MLA Takes Strict Stance on Substandard Road Construction: सरगुजा:अंबिकापुर: मैनपाट (सीतापुर), 8 मई 2026: छत्तीसगढ़ के सीतापुर विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीणों की लंबे समय की मांग आज पूरी हुई। मैनपाट ब्लॉक के कदनई से लोटाभवना तक बनी करोड़ों रुपये कीमत की ढाई किलोमीटर लंबी डामरीकरण सड़क को लेकर विधायक रामकुमार टोप्पो ने कड़ा रुख अपनाया। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत ठेकेदार द्वारा निर्मित इस सड़क की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं। विधायक के तत्काल निर्देश पर विभाग ने फौरी कार्रवाई करते हुए जेसीबी मशीनें उतारकर सड़क तोड़ना शुरू कर दिया। यह घटना राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के प्रति प्रशासन की सख्ती का उदाहरण बन गई है।
कदनई गांव के ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क हाल ही में पूरी हुई थी, लेकिन निर्माण के महज कुछ हफ्तों बाद ही इसकी हालत खराब होने लगी। “सड़क पर गड्ढे बन गए हैं। बारिश होते ही यह कीचड़ हो जाएगी। हम पैदल चलने लायक रास्ता भी नहीं बचा,” स्थानीय निवासी रामेश्वर साहू ने बताया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ठेकेदार ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया। ग्रामीण महिलाओं ने भी आवाज उठाई। “बच्चों को स्कूल ले जाना मुश्किल हो गया है। ठेकेदार ने ऊपर से पतली डामर चढ़ाई, अंदर की परत ही कमजोर है,” लोटाभवना की सरिता बाई ने शिकायत की।
ये शिकायतें सीधे सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के पास पहुंचीं। भाजपा विधायक टोप्पो ने इसे गंभीरता से लिया और बिना देर किए मौके पर पहुंच गए। उन्होंने सड़क का निरीक्षण किया, ग्रामीणों से बातचीत की और विभागीय अधिकारियों को बुलाया। “ऐसी लापरवाही विकास की राह में बाधा है। जनता का पैसा बर्बाद नहीं होने दूंगा,” विधायक ने मौके पर कहा।
विधायक के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने एक्शन मोड में आ गया। गुरुवार को ही जेसीबी और अन्य मशीनें现场 पहुंचीं और खराब सड़क को उखाड़ना शुरू हो गया। विभागीय अधिकारी ने बताया, “निरीक्षण में सड़क की बेस लेयर कमजोर पाई गई। विधायक के आदेश पर हम इसे पूरी तरह तोड़कर दोबारा गुणवत्ता पूर्ण निर्माण कराएंगे। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जा रही है।” विभाग ने आश्वासन दिया कि नई सड़क मानकों के अनुरूप बनेगी और समय सीमा में पूरी होगी।
यह सड़क मैनपाट ब्लॉक के दूरस्थ इलाकों को जोड़ती है, जहां आदिवासी बहुल आबादी रहती है। पीएम जनमन योजना के तहत इसे विशेष रूप से गरीब और दूरदराज गांवों के लिए बनाया गया था। लेकिन घटिया निर्माण ने योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे न केवल यात्रा कठिन हो गई, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुंच भी प्रभावित हुई।
MLA Takes Strict Stance on Substandard Road Construction
मौके पर विधायक रामकुमार टोप्पो ने मीडिया से बातचीत में कहा, “निर्माण कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर इस तरह के मामले लोगों के सामने आते हैं, तो तत्काल शिकायत करें। हम त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। यह विष्णु देव साय का सुशासन है। गलत चीजों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी कार्य हो, उसे गुणवत्ता पूर्ण और मानक अनुरूप बनाना होगा। नहीं तो तोड़कर दुबारा बनवाएंगे।”
टोप्पो ने ग्रामीणों से अपील की कि वे ऐसी शिकायतें सीधे उनके कार्यालय या हेल्पलाइन पर दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार विकास को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन इसमें पारदर्शिता और गुणवत्ता अनिवार्य है। “छत्तीसगढ़ में अब कोई ठेकेदार कानून से ऊपर नहीं। जनता की आवाज सरकार तक पहुंचेगी और न्याय मिलेगा,” उन्होंने जोर देकर कहा।
यह घटना छत्तीसगढ़ में चल रही विकास योजनाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। पिछले एक साल में राज्य सरकार ने सड़क निर्माण पर विशेष जोर दिया है, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में। मैनपाट जैसे ब्लॉक में पीएम जनमन जैसी केंद्रीय योजनाओं से सैकड़ों किलोमीटर सड़कें बनी हैं। लेकिन कुछ मामलों में गुणवत्ता की शिकायतें सामने आई हैं। विपक्ष ने पहले भी ऐसी घटनाओं को उठाया है, लेकिन विधायक टोप्पो का त्वरित एक्शन सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है।
स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे सुशासन का प्रतीक बताया। पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता ने कहा कि यह सकारात्मक कदम है, लेकिन पूरे राज्य में ऐसा होना चाहिए। ग्रामीण संगठनों ने विधायक की तारीफ की और मांग की कि ठेकेदार को काला सूचीबद्ध किया जाए।
इस घटना से ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा है। कदनई के सरपंच ने कहा, “अब सड़क मजबूत बनेगी। विधायक ने सुना, यह बड़ी बात है।” विभाग ने अनुमान लगाया कि दोबारा निर्माण में 15-20 दिन लगेंगे और बजट का अतिरिक्त प्रावधान किया जाएगा।
यह मामला अन्य जिलों के लिए उदाहरण है। छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में निर्माण गुणवत्ता पर सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसमें थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से ठेकेदार सतर्क होंगे।
कुल मिलाकर, सीतापुर विधायक का यह कदम न केवल स्थानीय मुद्दे को हल करता है, बल्कि पूरे राज्य में जवाबदेही की मिसाल पेश करता है। ग्रामीण अब बेहतर सड़क की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो उनकी जिंदगी बदलेगी।
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