Demand for TET Exemption Intensifies : रायपुर :30 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर उपजा विवाद और भी गहरा गया है। हाल ही में टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर हजारों कार्यरत शिक्षकों को इस अनिवार्यता के दायरे से मुक्त रखने की मांग की है। यह मुद्दा न केवल शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि राज्य के शिक्षा तंत्र में कार्यरत लगभग 80,000 शिक्षकों के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह भी खड़ा कर रहा है ।
यह पूरा विवाद मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्णयों और राज्य सरकार के भर्ती नियमों के क्रियान्वयन के बाद खड़ा हुआ है । फेडरेशन और शिक्षक संगठनों का तर्क है कि जो शिक्षक आरटीई (RTE) अधिनियम लागू होने से पहले या भर्ती नियमों के आने से पूर्व अपनी सेवाएं दे रहे थे, उन्हें इस परीक्षा के लिए बाध्य करना न केवल अनुचित है, बल्कि उनके वर्षों के अनुभव को अनदेखा करने के समान है । प्रदेश भर के शिक्षक इस मामले को लेकर आंदोलित हैं और अपनी चिंताएं विभिन्न मंचों के माध्यम से सरकार तक पहुंचा रहे हैं ।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- सेवा से छूट: आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से पूर्णतः मुक्त रखा जाए ।
- विभागीय परीक्षा का विकल्प: यदि परीक्षा आवश्यक है, तो इसके लिए एक अनुकूल और ‘विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा’ आयोजित की जाए, जिससे कार्यरत शिक्षकों को राहत मिल सके ।
- पाठ्यक्रम की समीक्षा: एससीईआरटी (SCERT) के माध्यम से परीक्षा के पाठ्यक्रम की समीक्षा की जाए, ताकि वह कार्यरत शिक्षकों की व्यावहारिक कार्यक्षमता के अनुरूप हो ।
- सेवा सुरक्षा: किसी भी परिस्थिति में शिक्षकों की सेवा पर संकट न आए, इसके लिए सरकार को ठोस नीतिगत निर्णय लेने की आवश्यकता है ।
शिक्षकों में असंतोष की स्थिति
वर्तमान में राज्य के विभिन्न जिलों, विशेषकर कोंडागांव, महासमुंद, बलौदाबाजार और सरगुजा में बड़ी संख्या में शिक्षक इस अनिवार्यता से प्रभावित हो रहे हैं । शिक्षकों का मानना है कि लंबे समय तक अध्यापन के बाद अचानक परीक्षा के लिए दबाव बनाना उनके मानसिक और व्यावसायिक मनोबल को प्रभावित कर रहा है। फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार यदि समय रहते इस दिशा में उचित समाधान नहीं निकालती है, तो आने वाले समय में राज्यव्यापी विरोध और तेज हो सकता है ।
Demand for TET Exemption Intensifies
अब तक स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या राहत की घोषणा नहीं की गई है, जिससे शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है । शिक्षक संगठनों का यह भी कहना है कि यदि सरकार सीधे तौर पर राहत नहीं दे पा रही है, तो उन्हें कानूनी विकल्पों पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा ।
यह मामला अब केवल प्रशासनिक चर्चा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। छत्तीसगढ़ में कार्यरत शिक्षक अब सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी वर्षों की सेवाओं का सम्मान करते हुए टीईटी के प्रावधानों में तर्कसंगत संशोधन किया जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इन 80,000 शिक्षकों की चिंताओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुचारु संचालन सुनिश्चित बना रहे।
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