Female Patient Dies After Falling from Ceiling at Balrampur District Hospital: बलरामपुर:छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला अस्पताल में इलाज के दौरान एक दर्दनाक घटना ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। अस्पताल की दूसरी मंजिल की छत से गिरकर एक मरीज महिला की मौत हो गई, जिसके बाद मेडिकल‑प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जांच और तकनीकी निगरानी की मांग तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार बलरामपुर जिला अस्पताल में बुखार और उल्टी की शिकायत पर 58 वर्षीय महिला मरीज को भर्ती कराया गया था। महिला बलरामपुर‑रामानुजगंज के ग्राम सेदूर निवासी बताई जा रही है। तीन दिन से उसका महिला मेडिकल वार्ड में इलाज चल रहा था।
देर रात करीब 12 बजे महिला अचानक वार्ड से उठकर दूसरी मंजिल की छत पर पहुंच गई। वहां लगभग 10–15 मिनट तक टहलती रही और फिर बिल्डिंग से छलांग लगा दी। इससे वह सिर के बल नीचे फर्श पर गिर गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना देखकर अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया।
अंबिकापुर रेफर, लेकिन रास्ते में मौत
घायल महिला को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद और बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए रेफर किया गया। लेकिन रास्ते में ही उसकी नाजुक हालत बिगड़ गई और वह दम तोड़ दिया। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया को लेकर ठीकरे उड़ा दिए हैं।
घटना के बाद महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और निगरानी के अभाव का आरोप लगाया है। वे यह सवाल उठा रहे हैं कि वार्ड में भर्ती मरीज कैसे बिना रोक‑टोक के छत पर पहुंच गई और क्या रात के समय वार्ड‑प्रहरी व्यवस्था सही ढंग से चल रही थी।
इस घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। कई स्थानीय नेताओं और चिकित्सक यूनियनों ने स्पष्टीकरण की मांग करते हुए बलरामपुर जिला अस्पताल की सुरक्षा‑व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की तकनीकी समीक्षा की आवश्यकता बताई है।
Female Patient Dies After Falling from Ceiling at Balrampur District Hospital
स्थानीय रिपोर्टों और वीडियो फुटेज के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि अस्पताल की छत तक जाने वाले दरवाजे और गलियारे आसानी से खुले रहते हैं, जिससे निगरानी की दृष्टि से खतरा बढ़ता है। छत पर जाने वाले रास्ते पर CCTV कवरेज और रात की बारीक पेट्रोलिंग की भी कमी बताई जा रही है।
इससे पहले भी बलरामपुर जिला अस्पताल में निर्माण के बाद भी छत‑सीलिंग और लिफ्ट सुरक्षा जैसे मुद्दे उठ चुके हैं, जिससे अस्पताल की संरचनात्मक और प्रशासनिक तैयारियों पर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं।
अगला कदम
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार इस घटना की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं, जिसमें मरीज की आत्महत्या/दुर्घटना की परिस्थिति, नर्सिंग‑स्टाफ की तैनाती, सीसीटीवी कवरेज और इमरजेंसी प्रोटोकॉल की समीक्षा की बात शामिल है। परिजनों से भी बातचीत कर घटनाक्रम के बारे में औपचारिक शिकायत ली जाएगी।
स्थानीय चिकित्सा संगठन और राजनीतिक दल इस घटना को “सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की गंभीर चूक” बता रहे हैं। उनकी मांग है कि न केवल बलरामपुर जिला अस्पताल बल्कि प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी मरीज छत तक पहुंचने वाले रास्तों को सील करने, रात‑दिन निगरानी बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य मरीजों के लिए अलग आवंटित वार्ड व निगरानी‑प्रोटोकॉल लागू किए जाएं।
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने यह भी उजागर किया है कि अस्पतालों में सिर्फ दवा और इलाज ही नहीं, बल्कि मरीज की सुरक्षा, निगरानी और त्वरित आपात जवाब की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जिस पर छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग को अब खास ध्यान देना जरूरी है।
यह भी पढ़ें:- बतौली में आधी रात का खौफनाक कांड: एक शिक्षक का युवती के साथ जंगल में अश्लील हरकत, ग्रामीणों ने कार में पकड़कर किया VIDEO वायरल!








