सरगुजा की अनोखी शादी: दुल्हन ने लाई बारात, दूल्हे की हुई भावुक विदाई! सबकी आंखें नम : Sarguja’s Unique Wedding: Bride Arrives with the Procession

Uday Diwakar
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  • बारात का अनोखा रूप: सरगुजा में दुल्हन ने परंपरा तोड़ी और स्वयं बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची, जहां पूरे परिवार ने जोरदार स्वागत किया।
  • दूल्हे की विदाई का भावुक क्षण: शादी के बाद दूल्हे को ससुराल विदा किया गया, दुल्हन के परिवार ने आशीर्वाद देकर सबको रुला दिया।
  • समाज के लिए मिसाल: यह शादी लैंगिक समानता और नई परंपराओं की मिसाल बनी, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

Sarguja’s Unique Wedding: Bride Arrives with the Procession: सरगुजा:​​​अंबिकापुर: 20 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सुलपगा गांव में एक ऐसी शादी हुई, जिसने सदियों पुरानी परंपराओं को चुनौती दे दी। यहां दुल्हन देवमुनि एक्का ने बारात लेकर दूल्हे बिलासुस बरवा के घर धूमधाम से प्रवेश किया। शादी के बाद दूल्हे की विदाई का भावुक पल देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। यह घटना न केवल लैंगिक समानता की मिसाल बनी, बल्कि आदिवासी संस्कृति और आधुनिक सोच का अनूठा संगम भी प्रस्तुत किया।

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सुलपगा गांव, जो सरगुजा जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्थित है, पिछले कुछ दिनों से इस अनोखी शादी की चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आमतौर पर शादियों में दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर जाता है, लेकिन यहां सब कुछ उल्टा हो गया। दुल्हन देवमुनि एक्का ने अपने परिवार और दोस्तों के साथ बारात सजाई। घोड़ी पर सवार होकर वे दूल्हे के घर पहुंचीं, जहां पूरे गांव ने उनका स्वागत किया। यह दृश्य देखकर स्थानीय लोग हैरान रह गए।

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देवमुनि एक्का, जो एक पढ़ी-लिखी युवती हैं, ने बताया कि यह फैसला दोनों परिवारों ने मिलकर लिया था। “हमारा उद्देश्य समाज को यह संदेश देना था कि शादी में लड़का-लड़की में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। लड़कियां भी उतनी ही मजबूत हैं,” उन्होंने कहा। बारात में डीजे, नाच-गाना और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनें बज रही थीं। दुल्हन पक्ष के लोग रंग-बिरंगे परिधानों में सजे थे, जो आदिवासी संस्कृति की जीवंतता को दर्शा रहे थे।

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मसीही रीति से संपन्न विवाह

बारात पहुंचने के बाद शादी मसीही (ईसाई) परंपरा के अनुसार संपन्न हुई। स्थानीय चर्च में दूल्हा-दुल्हन ने एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। पादरी ने बाइबिल के अनुसार आशीर्वाद दिया और दोनों ने वचन लिए। इस शादी में आदिवासी रीति-रिवाजों का भी खूबसूरत मेल देखने को मिला। मंडप सजावट में स्थानीय पत्तों और फूलों का उपयोग किया गया, जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी दर्शाता है।

शादी की रस्में पूरी होने के बाद आया वह पल, जिसने सभी को भावुक कर दिया। दूल्हे बिलासुस बरवा को ससुराल विदा करना था। दुल्हन के परिवार ने दूल्हे का स्वागत किया और उसे घर जमाई के रूप में अपनाया। बिलासुस अपनी मां और परिवार से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े। यह दृश्य वीडियो में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दूल्हे की मां ने आंसू पोंछते हुए कहा, “बेटा अब ससुराल का हो गया, लेकिन दिल हमेशा हमारे पास रहेगा।”

