रायपुर। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। राज्य सरकार ने 12 जिलों को अलर्ट पर रखा है और प्रशासन ने 779 राहत शिविर तैयार कर लिए हैं। मौसम विभाग ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को भी प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। सुरक्षा को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद रखे गए हैं और लोगों से जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और कुछ इलाकों में यह रफ्तार 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है, जिससे बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों में सबसे ज्यादा सतर्कता बरतने को कहा गया है।
बस्तर संभाग के कोंडागांव, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा में रेड अलर्ट है। रायपुर, दुर्ग, बालोद, धमतरी, महासमुंद, कांकेर, नारायणपुर और गरियाबंद ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में शामिल हैं, जबकि सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, जांजगीर-चांपा, बेमेतरा, राजनांदगांव और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन कमजोर मकानों और निचले इलाकों पर विशेष नजर रखे हुए है।
गुरुवार को रायपुर, बिलासपुर, मुंगेली, रायगढ़, बलौदाबाजार-भाटापारा, बेमेतरा, धमतरी, राजनांदगांव, कबीरधाम, कांकेर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सूरजपुर और जांजगीर-चांपा के सरकारी व निजी स्कूलों में अवकाश रहेगा। रायपुर के कलेक्टर गौरव सिंह ने स्कूलों और कॉलेजों में एक दिन की छुट्टी का आदेश दिया है, जबकि दुर्ग में 29 और 30 अक्टूबर दोनों दिन स्कूल बंद रहेंगे। मुंगेली में आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद हैं।
राज्य सरकार ने 779 राहत शिविर तैयार किए हैं, जहां बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों को पहुंचाया जा सके। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, दवा और बिस्तर की व्यवस्था की गई है। जिला प्रशासन की टीमों के साथ एसडीआरएफ और होमगार्ड के जवान तैनात हैं। कंट्रोल रूम चौबीस घंटे काम कर रहे हैं और नगर निगम की टीमें पानी निकासी में जुटी हैं। अधिकारियों के मुताबिक अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। रेल और सड़क यातायात पर भी असर हुआ है; कुछ ट्रेनें प्रभावित रहीं और कई मार्गों पर वाहनों की गति सीमित रखी गई है।
लोगों से कहा गया है कि पेड़ों, बिजली के खंभों और कच्ची दीवारों के पास न खड़े हों। बच्चों को घर में ही रखें, यात्रा टालें और टूटे तारों से दूर रहें। किसानों को धान खुले में न रखने और मंडियों में सुरक्षित ढकने की सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने को कहा गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक 30 अक्टूबर से स्थिति में सुधार होने की संभावना है और एक नवंबर तक किसी नई चेतावनी की संभावना नहीं है। फिर भी बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश कुछ इलाकों में जारी रह सकती है।








