Anti-Encroachment Drive at Mahamaya Hill in the Dabripani Area: सरगुजा:अंबिकापुर:9 मई 2026: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में अलसुबह अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शासकीय वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने का व्यापक अभियान चलाया। अंबिकापुर विकासखंड के खैरबार स्थित महामाया पहाड़ डबरीपानी क्षेत्र में वन, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम भारी सुरक्षा बल के साथ सुबह करीब 6 बजे पहुंची और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की। अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रशासन ने किसी भी संभावित विरोध या अवांछित स्थिति से निपटने के लिए पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था।
प्रशासन की इस कार्रवाई को लंबे समय से चल रही अतिक्रमण समस्या के खिलाफ सख्त कदम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि महामाया पहाड़ और डबरीपानी क्षेत्र में शासकीय वन भूमि पर लंबे समय से कई प्रकार के अवैध निर्माण और कब्जे किए गए थे। इनमें झोपड़ियां, अस्थायी ढांचे और कुछ पक्के निर्माण भी शामिल बताए जा रहे हैं। वन विभाग की ओर से पहले ही इन कब्जों को हटाने की तैयारी कर ली गई थी, लेकिन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई को अचानक और सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
सुबह-सुबह बड़ी संख्या में पुलिस बल, वन अमले और राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र को कड़ा सुरक्षा घेरा प्रदान कर दिया। मौके पर जेसीबी मशीनें भी पहुंचाई गईं, जिनकी मदद से अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सरकारी भूमि को मुक्त कराने और वन क्षेत्र की रक्षा के लिए की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों ने वन भूमि पर कब्जा किया था, उन्हें पहले भी नोटिस और चेतावनी दी गई थी, लेकिन कब्जे नहीं हटाए गए।
कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानों पर हल्का विरोध भी देखने को मिला, हालांकि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई। कई परिवारों ने अपने आशियाने टूटने पर नाराजगी जताई, वहीं प्रशासन ने यह साफ किया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना था कि कानून के दायरे में रहकर ही किसी को भी भूमि का उपयोग करने का अधिकार है, और वन भूमि पर अतिक्रमण पर्यावरण एवं प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से गंभीर विषय है।
Anti-Encroachment Drive at Mahamaya Hill in the Dabripani Area
महामाया पहाड़ डबरीपानी क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण के कारण वन क्षेत्र का स्वरूप प्रभावित हो रहा था। वनस्पति, प्राकृतिक जलस्रोत और जैव विविधता पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई होती, तो आने वाले दिनों में यह अतिक्रमण और बड़े स्वरूप में फैल सकता था।

सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई की पूरी योजना पहले से तैयार थी और संबंधित विभागों के बीच समन्वय के बाद ही इसे अंजाम दिया गया। सुबह के समय इसलिए कार्रवाई की गई ताकि भीड़ और विरोध की संभावना कम रहे। प्रशासन चाहता था कि अभियान बिना किसी बड़े व्यवधान के पूरा हो जाए। इसी कारण मौके पर पर्याप्त पुलिस बल, महिला बल, राजस्व निरीक्षक और वन विभाग के कर्मचारी तैनात किए गए थे।
इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। एक ओर प्रशासन इसे सरकारी जमीन को मुक्त कराने की आवश्यक प्रक्रिया बता रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोगों में नाराजगी का माहौल है। कुछ लोगों का कहना है कि वर्षों से बसे परिवारों को एक झटके में उजाड़ दिया गया, जबकि प्रशासन का पक्ष है कि अवैध कब्जे कानूनन मान्य नहीं हो सकते। ऐसे में अब यह मामला मानवीय संवेदना और प्रशासनिक सख्ती के बीच बहस का विषय बन गया है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि आगे ऐसे अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है, जहां सरकारी भूमि पर अनधिकृत कब्जे हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वन भूमि और शासकीय जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अभियान जारी रहेगा। अधिकारियों ने कहा कि यह एक अकेली कार्रवाई नहीं है, बल्कि अतिक्रमण हटाने की व्यापक नीति का हिस्सा है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के कई वन क्षेत्रों में अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। आबादी बढ़ने, भूमि की कमी और अवैध बसाहटों के कारण वन क्षेत्रों पर दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में प्रशासन के सामने एक ओर कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर गरीब और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। यही वजह है कि ऐसी कार्रवाइयों के बाद सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो जाती हैं।

महामाया पहाड़ डबरीपानी में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर वन भूमि संरक्षण और अतिक्रमण के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। प्रशासन का दावा है कि यह अभियान पूरी तरह नियमों के तहत चलाया गया और इसका उद्देश्य केवल सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना है। वहीं प्रभावित पक्ष इसे अचानक और कठोर कार्रवाई बता रहा है। फिलहाल पूरे इलाके में पुलिस की निगरानी बनी हुई है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
इस बीच, स्थानीय लोगों की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या रुख अपनाता है। क्या यह अभियान यहीं रुक जाएगा या फिर आसपास के अन्य अतिक्रमित क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि महामाया पहाड़ डबरीपानी क्षेत्र की यह कार्रवाई लंबे समय तक चर्चा में रहने वाली है।
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