15 हजार वेतन की मांग: कोटवार संघ ने जशपुर में धरना-प्रदर्शन कर दिया अल्टीमेटम, 7 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन को चेतावनी : Kotwar Union stages protest in Jashpur and issues ultimatum

Uday Diwakar
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Kotwar Union stages protest in Jashpur and issues ultimatum: जशपुर:​(छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ (पंजीयन क्रमांक-40) के बैनर तले शुक्रवार को कोटवार संघ ने 7 सूत्रीय मांगों को लेकर जशपुर तहसील मुख्यालय में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। तहसील के बाहर सैकड़ों कोटवार संघ के बैनर, पट्टक और नारों के साथ धरने पर बैठे, जिनमें “कोटवार – गांव का राजस्व स्तंभ”, “15 हजार पारिश्रमिक अनिवार्य”, “संविलियन करो, भ्रष्टाचार खत्म करो” जैसे नारे लिखे थे। कोटवारों ने तहसील के द्वार पर ज्ञापन सौंपने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की और प्रशासन को अपने लंबित एजेंडे पर सकारात्मक कदम उठाने के लिए दबाव बनाया। प्रदर्शन स्थल पर कोटवारों का माहौल दृढ़ था, क्योंकि वे पारंपरिक गांव-राजस्व प्रणाली के सबसे छोटे कर्मचारी हैं, लेकिन 24 घंटे शासन की सेवा में रहते हैं और उन्हें मानदेय के स्तर पर ही काम करना पड़ रहा है। वेतन वृद्धि की मांग उनका सबसे बड़ा एजेंडा रहा है।


संघ ने तहसील को ज्ञापन सौंपते हुए मुख्य रूप से 7 मांगों को उजागर किया:

(1) सभी कोटवारों को राजस्व विभाग में संविलियन कर संवद कर्मचारी घोषित करना और नियमितीकरण,

(2) मासिक पारिश्रमिक बढ़ाकर न्यूनतम 15 हजार रुपये निश्चित करना,

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(3) नियुक्ति प्रक्रिया में हो रहे भ्रष्टाचार को रोककर निष्पक्ष चयन,

(4) कोटवार पुत्र-पुत्रियों को नियुक्ति में प्राथमिकता देना,

(5) वर्दी राशि और अन्य भत्तों की नकद राशि का सीधा बैंक हस्तांतरण,

(6) सेवाकाल में मृत्यु होने पर परिवार के सदस्य को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और अनुकंपा नियुक्ति, और

(7) एक नगर पालिका या निगम में एक ही कोटवार पद के आदेश को रद्द कर कई कोटवार पद स्थापित करना।

इन मांगों के पीछे का मकसद है कि कोटवारों को स्थायी, सुरक्षित और सम्मानित सेवा स्थिति मिले, जिससे वे पारंपरिक रूप से गांव में कानून-व्यवस्था और राजस्व प्रणाली के बीच सिंचक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।


धरना-प्रदर्शन के दौरान तहसील के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बैठक की, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट समयसीमा या निर्णय नहीं दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि मांगों को उच्च स्तर पर भेजा जाएगा और जल्द निर्णय का संकेत दिया जाएगा, लेकिन कोटवार संघ ने इसे “खाली वादे” तक सीमित देख रहा है। संघ ने चेतावनी दी कि यदि शासन सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है, तो आंदोलन को और कड़ा बनाया जाएगा और भूख-हड़ताल तक का रास्ता अपनाया जाएगा। संघ ने स्पष्ट किया कि इस आंदोलन में कोटवार अपने परिवारों के साथ भी शामिल होंगे, जिससे आंदोलन का दायरा और गहराई बढ़ जाएगी। एक प्रमुख कोटवार नेता ने कहा कि वे गांव के सबसे छोटे कर्मचारी हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी सबसे बड़ी है। वे 24 घंटे शासन की सेवा में हैं, लेकिन वेतन इतना कम है कि परिवार का पालन-पोषण भी मुश्किल है। उन्हें 15 हजार मासिक पारिश्रमिक, नियमितीकरण और संविलियन चाहिए। अगर शासन नहीं सुनेगा, तो वे आंदोलन को और कड़ा बनाएंगे।

Kotwar Union stages protest in Jashpur and issues ultimatum


कोटवार संघ ने घोषणा की है कि यदि शासन जल्द फैसला नहीं लेता है, तो आंदोलन को 7 सूत्रीय मांगों के समर्थन में और कड़ा बनाया जाएगा। इसके अलावा, राजधारी और राज्य स्तर के मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन, भूख-हड़ताल और तिरंगा भेंट करने जैसी रणनीतियां भी चर्चा में हैं। स्थानीय राजनीतिक दल और समाजिक संगठन कोटवार संघ का समर्थन कर रहे हैं और मांगों को लागू करने की अपील कर रहे हैं। कोटवारों का दावा है कि यदि सुनवाई नहीं हुई, तो वे आगामी चुनावों में सक्रिय रूप से अपनी वोट बैंक की रणनीति बना सकते हैं।

वहीं, शासन के लिए यह एक साथ राजस्व प्रणाली के सबसे पारंपरिक स्तंभ को मजबूत करने और सामाजिक-संविधानिक समीकरणों को संतुलित करने का भी परीक्षण है। आंदोलन का सकारात्मक हल शामिल होने से न सिर्फ कोटवार समाज को प्रतिष्ठित स्थिति मिलेगी, लेकिन राजस्व प्रणाली के सबसे नीचे स्तंभ को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी। अब प्रश्न है कि शासन इस 7 सूत्रीय मांगों को लेकर क्या रणनीति बनाएगा और कितने दिन में निर्णय देगा।

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