सीतापुर थाना क्षेत्र में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म; 6 आरोपी गिरफ्तार, वकीलों ने आरोपियों का केस लड़ने से किया इंकार : Gang rape of a minor in the Sitapur lawyers refuse to represent the accused

Uday Diwakar
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  • सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में दो नाबालिग लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों, जिनमें 3 नाबालिग भी शामिल हैं, को गिरफ्तार किया है, जबकि स्थानीय वकीलों ने आरोपियों का केस लड़ने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे मामले पर सार्वजनिक गुस्सा और न्यायिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं।

Gang rape of a minor in the Sitapur lawyers refuse to represent the accused: सरगुजा:​​​अंबिकापुर:  छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में नाबालिग बच्चियों के साथ हुआ “सामूहिक दुष्कर्म” का मामला पूरे प्रदेश में सनसनी और गुस्सा दोनों फैला रहा है। इस घटना में पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 3 नाबालिग लड़के भी शामिल हैं। इसके साथ‑साथ स्थानीय वकीलों ने भी इस मामले में आरोपियों का केस लड़ने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे मामले पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया और तीखी हो गई है।

घटना क्या हुई?

सूत्रों के अनुसार, 24 अप्रैल को सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र के जजगा गांव के आसपास एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद चार नाबालिग बच्चियां घर लौट रही थीं। रास्ते में आरोपियों के गुट ने इन्हें घेर लिया। उनमें से दो बच्चियां किसी तरह भागकर बच निकलीं, लेकिन अन्य दो नाबालिग लड़कियों को बीच जंगल और खाली खेतों की तरफ ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनाया गया। पीड़िताओं के साथ मारपीट भी की गई, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक दुख कई गुना बढ़ गया।

पीड़ित लड़कियां आदिवासी जनजाति मांझी (विशेष पिछड़ी जनजाति) समुदाय से संबंधित हैं, जिससे मामला सिर्फ दुष्कर्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक‑आर्थिक और जातीय भेदभाव के मुद्दे के रूप में भी उभरकर सामने आया।

घटना की सूचना मिलते ही सीतापुर थाना पुलिस ने मामले की तुरंत जांच शुरू कर दी। मेडिकल परीक्षण के दो दौरे के बाद अंतिम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर पुलिस ने बड़ी गिरफ्तारी अभियान चलाया। मामले में कुल 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 3 नाबालिग लड़के भी शामिल हैं। आरोपियों की पहचान आनंद बेक, विकास उर्फ राहुल और मनीष खलखो उर्फ आभीस उर्फ मनीष खलखो समेत कई अन्य नाबालिग और एक‑दो बालिग युवक के तौर पर हुई है, जिनके नाम और पते सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

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जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण और नाबालिग बच्चियों के साथ अपराध से जुड़े प्रावधान के तहत धाराएं जोड़ दी हैं। सूत्र बताते हैं कि प्राथमिकी में अब बाल अधिकार, POSCO एक्ट और IPC/नई भारतीय न्याय संहिता की कड़ी धाराएं लगाई गई हैं, ताकि न्यायालय आरोपियों पर अधिकतम संभव कड़ा प्रभाव दिखा सके।

वकीलों का ऐतिहासिक इंकार

इस मामले में एक और बड़ा विकास यह रहा कि सीतापुर‑सरगुजा क्षेत्र के कई वकीलों ने आरोपियों का केस लड़ने से इनकार कर दिया है। इससे पहले भी कुछ राज्यों में नाबालिग बलात्कार या अत्यधिक घृणित अपराध के मामलों में वकीलों ने “सामाजिक विरोध” के तौर पर आरोपियों का पक्ष न उठाने का निर्णय लिया था, जैसे उज्जैन नाबालिग रेप केस या अन्य जघन्य अपराधों में।

स्थानीय वकीलों का तर्क है कि नाबालिग आदिवासी लड़कियों के साथ इस तरह की दरिंदगी पीड़ित परिवारों, समाज और विधि की बुनियादी भावनाओं के खिलाफ है। अगर वे इस तरह के आरोपियों के लिए पेशा मानकते रहेंगे, तो इससे न्याय व्यवस्था की छवि और सामाजिक जवाबदेही दोनों पर सवाल बनते रहेंगे। इसीलिए स्थानीय बार एसोसिएशन के कुछ प्रमुख वकीलों ने घोषणा कर दी कि वे इस मामले के आरोपियों के लिए कोई भी हलफनामा या दलील तैयार नहीं करेंगे।

ऐसी स्थिति में कानून के तहत न्यायालय की जिम्मेदारी होती है कि वह आरोपी पक्ष के लिए उचित वकील नियुक्त करे, ताकि न्याय की दोनों तरफ की सुनवाई में कोई दोष न रहे। ऐसा होने पर आरोपियों का निःशुल्क वकील या सरकारी नियुक्त अधिवक्ता उनका पक्ष रखेगा, लेकिन स्थानीय वकीलों की यह सामूहिक रुख‑परिवर्तन जनता में संदेश देता है कि समाज ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

घटना के बाद पीड़ित लड़कियों के परिवार में सदमा और जोश का मिश्रण दिख रहा है। एक तरफ वे पीड़िताओं के मानसिक स्वास्थ्य की चिंता कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ वे न्याय की उम्मीद लिए हुए प्रशासन और अदालत पर दबाव बना रहे हैं कि आरोपियों को उचित दंड मिले और कोई दोषी छूट न जाए। स्थानीय आदिवासी समुदाय ने भी सार्वजनिक बैठकें आयोजित कर प्रदर्शन किए और प्रशासन को अपनी निगरानी में गांवों की सुरक्षा और जागरूकता बढ़ाने की मांग की।

इसके अलावा, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने घटना को “सरगुजा में नाबालिगों की सुरक्षा प्रणाली की चकमा” बताया। उनका दावा है कि अकेले गिरफ्तारियों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जागरूकता अभियान, स्कूल‑आश्रमों में सेफ्टी ट्रेनिंग, सीसीटीवी और पुलिस पट्रोलिंग जैसी व्यवस्थाओं को जरूरी रूप से बढ़ाना होगा।

आगे क्या?

अब तक की जानकारी के अनुसार, पुलिस जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ अधिक तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। न्यायिक प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही अदालत इस मामले पर सख्ती से सुनवाई करेगी, खासकर जब से वकीलों की इस तरह की सामूहिक रुख बयान हुई है, जो समाज की भावनाओं को अदालत के सामने स्पष्ट कर रही है।

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