Prisoner Dies at Ambikapur Central Jail: सरगुजा:अंबिकापुर: सरगुजा जिले के अम्बिकापुर स्थित केंद्रीय जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी की इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मृत्यु हो गई। इस घटना ने एक बार फिर जेल प्रशासन और कैदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लंबे समय से सजा काट रहे कैदी की अचानक तबीयत बिगड़ने और इलाज के दौरान दम तोड़ने से जेल के भीतर की स्वास्थ्य सुविधाओं पर बहस तेज हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, मृतक कैदी काफी समय से गंभीर धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। हाल ही में उसकी तबीयत अचानक खराब हुई, जिसके बाद उसे तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए जेल अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। वहां उपचार के दौरान उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और अंततः उसने दम तोड़ दिया।
छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की अस्वस्थता और मृत्यु का आंकड़ा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है । आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में राज्य की विभिन्न जेलों में कई कैदियों ने बीमार होकर जान गंवाई है, जिसके चलते राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी कड़ी नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव और जेल महानिदेशक को नोटिस जारी किया है । जानकारों का मानना है कि जेलों में कैदियों की अत्यधिक भीड़ (ओवरक्राउडिंग), डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों की कमी, और समय पर उचित उपचार न मिल पाना ऐसी घटनाओं के प्रमुख कारण हैं ।
अंबिकापुर सेंट्रल जेल में इससे पहले भी कैदियों के साथ कई तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें आत्महत्या और बीमारी से मौत के मामले शामिल हैं । जेल मैनुअल के नियमों के अनुसार, किसी भी कैदी की जेल में मृत्यु होने पर दंडाधिकारी (मैजिस्ट्रेट) की उपस्थिति में शव का पोस्टमार्टम वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ कराया जाना अनिवार्य होता है । इस मामले में भी प्रशासन ने जेल मैनुअल के अनुरूप प्रक्रिया पूरी करने की बात कही है।
Prisoner Dies at Ambikapur Central Jail
विशेषज्ञों के अनुसार, जेलों के भीतर कैदियों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एक प्रभावी तंत्र की सख्त आवश्यकता है। कैदियों की बढ़ती संख्या के सामने चिकित्सा संसाधनों का सीमित होना एक बड़ी चुनौती है। जब कोई कैदी गंभीर बीमारी की चपेट में आता है, तो अक्सर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर करने में देरी होती है, जो घातक साबित होती है । अब इस कैदी की मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले की विस्तृत जांच की मांग उठ रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या इलाज में कोई कोताही बरती गई या यह एक दुर्भाग्यपूर्ण चिकित्सकीय विफलता थी।
यह घटना न केवल मृतक के परिजनों के लिए दुखद है, बल्कि यह जेल प्रशासन को एक पारदर्शी और संवेदनशील स्वास्थ्य ढांचा सुनिश्चित करने के लिए आईना भी दिखाती है। फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा हो पाएगा।
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