Surajpur: Over 300 families affected alleged tampering with land records in Nawaparakala: सूरजपुर : सूरजपुर जिले के नवापाराकला ग्राम पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्टेरेट पहुंचकर जिला प्रशासन के समक्ष जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर के आरोप लगाते हुए तत्काल जांच, रिकॉर्ड सुधार और जमीन की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में गांव के भूमि रजिस्टर (खतौनी/खसरा) में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किए गए हैं, जिससे लगभग 300 से अधिक परिवारों की जमीन का अधिकार खतरे में पड़ गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि तालमेल से कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने जमीन के रिकॉर्ड में संपत्तियों के स्वामी के नामों को बदलवा कर निजी लाभ उठाने की कोशिश की है। ग्रामीण प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख रामेश्वर साहू ने बताया, “हमारे खेत और बगीचे पहले अपने नाम पर दर्ज थे। अचानक रिकॉर्ड में बदलाव दिख रहे हैं — कई खसरा नंबर किसी और के नाम पर आ गए हैं। इससे हमारे घर-परिवार और आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।”
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने कलेक्टेरेट में एक लिखित ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि जिला प्रशासन द्वारा तुरंत एक स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कमेटी का गठन किया जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जांच पूरी होने तक प्रभावित जमीनों की बिक्री, हस्तांतरण और रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई जाए ताकि संभावित धरोहरों की गैरकानूनी लेनदेन रोकी जा सके।
कलेक्टेरेट में मौके पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने कहा कि वे पुलिस थाने और तहसील कार्यालय में भी कई बार आवेदन दे चुके हैं, परंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी नाराज़गी के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण कलक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों पर ज़ोर दिया। स्थानीय महिला सक्रियवादियों ने भी मामले में आवाज उठाई और कहा कि महिलाओं के नाम पर की गई छोटी-छोटी जमीनों को भी बदलने की कोशिश हुई है, जिससे घर-गृहस्थी प्रभावित हो सकती है।

कलेक्टेरेट में मौजूद तहसीलदार विपिन अग्रवाल ने कहा कि उन्हें ज्ञापन प्राप्त हो गया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी गई है। तहसीलदार ने आश्वासन दिया कि प्रारम्भिक पड़ताल कराई जाएगी और अगर आवश्यक हुआ तो भूमि रिकॉर्ड का ऑडिट किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं करेंगे। जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाए जाएंगे।”
जिलाधिकारी के दफ्तर से मिली आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया कि जांच के लिए एक समन्वित टीम बनाई जाएगी जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारी, तहसील कर्मचारियों और स्वतंत्र लोकसंख्या प्रतिनिधि को शामिल किया जाएगा। साथ ही कहा गया कि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी रोक अवधि निर्धारित की जा सकती है जब तक जांच पूरी नहीं होती।
Surajpur: Over 300 families affected alleged tampering with land records in Nawaparakala
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार भूमि रिकॉर्डों में हेरफेर करने पर भारतीय दंड संहिता (IPC) व घरेलु भूमि कानूनों के तहत धोखाधड़ी, झूठे दस्तावेज़ प्रस्तुत करने और सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसे अपराध बनते हैं। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर जेल और भारी जुर्माना दोनों का प्रावधान है। वरिष्ठ वकील अजय मिश्रा कह रहे हैं कि प्रभावित ग्रामीणों को फटाफट विधिक सहायता लेनी चाहिए और अदालत में रिट याचिका दाखिल कर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध करना चाहिए।
स्थानीय सामाजिक संगठन और पंचायत सदस्य भी मामले पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि वह राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग करेंगे और इस संबंध में मीडिया व मानवाधिकार संगठनों को भी सूचित किया जाएगा। एक पंचायत सदस्य ने बताया कि कई परिवार डर के कारण जमीनों पर काम करना छोड़ चुके हैं और यह स्थिति घाटे और सामाजिक तनाव को जन्म दे रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे और भी बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं और कानूनी रास्ता अपना कर न्याय की माँग करेंगे। प्रशासन ने फिलहाल सहमति जताई है कि मामले की तुरंत जाँच कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
नवापाराकला की यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे सूरजपुर जिले में भू-अधिकारों, रिकॉर्ड की पारदर्शिता और राजस्व तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है। अब यह देखने की बात होगी कि प्रशासन त्वरित, पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से और कितनी जल्दी इस विवाद को सुलझाता है ताकि प्रभावित परिवारों को उनके अधिकार वापस मिल सकें और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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