Surajpur: Herd of Four Tuskers Roams Through Rural Areas: सूरजपुर : सूरजपुर जिले के वन परिक्षेत्र के तहत आने वाले मोहनपुर क्षेत्र में इन दिनों चार दंतैल हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा है, जिससे आस‑पास के गांवों में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण दिन‑भर अपने घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं, खासकर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं तो लगभग पूरी तरह घरों में कैद सी जिंदगी जी रहे हैं।
सूरजपुर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले मोहनपुर सहित आसपास के जंगली इलाकों में लंबे समय से हाथियों के दलों की मौजूदगी बनी हुई है और इस वक्त चार दंतैल हाथियों का दल विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों की ओर बढ़ रहा है। वन विभाग के अनुसंधान के अनुसार, सूरजपुर वनमंडल में करीब 28 हाथी विभिन्न परिक्षेत्रों में चल‑फिर रहे हैं, जिनमें मोहनपुर के जंगल सीमावर्ती गांव भी शामिल हैं।
हाथियों का यह दल जंगल के अंदर से ही नहीं, बल्कि खेतों, गलियारों और गांवों के नजदीक से गुजर रहा है, जिससे फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार इन जानवरों ने खेतों में लगी धान, दाल व मक्का की फसलों को तहस‑नहस कर दिया है, जिससे छोटे किसान पहले से वित्तीय तंगी से जूझ रहे हैं।
चार में से कुछ हाथियों के दंतैल होने की वजह से ग्रामीणों में और अधिक डर और अशांति है, क्योंकि दंतैल हाथी आमतौर पर अधिक क्रोधी और आक्रामक माने जाते हैं। स्थानीय स्रोतों के मुताबिक, कुछ दिन पहले भी इस दल ने मोहनपुर व आसपास के बस्तियों के किनारे से गुजरते हुए घरों के पास तक आकर शोरगुल और उत्पात मचाया, जिससे बच्चे रोते और महिलाएं घरों में दरवाजे‑खिड़कियां बंद कर बैठने को मजबूर हो गईं।
इस इलाके में हाथियों के दलों के आतंक से लोगों के रोजमर्रा के कामकाज भी धीमे हो गए हैं। सुबह‑सुबह खेत जाने वाले किसान, बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं, वहीं पशुचारक भी जंगल के किनारे चराने वाले गांवों से अपने जानवर पहले ही घरों में बांधकर रख रहे हैं।
Surajpur: Herd of Four Tuskers Roams Through Rural Areas
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सूरजपुर वन मंडल के तहत लगातार निगरानी जारी है और हाथियों के दलों की गतिविधियों पर टीमें नजर रख रही हैं। हालांकि, वनाच्छादित और पहाड़ी इलाकों की वजह से हाथियों की ट्रैकिंग और उन्हें जंगल के भीतर ही रोकने में व्यावहारिक रूप से चुनौतियां बनी हुई हैं।
इस बीच वन विभाग ने ग्रामीणों को चेतावनी जारी करते हुए यह अपील की है कि वे जंगल के किनारे अकेले न निकलें, खासकर रात के समय और अंधेरे में रास्तों पर आवाजाही कम से कम रखें। कुल मिलाकर, आधिकारिक रूप से अभी तक इस दल ने सीधे जानहानि की घटना की औपचारिक रिपोर्ट जारी नहीं हुई, लेकिन ग्रामीण अत्यधिक डर और तनाव की स्थिति में हैं और इन्हें स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और विशेषहथियारबंद टोलियों की तैनाती की मांग कर रहे हैं।
घटनाक्रम यह स्पष्ट करता है कि सूरजपुर के जंगल‑सटे गांवों में हाथियों का आतंक लगातार बना हुआ है, जिससे वन्यजीव‑मानव संघर्ष की समस्या और गहराती जा रही है। ग्रामीण स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से निरंतर अलर्ट सिस्टम, बिजली से चलने वाले बाड़ (electric fencing), रास्तों पर साइनबोर्ड और नाइट‑पैट्रोलिंग की व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं।
इस बीच, ग्रामीणों की इज्जत, जान और रोजी‑रोटी दोनों को खतरे में डालने वाले इस संकट को हल करने के लिए न केवल तत्काल उपाय बल्कि जंगल‑इंसान संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक नीतिगत योजना की तत्काल आवश्यकता है। जब तक ऐसी नीतियां लागू नहीं होतीं, मोहनपुर और उसके आसपास के गांवों में चार दंतैल हाथियों का दल लगातार ग्रामीणों के लिए एक डरावनी सच्चाई बनकर रहेगा।
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