अंबिकापुर। सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में कक्षा 12 के 17 वर्षीय एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। छात्र शुक्रवार रात अपने कमरे में सोने गया था और शनिवार सुबह परिजनों ने उसे मृत पाया। परिवार उसे तत्काल अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि मौत का संबंध करीब एक महीने पहले हुई उत्पीड़न की घटना से है या नहीं।
जानकारी के अनुसार, सीतापुर के महामाया पारा निवासी छात्र स्वामी आत्मानंद स्कूल में कक्षा 12वीं का विद्यार्थी था। उसके पिता धीरज सोनी की कस्बे में आभूषणों की दुकान है। छात्र का एक भाई और एक बहन राजस्थान के कोटा में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। दोनों के सरगुजा पहुंचने के बाद रविवार को छात्र का अंतिम संस्कार किया गया। परिवार सदमे में है।
परिजनों के मुताबिक, करीब एक महीने पहले तीन युवकों ने छात्र के साथ मारपीट की थी और जबरन उसके कपड़े उतरवाकर वीडियो बना लिया था। आरोपियों ने किसी से शिकायत करने पर वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की धमकी दी थी। छात्र ने इसकी शिकायत पुलिस से की, जिसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। तीनों फिलहाल अंबिकापुर सेंट्रल जेल में हैं।
इस घटना के बाद छात्र कुछ समय तक स्कूल नहीं गया था, लेकिन हाल के दिनों में उसने दोबारा स्कूल जाना शुरू कर दिया था। परिजनों का कहना है कि वह लगातार गुमसुम और तनाव में रहता था।
सीतापुर के थाना प्रभारी प्रदीप जायसवाल ने बताया कि अस्पताल में छात्र को मृत घोषित कर दिया गया था। प्रारंभिक आकलन के अनुसार मौत रात करीब दो से तीन बजे के बीच हुई है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि परिजनों ने अभी किसी पर नया आरोप नहीं लगाया है, इसलिए पहले की घटना और इस मौत के बीच संबंध है या कोई अन्य कारण जिम्मेदार है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।
गौरतलब है कि सितंबर में हुई मारपीट और वीडियो बनाने की घटना के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि बच्चे को मानसिक रूप से संभालने के लिए परामर्श और सहायता उपलब्ध कराई गई थी या नहीं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान इस पहलू को भी देखा जाएगा और आवश्यक होने पर उत्पीड़न मामले में जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
पुलिस ने अपील की है कि मामले में अफवाह न फैलाएं और सोशल मीडिया पर बच्चे की पहचान व घटना से जुड़ी तस्वीरें साझा न करें, क्योंकि कानून के तहत नाबालिग पीड़ित की पहचान गोपनीय रखनी होती है।








