Police Invoke Non-Bailable Sections of Explosives Act Against Traders: सरगुजा:अंबिकापुर: सरगुजा जिला के अंबिकापुर शहर के राम मंदिर रोड स्थित “मुकेश पटाखा एवं प्लास्टिक होलसेल गोदाम” में 23 अप्रैल को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने अब सख्ती बरतते हुए जांच‑कार्रवाई मजबूत कर दी है। मुकदमे में छोटी‑मोटी धाराओं के बजाय अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़ी धाराएं और विस्फोटक अधिनियम की गैर‑जमानती धाराएं जोड़ दी गई हैं, जिससे मुख्य आरोपी कारोबारी मुकेश अग्रवाल और प्रवीण अग्रवाल की विधिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।
23 अप्रैल को दिन के समय राम मंदिर रोड पर स्थित पटाखा एवं प्लास्टिक की होलसेल दुकान/गोदाम में अचानक आग लग गई, जो कुछ ही देर में भीषण बन गई। गोदाम में जमा पटाखे और दहनशील प्लास्टिक सामग्री के कारण आग तेजी से फैली और आसपास की दुकानों व घरों पर भी खतरा उत्पन्न हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, देर रात तक दमकल दस्तों को लगातार प्रयास करना पड़ा ताकि आग पर पूरी तरह काबू पा सकें।
घटना के बाद कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए मुकेश पटाखा एजेंसी के संचालक मुकेश अग्रवाल और उनके रिश्तेदार प्रवीण अग्रवाल के खिलाफ अपने स्तर पर धाराएं लगाई गईं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में पटाखा और अन्य दहनशील सामग्री का बिना उचित अनुज्ञापत्र व सुरक्षा व्यवस्था के भंडारण ने अग्निकांड की वजह बनी, जिससे आसपास के घर‑दुकानों को भी नुकसान पहुंचा और निकटवर्ती निवासी डर के कारण बाहर भाग उठे।

शुरुआत में पुलिस ने मामले में अपेक्षाकृत हल्की व नॉन‑सीरियस धाराओं के साथ प्राथमिकी दर्ज की, जिस पर सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा ने नाराजगी जताई। जांच‑प्रक्रिया की समीक्षा के दौरान यह आभास हुआ कि ऐसे भीषण अग्निकांड में जहां जानमाल को गंभीर खतरा था, वहां जो धाराएं जोड़ी गई थीं, वे घटना की गंभीरता के अनुरूप नहीं थीं। इसके बाद आईजी ने एसपी के माध्यम से कोतवाली थाना प्रभारी और तैनात पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा और उचित कड़ी धाराएं जोड़ने को कड़ाई से निर्देशित किया।
आईजी के निर्देश के बाद कोतवाली पुलिस ने मामले की दोबारा समीक्षा की और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर नए आरोप जोड़े। FSL की रिपोर्ट में घटनास्थल से जले हुए पटाखों के अवशेष मिलने की पुष्टि हुई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि गोदाम में पटाखा और अन्य विस्फोटक‑संबंधित सामग्री का भंडारण वास्तव में था। इस तथ्य के आधार पर पुलिस ने BNS की धारा 324, 326(छ) और विस्फोटक अधिनियम की धारा 9(ख) जोड़ दीं।
इन नई धाराओं के तहत आरोपियों को उच्चतम 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है, जबकि विस्फोटक अधिनियम की धाराएं गैर‑जमानती हैं। इसका मतलब है कि अब मुकेश अग्रवाल और प्रवीण अग्रवाल को जमानत हासिल करने में भारी कठिनाई हो सकती है और मामले की जांच भी ज्यादा गंभीर ढंग से होगी।
Police Invoke Non-Bailable Sections of Explosives Act Against Traders
स्थानीय निवासी और आसपास की दुकानों के मालिक लगातार आरोप लगा रहे हैं कि इस तरह के खतरनाक सामान का भंडारण शहर के मुख्य व्यावसायिक‑धार्मिक क्षेत्र में होना ही एक बड़ी लापरवाही थी। वे कह रहे हैं कि यदि गोदाम में लगी आग अगर रात के समय भड़कती या अग्निशमन व्यवस्था देर से पहुंचती, तो जान‑माल का नुकसान और भयंकर हो सकता था। इसलिए लोग चाहते हैं कि न केवल दुकानदारों पर, बल्कि उन अधिकारियों पर भी जांच हो जिन्होंने बिना उचित अनुमति और सुरक्षा उपायों के ऐसे गोदाम को चलने दिया।
जनता का यह भी दावा है कि अन्य शहरों की तरह अंबिकापुर में भी अनेक पटाखा, रसोई गैस और दहनशील सामग्री वाले गोदाम घनी आबादी में संचालित हो रहे हैं, जिससे किसी भी समय ऐसी घटना दोबारा हो सकती है। लोग चाहते हैं कि प्रशासन अब इस तरह के गोदामों के लाइसेंस की पुनर्समीक्षा करे, नियमित निरीक्षण बढ़ाए और जो व्यवस्था भीड़ भरे इलाकों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करे, उसे तुरंत बंद करने का आदेश जारी किया जाए।
अब तक की जानकारी के अनुसार, मामले की फोरेंसिक और फायर‑साइंस जांच अभी चल रही है, जिसके बाद और भी तकनीकी आधार पर नई धाराएं जोड़े जाने की संभावना बनी हुई है। आरोपी कारोबारियों की ओर से कानूनी रूप से जमानत और धाराएं हटाने की कोशिश भी हो सकती है, लेकिन BNS एवं विस्फोटक अधिनियम की गैर‑जमानती धाराएं उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाएंगी।
इस घटना ने अंबिकापुर शहर में आग और विस्फोटक सामग्री से जुड़ी आपदा‑प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। नागरिक संगठन और आम जनता चाहते हैं कि इस मामले को सिर्फ दो व्यक्तियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि प्रादेशिक और स्थानीय लेवल पर भीखी अनुमति व निगरानी प्रक्रिया पर पूरी तरह जांच हो, ताकि भविष्य में ऐसे गंभीर अग्निकांड रोके जा सकें और नागरिकों की जान व संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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