दहेज मुक्त शादी, समाज के लिए प्रेरणा

इस शादी की एक और खास बात यह रही कि इसमें किसी प्रकार का दहेज नहीं लिया गया। दोनों परिवारों ने दहेज प्रथा का पूरी तरह बहिष्कार किया। दुल्हन पक्ष ने केवल मिठाई और फल भेजे, जबकि दूल्हा पक्ष ने सरल भोज का आयोजन किया। यह घटना दहेज मुक्त समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरगुजा जिला प्रशासन ने भी इसकी सराहना की है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रमेश साहू ने बताया, “यह शादी लैंगिक समानता की मजबूत मिसाल है। आदिवासी समाज में पहले से ही घर जमाई प्रथा प्रचलित है, लेकिन इसे इस तरह प्रस्तुत करना नया है।” उन्होंने कहा कि सरगुजा जैसे क्षेत्रों में लड़कियों को सशक्त बनाने के लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं। स्कूलों और कॉलेजों में इस घटना पर चर्चा हो रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल, मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। ट्विटर (अब X) पर #SurgujaUniqueWedding ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने लिखा, “ये हुई ना असली बराबरी। दुल्हन भी तो उतनी ही ताकतवर है।” वहीं कुछ ने इसे आदिवासी परंपरा का हिस्सा बताया। “यह नई नहीं, बल्कि हमारी पुरानी रिवायत है,” एक टिप्पणी में कहा गया। इंस्टाग्राम रील्स पर लाखों व्यूज आ चुके हैं।

कई बॉलीवुड हस्तियों ने भी इसकी तारीफ की। अभिनेता नेहा धूपिया ने ट्वीट किया, “सरगुजा की यह शादी दिल जीत लेती है। लैंगिक समानता का सच्चा प्रतीक।” वायरल वीडियो में दूल्हे की विदाई का 30 सेकंड का क्लिप सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। लोग इसे शेयर कर भावुक हो रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग इसे “ओवर-हाइप्ड” बता रहे हैं।

देवमुनि एक्का के पिता एक किसान हैं, जबकि मां गृहिणी। परिवार सरगुजा के ग्रामीण इलाके में रहता है। देवमुनि ने स्थानीय कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और सामाजिक कार्य में रुचि रखती हैं। वहीं बिलासुस बरवा एक छोटे व्यवसायी परिवार से हैं। उनके पिता ने बताया, “हमने बेटे को ससुराल भेजने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि वहां बेहतर अवसर हैं। दहेज का कोई सवाल ही नहीं उठा।”

दूल्हे के ससुर ने मीडिया से कहा, “हमारी बेटी मजबूत है, इसलिए उसने बारात लाई। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है।” परिवार ने शादी को सादगीपूर्ण रखा। कुल 500 से ज्यादा लोग शामिल हुए। भोजन में स्थानीय व्यंजन जैसे चीला, ठेठरी और आदिवासी स्पेशल डिश परोसे गए। कोई शराब या मांसाहारी भोजन नहीं था।

Sarguja’s Unique Wedding: Bride Arrives with the Procession

यह शादी सरगुजा में नई बहस छेड़ रही है। स्थानीय पंचायत ने इसे महिलाओं सशक्तिकरण का प्रतीक माना। जिला कलेक्टर ने कहा, “ऐसे आयोजन समाज को प्रगतिशील बनाते हैं। हम इसे अन्य गांवों तक पहुंचाएंगे।” स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। लड़कियों को प्रेरित करने के लिए वर्कशॉप चल रहे हैं।

आदिवासी डॉ. मणि एक्का ने बताया, “सरगुजा में घर जमाई प्रथा सामान्य है। लेकिन सोशल मीडिया ने इसे राष्ट्रीय चर्चा बना दिया। यह सकारात्मक बदलाव है।” आने वाले समय में ऐसी शादियां बढ़ सकती हैं। युवा पीढ़ी परंपराओं को नए तरीके से जी रही है। यह घटना छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

सरगुजा की यह शादी केवल एक विवाह नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला संदेश है। दुल्हन की बारात और दूल्हे की विदाई ने भावुकता के साथ प्रगति का संदेश दिया। यह घटना साबित करती है कि परिवर्तन संभव है। सोशल मीडिया के माध्यम से यह मैसेज पूरे देश तक पहुंच रहा है। सरगुजा एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार सकारात्मक कारणों से।

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