Displaced residents of Nakti village lay siege to the CMs residence : रायपुर : 04 जुलाई 2026:रायपुर में बड़ी सरगर्मी देखी गई जब नकटी गांव के विस्थापित ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री आवास (CM हाउस) का घेराव किया। प्रभावित ग्रामीण मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव करने के बाद सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए। उनके साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद थे। CM हाउस के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। प्रक्रिया में स्थानीय और क्षेत्रीय अधिकारियों को भी तत्पर रहने की निर्देशित किया गया।
घेराव का कारण: घर तोड़ दिया, खाना भी नहीं खाने दे रहे
घेराव के पीछे का मुख्य कारण नकटी गांव में विस्थापित स्थिति का बढ़ना है। विस्थापित ग्रामीणों ने कहा कि उनके घर तोड़ दिए गए हैं, लेकिन आवंटन या पुनर्वास का कोई ठोस रास्ता नहीं निकाला गया। “घर तोड़ दिया, खाना भी नहीं खाने दे रहे” – ऐसे भावनात्मक शब्दों के साथ ग्रामीणों ने अपनी कठिन परिस्थिति को प्रस्तुत किया। वे कहते हैं कि विस्थापन के बाद उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति गिरावट पर है। वे न तो रहने की प्राथमिकता पा रहे हैं, न ही न्यूनतम भोजन की उपलब्धता। इसी कारण वे सीधे मुख्यमंत्री आवास पर अपना मामला लेकर पहुंचे।
CM हाउस के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की निर्देशित की गई है। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने कहा कि प्रशासन के लिए सुरक्षा प्राथमिकता है। प्रदर्शनकारियों के साथ भी विनम्र बातचीत की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जनता के विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाना है। प्रदर्शनकारियों को भी धशा करने की जरूरत है। वे अधिकारियों से सीधी बातचीत की अपील कर रहे हैं।
मंत्री ओपी चौधरी के बंगला घेरा और बाद में CM हाउस
प्रभावित ग्रामीण पहले मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव करने के बाद मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए। उनके साथ कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद थे। इससे घेराव का दायरा और गहराई बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने मंत्री के बंगले पर भी नारेबाजी किया। वे कहते हैं कि मंत्री के बंगले में वे अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को चेतावनी दे रहे हैं। फिर उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री आवास पर अपना मामला लेकर पहुंचे। इससे प्रशासन के लिए तत्परता और निर्णय की आवश्यकता बढ़ गई।
विस्थापित ग्रामीणों की मुख्य मांग पुनर्वास और आवंटन है। वे चाहते हैं कि उनके घर तोड़ दिए गए हैं, लेकिन उन्हें आवास और पुनर्वास का रास्ता मिले। वे कहते हैं कि विस्थापन के बाद उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति गिरावट पर है। वे न तो रहने की प्राथमिकता पा रहे हैं, न ही न्यूनतम भोजन की उपलब्धता। इसी कारण वे सीधे मुख्यमंत्री आवास पर अपना मामला लेकर पहुंचे। वे चाहते हैं कि प्रशासन उनके पुनर्वास और आवंटन के लिए ठोस रास्ता निकाले। वे चाहते हैं कि प्रशासन उनके पुनर्वास और भोजन की उपलब्धता के लिए ठोस रास्ता निकाले।
Displaced residents of Nakti village lay siege to the CMs residence
प्रशासन के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। वे ग्रामीणों के साथ शांतिकों बातचीत कर रहे हैं। वे कहते हैं कि प्रशासन के लिए सुरक्षा प्राथमिकता है। प्रदर्शनकारियों के साथ भी विनम्र बातचीत की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जनता के विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाना है। प्रशासन के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। वे ग्रामीणों के साथ शांतिकों बातचीत कर रहे हैं। वे कहते हैं कि प्रशासन के लिए सुरक्षा प्राथमिकता है। प्रशासन के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। वे ग्रामीणों के साथ शांतिकों बातचीत कर रहे हैं।
इस घेराव का राजनीतिक रिफ्लेक्शन भी देखने को मिल रहा है। स्थानीय राजनीतिक दल और समाजिक संगठन विस्थापितों का समर्थन कर रहे हैं और उनके पुनर्वास और आवंटन की अपील कर रहे हैं। विस्थापितों का दावा है कि यदि सुनवाई नहीं हुई, तो वे आगामी चुनावों में सक्रिय रूप से अपनी वोट बैंक की रणनीति बना सकते हैं। वहीं, शासन के लिए यह एक साथ विस्थापितों को मजबूत करने और सामाजिक-संविधानिक समीकरणों को संतुलित करने का भी परीक्षण है।
अब प्रश्न है कि शासन इस मामले को लेकर क्या रणनीति बनाएगा और कितने दिन में निर्णय देगा। विस्थापितों के पुनर्वास और आवंटन का सकारात्मक हल शामिल होने से न सिर्फ विस्थापित समाज को प्रतिष्ठित स्थिति मिलेगी, लेकिन उनका सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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