिए हैं। जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य के प्रोटोकॉल का पालन हो रहा है या नहीं, इसका ऑडिट कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्पताल में मानक संचालन प्रक्रिया का उल्लंघन पाया गया तो कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक होने पर चिकित्सा अधिकारियों को निलंबित भी किया जा सकता है।

Pregnant womans condition deteriorates after injection at Surajpur District Hospital

घटना ने क्षेत्र में मातृ-शिशु देखभाल की गुणवत्ता और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि बार-बार ऐसी घटनाएँ सामने आने से लोगों का सरकारी अस्पतालों पर भरोसा टूट रहा है। उन्होंने माँ और बच्चे की सुरक्षा के लिए बेहतर प्रशिक्षण, आपातकालीन संसाधन और पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली की मांग की है।

कानूनी पहल के रूप में परिवार ने कहा है कि वे न्याय के लिए आगे भी संघर्ष करेंगे और अगर सरकारी स्तर पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो उच्च न्यायालय या मानवाधिकार संस्थाओं का दरवाज़ा खटखटाने का विकल्प भी अपनाया जाएगा। परिवार के वकील ने बताया कि वे पोस्टमार्टेम रिपोर्ट के आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग करेंगे।

इस घटना ने एक बार फिर समाज को याद दिलाया है कि प्रसव और मातृत्व से जुड़ी सेवाओं में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सीय मानकों और निगरानी को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। अभी मामले की विस्तृत जांच जारी है और परिणामों के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई तय होगी। पोस्टमार्टेम व दवा परीक्षण की रिपोर्ट आने पर ही स्पष्ट होगा कि वास्तव में क्या वजह थी और किसका उत्तरदायित्व तय किया जा सकेगा।


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