Padma Vibhushan Teejan Bai passes away; breathes her last at AIIMS Raipur: दुर्ग -भिलाई:छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) अस्पताल में निधन हो गया। 70 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस लेने के बाद पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है ।
तीजन बाई को 27 मई को फेफड़ों में पानी भरने, निमोनिया और लो ब्लड प्रेशर की शिकायत होने के बाद रायपुर AIIMS के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम द्वारा लगातार निगरानी और विशेष उपचार के बाद भी उनकी स्थिति स्थिर नहीं रही। रविवार सुबह सवा 3 बजे अस्पताल में अंतिम सांस लेने के बाद उनकी मृत्यु की पुष्टि हुई ।
लंबे समय से तीजन बाई गंभीर रूप से बीमार थीं। 2024 में उन्हें लकवा हुआ था, जबकि बड़े बेटे की मौत के सदमे के बाद उन्होंने अपनी बीपी की दवा लेना बंद कर दिया था, जिसके कारण अचानक पैरालिसिस (लकवा) मार गया था । फेफड़ों और खून का संक्रमण उनकी स्वास्थ्य स्थिति को और गंभीर बना रहा था, जिसके चलते डॉक्टरों की विशेष टीम की लगातार नगरनी में उन्हें अस्पताल में रखा गया था ।
पंडवानी की सुप्रसिद्ध गायिका
तीजन बाई पंडवानी गायन की अमर आवाज थीं, जिन्होंने अपनी दमदार और शक्तिशाली आवाज से भारत की लोक कथाओं को नई पहचान दिलाई। उस समय महिलाएं सिर्फ बैठकर ‘वेदमती शैली’ में गाती थीं, लेकिन तीजन बाई पहली महिला थीं, जिन्होंने पुरुषों की ‘कापालिक शैली’ चुनी और खड़े होकर दमदार आवाज में गाना शुरू किया। इससे पंडवानी गायन में एक नया उदय हुआ और उनकी आवाज को विश्व स्तर पर पहचान मिली ।
30 वर्ष की उम्र में ही तीजन बाई ने अपनी आवाज का वर्चस्व जमाया और पंडवानी गायन को लोकप्रिय बनाकर विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का काम किया। उनकी गायन शैली, आवाज का दम और कथाओं की प्रस्तुति ने उन्हें एक अलग ही पहचान दिलाई, जिससे वे भारत की लोक संस्कृति की सबसे बड़ी नाम बन गईं ।
सम्मान और पहचान
तीजन बाई को देश के सर्वोच्च सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था, जबकि वे पद्मश्री और अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से भी नवाज चुकी थीं। पंडवानी गायन को विश्व बाजार में पहचान दिलाने और भारत की लोक कथाओं को नई जीवंतता देने के लिए उन्हें अनेक सम्मान और खिताब मिले थे। उनकी गायन शैली और आवाज ने उन्हें एक अलग ही पहचान दिलाई, जिससे वे भारत की लोक संस्कृति की सबसे बड़ी नाम बन गईं ।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने शोक जताया
तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट कर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने तीजन बाई की लोक कला और गायन शैली को याद करते हुए उनके निधन पर शोक जताया और लोक संस्कृति की इस बड़ी हानि को दुखद बताया। उनकी मृत्यु से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के कला और संस्कृति क्षेत्र में शोक छा गया है ।
Padma Vibhushan Teejan Bai passes away; breathes her last at AIIMS Raipur
स्थानीय लोग ने तीजन बाई के निधन की गहरी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पंडवानी की अमर आवाज अब खामोश हो गई है। उनकी गायन शैली और आवाज ने उन्हें एक अलग ही पहचान दिलाई, जिससे वे भारत की लोक संस्कृति की सबसे बड़ी नाम बन गईं। उनकी मृत्यु से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के कला और संस्कृति क्षेत्र में शोक छा गया है ।
यह भी पढ़ें- कलेक्टर अजीत वसंत ने बतौली के पहाड़ी कोरवा क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया, आंगनबाड़ी लापरवाही पर कार्रवाई, सड़क के लिए कार्ययोजना बनाई








