Ambikapur Municipal Corporation Takes Special Action at Ring Bandh Pond: सरगुजा:अंबिकापुर: अंबिकापुर नगर निगम ने शहर के प्रमुख जलसंसाधन रिंग बांध तालाब से किए गए व्यापक अवैध कब्जा‑हटाओ अभियान के दौरान तीव्र विवाद का सामना किया है। अतिक्रमण हटाने के काम को लेकर निगमकर्मी और कब्जाधारियों के बीच खुलाम‑खुला टकराव हो गया, जिसमें निगम टीम के खिलाफ गाली‑गलौच और शारीरिक धमकी के आरोप लगे हैं। इस घटना के बाद अंबिकापुर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर औपचारिक FIR दर्ज की है।
अंबिकापुर शहर के प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित रिंग बांध तालाब पर लगभग 57 डिसमिल जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने का मामला हाल ही में सामने आया है। जांच के बाद पता चला कि कुछ लोगों ने तालाब के जल भराव क्षेत्र में मिट्टी डालकर उसे पाट दिया और फिर इस जमीन पर अपना स्वामित्व दर्ज कराने की कोशिश की।
इस तरह जल संरक्षण के लिए बनाए गए तालाब का क्षेत्रफल काफी हद तक सिमट गया है, जिससे शहर के भविष्य में जल‑संकट और बारिश के मौसम में अधिक जलभराव जैसी समस्याओं की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर निगम और जिला प्रशासन को अतिक्रमण हटाने की मांग करते हुए कई बार चिंता व्यक्त की, जिसके बाद विशेष कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की गई।
निगम आयुक्त के निर्देश पर एक “उड़दस्ता टीम” शनिवार की दोपहर रिंग बांध तालाब पहुंची, जिसका नेतृत्व निगमकर्मी मो. इमरान कर रहे थे। टीम के साथ तीन एक्सीवेटर, दो डंपर और पांच ट्रैक्टर लगाए गए, जिनके जरिए तालाब में पाटी गई मिट्टी को हटाकर मूल बेस‑लेयर दोबारा उजागर किया जाना था।
प्रशासन की ओर से साफ‑साफ कहा गया था कि इस जमीन पर अदालती स्टे या अन्य रोक‑टोक नहीं लगी है और बिना निगम अनुमति के बाहरी व्यक्तियों द्वारा तालाब पर कब्जा करना कानूनी रूप से गलत है। यही कारण था कि निगम ने अभियान को तेज, ताकतवर और कानून‑अनुसार अंजाम देने का फैसला किया।
अतिक्रमण हटाते वक्त कर्मचारियों से बदसलूकी
जैसे ही एक्सीवेटर ने तालाब में दबी मिट्टी हटाना शुरू किया, 2–3 युवक कब्जाधारियों की ओर से तालाब के किनारे पहुंच गए और निगमकर्मियों पर जमकर गाली‑गलौच करने लगे। उनका दावा था कि इस जमीन पर “स्टे लगा है” और प्रशासन बिना अनुमति कुछ भी नहीं कर सकता, इसलिए उन्होंने निगम टीम को काम बंद करने के लिए दबाव डालना शुरू कर दिया।
इतना ही नहीं, कुछ युवकों ने निगमकर्मियों को सीधे‑सीधे धमकाया और कहा, “अधिकारी को बुलाओ, डंडा लेकर आओ”। वीडियो फुटेज में साफ देखा गया कि इन लोगों का व्यवहार इतना आक्रामक था कि कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरा लगने लगा। इस पूरे दौरान वहां मौजूद कर्मचारी बस यही कहते रहे कि वे सिर्फ निगम और एसडीएम के आदेशों पर कार्य कर रहे हैं।
Ambikapur Municipal Corporation Takes Special Action at Ring Bandh Pond
जब विरोध और बदसलूकी बढ़ती देखी गई तो मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिसकर्मी आगे बढ़कर भीड़ को शांत कराने की कोशिश कर रहे थे, जबकि निगम टीम अभी भी अपना काम जारी रखने की दिशा में थी। तालाब के आसपास लोग जमा हो गए, जिससे माहौल और भी उत्तेजित बन गया।
घटना के बाद अंबिकापुर नगर निगम ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और आरोपी कब्जाधारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन पर कर्मचारियों से गाली‑गलौच, धमकी और आधिकारिक कार्य में अवैध रूप से बाधा डालने की धाराओं में मामला दर्ज कराया। निगम प्रशासन का कहना है कि शहर के तालाबों और जल निकासी व्यवस्था पर जो भी अवैध कब्जा है, उसे अगले कुछ हफ्तों में धीरे‑धीरे हटाया जाएगा और इस दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित रखी जाएगी।
घटना के बाद शहर में दोनो तरह की प्रतिक्रियाएं उभरी हैं। कई नागरिकों ने निगम के फैसले का समर्थन किया कि यदि तालाबों और निस्तार भूमियों पर इसी तरह कब्जा रहा तो भविष्य में शहर में जल‑संकट, भूजल कमी और गहन जलभराव जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं। वे चाहते हैं कि प्रशासन अब सख्ती बरते और भू‑माफिया के लिए रास्ता न छोड़े।
दूसरी ओर, कुछ लोग इस तरह की तेज कार्रवाई से डरते नजर आ रहे हैं, खास तौर पर उन क्षेत्रों के निवासी जहां वर्षों से अवैध कब्जे चले आ रहे हैं। वे डर जताते हैं कि यदि अभियान बहुत तेजी से बढ़ा तो कई परिवारों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ सकता है। इसी चिंता के बीच स्थानीय नेता और प्रशासन के बीच बातचीत भी तेज है कि अतिक्रमण हटाते वक्त उचित सूचना और न्यूनतम विस्थापन के साथ कार्रवाई की जाए।
आगे क्या?
इस घटना के बाद अंबिकापुर नगर निगम ने यह संकेत दिया है कि अब तालाब‑नाला‑जल निकासी व्यवस्था पर जो भी अवैध कब्जा मिलेगा, उसे उसी तरह तेजी से हटाया जाएगा, लेकिन इसके साथ‑साथ कर्मचारियों की सुरक्षा और कानूनी ढांचे का पूरी तरह पालन भी सुनिश्चित किया जाएगा। पुलिस और निगम बीच बेहतर समन्वय की तैयारी चल रही है, ताकि भविष्य में किसी भी अभियान के दौरान कर्मचारियो
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