जशपुर : सुशासन तिहार में शिकायतों का तूफ़ान: खारीबहार सुशासन शिविर में ग्रामीणों की मांगें तेज़ : Jashpur: A Deluge of Complaints at the Good Governance Festival

Uday Diwakar
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Jashpur: A Deluge of Complaints at the Good Governance Festival: जशपुर:​जिले के खारीबहार ब्लॉक में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में ग्रामीणों ने व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी नाराजगी स्पष्ट रूप से जताते हुए प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की। रविवार को लगे इस शिविर में स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा से जुड़ी कई शिकायतें एक-एक कर प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखी गईं। शिकायतों की संख्या और जमीनी हकीकत ने आयोजन में मौजूद सरकारी कर्मियों और स्थानीय नेताओं को झकझोर दिया।

सुशासन तिहार के आयोजन का उद्देश्य ग्रामीणों को सीधे तौर पर अपने प्रतिनिधियों व अधिकारियों से मिलवाना और समस्याओं का त्वरित निवारण कराना था। हालांकि आयोजन की शुरुआत में ही लंबी कतारों और भीड़-भाड़ ने यह दर्शाया कि लोगों की उम्मीदें बड़ी हैं। सुबह से ही गाँव-ग्रामीन महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शिकायतों की सूची लेकर पहुंचे। जिन मुद्दों पर सबसे अधिक जोर देखा गया, उनमें पीने के पानी की समस्या, बिजली कटौती और खराब सड़कों के कारण स्कूल जाने वाली बच्चों की दिक्कतें खास रहीं।

पीने के पानी की समस्या पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने दर्द बयां किया। ग्रामीणों का कहना था कि पिछले कई महीनों से पेयजल स्रोत सूख रहे हैं या पानी में गंदगी के कारण बीमारी बढ़ रही है। खारीबहार के निवासी रामलाल पटेल ने बताया, “हमारे मोहल्ले में पिछले दो-तीन साल से नलकूपों का पानी खारा और मलिन है। बच्चों को प्यास बुझाने के लिए बोतल का पानी खरीदना पड़ता है। प्रशासन से बार-बार कहा, पर ठोस काम नहीं हुआ।” इससे साफ था कि पानी की कमी केवल एक-परिवार की समस्या नहीं, बल्कि पूरे ब्लॉक का व्यापक मसला बन चुकी है।

बिजली आपूर्ति को लेकर भी तीखी नाराजगी सामने आई। कई ग्रामीणों ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती नियमित हो गई है, जिससे खेती और घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। स्थानीय किसान सुनील मंडावी ने बताया कि पंप सेट पर बिजली न होने से समय पर सिंचाई नहीं हो पाती और फसलें प्रभावित होती हैं। शिविर में बिजली विभाग के प्रतिनिधि ने स्थिति को सुनने के बाद आश्वासन दिया कि खराब ट्रांसफार्मर और लाइन मरम्मत के लिए शीघ्र कार्य किया जाएगा, लेकिन ग्रामीणों ने कहा कि पिछली बार भी ऐसे आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

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सड़कों की बदहाल हालत ने भी चिंतित कर दिया। खारीबहार से जुड़ी कई ग्रामीण सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी हैं कि स्कूल जाने वाली बच्चियों और छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। एक शिक्षिका निर्मला देवांगन ने कहा, “बारिश के मौसम में बच्चे स्कूल नहीं आ पाते क्योंकि रास्ते दलदल बन जाते हैं। शिक्षा पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।” स्थानीय पार्षद ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव पहले भी जमा किया गया था, पर फंड और ठेकेदारों के अनुपालन में देरी बनती रहती है।

शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आईं। ग्रामीणों ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाइयों और स्टाफ की कमी है, और गंभीर मामलों के लिए मरीजों को बड़े शहरों तक जाना पड़ता है। एक महिला, सरोजनी बैस, ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच नहीं हो पाती और आवश्यक दवाइयों का अभाव रहता है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कहा कि दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करने और स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति के लिए जिलास्तरीय स्तर पर कार्रवाई की जाएगी, पर स्थानीय लोगों ने त्वरित व्यवस्था की मांग दोहराई।

Jashpur: A Deluge of Complaints at the Good Governance Festival

शिकायतों के साथ-साथ ग्रामीणों ने कुछ सकारात्मक सुझाव भी दिए। उन्होंने समुदाय-आधारित जल प्रबंधन प्रणालियों, सोलर वाटर पम्प और सस्ती दवा वितरण केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा। कई स्थानीय युवा स्वयंसेवक भी आगे आए और बताया कि वे पंचायतों के साथ मिलकर सफाई अभियान और छोटी मरम्मत कार्यों में हाथ बटाने को तैयार हैं, बशर्ते प्रशासन उन्हें तकनीकी और सामग्री सहयोग दे।

शिविर में पहुंचे अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक शिकायत का रजिस्टर में एन्ट्री कर ली गई है और प्राथमिकता के आधार पर मामलों का निस्तारण किया जाएगा। खारीबहार के तहसीलदार राजेंद्र जैन ने मीडिया से कहा, “हमने सुशासन तिहार का उद्देश्य यही रखा है कि लोगों की समस्याओं को सीधे तौर पर सुना जाए और जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव है, उन पर त्वरित कार्रवाई की जाए। जहां लंबी प्रक्रियाओं की जरूरत होगी, वहां पारदर्शी फॉलो-अप और आवश्यक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि पानी और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी गई है और संबंधित विभागों को 15 दिनों के अंदर एक कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया है।

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी शिकायतों पर बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद परिणाम नहीं निकले, इसीलिए वे इस बार भी ठोस कार्रवाई की निगरानी चाहते हैं। कुछ ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि शिकायतों की प्रगति को सार्वजनिक प्लैटफॉर्म पर पोस्ट किया जाए ताकि जनता खुद देख सके कि कौन-सा काम कब पूरा हुआ। यह मांग सुशासन के मूल सिद्धांत — पारदर्शिता और जवाबदेही — के अनुरूप लगती है।

समाजसेवियों और क्षेत्रीय पत्रकारों ने भी आयोजन की आवश्यकता और सीमाओं दोनों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर स्थानीय समस्याओं को उभारने में मदद करते हैं परन्तु शासन-प्रशासनिक मशीनरी को जल्दी निर्णय लेने और धरातलीय क्रियान्वयन के लिए मजबूत बनाना होगा। आयोजन के दौरान दर्ज शिकायतों की सूची और प्राथमिकता के आधार पर विभागीय मापदण्ड तय किए जाने की बात कही गई है, पर अन्तिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी जल्दी और ईमानदारी से उन निर्देशों पर अमल होता है।

शिविर के समापन पर आयोजकों ने वादा किया कि शिकायतों का निस्तारण एक समन्वित रिपोर्ट के माध्यम से सार्वजनिक किया जाएगा और जिन मामलों का समाधान जल्द नहीं हो सकेगा, उन पर नियमित अपडेट दी जाएगी। ग्रामीणों ने कहा कि वे इस वादे की प्रतीक्षा में हैं और अगले महीने फिर से स्थिति देखेंगे कि क्या किसी कार्ययोजना का ठोस परिणाम निकला है या नहीं।

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