अंबिकापुर कलेक्टर का निर्देश: कोई भी विद्यालय एकल शिक्षकीय न रहे, अतिरिक्त शिक्षकों की तत्काल व्यवस्था के निर्देश : Directive from the Ambikapur Collector: No school should be left with only a single teacher

Uday Diwakar
8 Min Read

Directive from the Ambikapur Collector: No school should be left with only a single teacher: सरगुजा:​​​अंबिकापुर (13 June 2026): सरगुजा जिले में स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने और बच्चों को बेहतर शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर ने बड़ा निर्देश जारी किया है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने साफ कहा कि जिले में कोई भी शासकीय विद्यालय अब एकल शिक्षकीय (सिर्फ एक शिक्षक वाला) नहीं रहेगा और ऐसे सभी स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की तत्काल व्यवस्था की जाए।

बैठक में शिक्षा विभाग के जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों, बीईओ, बीआरसी, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया। कलेक्टर ने स्कूलों में शिक्षक उपलब्धता, नामांकन, शाला प्रवेश उत्सव, बुनियादी सुविधाएँ और परीक्षाफल को लेकर विभागीय प्रेजेंटेशन लेते हुए स्पष्ट किया कि अकेले एक शिक्षक के भरोसे किसी भी विद्यालय को नहीं छोड़ा जा सकता।

कलेक्टर ने कहा कि एकल शिक्षकीय विद्यालयों में पढ़ाई की निरंतरता, कक्षा संचालन, प्रशासनिक कामकाज, मिड-डे मील, शाला प्रवेश जैसे कार्यक्रमों को संभालना एक शिक्षक के लिए व्यावहारिक रूप से मुश्किल होता है। इससे न केवल शिक्षण स्तर प्रभावित होता है, बल्कि बच्चों का स्कूल से जुड़ाव भी कमजोर होता है। इसी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि जिले में सभी एकल शिक्षकीय विद्यालयों की विस्तृत सूची तैयार कर तुरंत अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था की जाए।

- Advertisement -
Website Designer in AmbikapurWebsite Designer in Ambikapur

image 21

कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि वे ब्लॉकवार सूची प्राप्त कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि कहाँ-कहाँ अतिरिक्त तैनाती की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राथमिकता उन स्कूलों को दी जाएगी, जहाँ नामांकन अधिक है, दूरी अधिक है या फिर आसपास विकल्प के रूप में अन्य स्कूल उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही बच्चों का जेंडर बैलेंस, अनुसूचित जनजाति और अन्य कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों की संख्या को भी ध्यान में रखा जाएगा।

बैठक के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में कई ऐसे विद्यालय हैं, जहाँ वर्षों से केवल एक ही शिक्षक पदस्थ है। कुछ जगहों पर तो हालात ऐसे हैं कि शिक्षक के अवकाश पर जाने या प्रशिक्षण में शामिल होने पर कई दिनों तक स्कूल पूरी तरह बंद जैसा हो जाता है। कलेक्टर ने ऐसे मामलों पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और इसे तुरंत सुधारा जाए।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे शिक्षक संविलियन, समायोजन और अस्थायी तैनाती जैसे विकल्पों का उपयोग कर एकल शिक्षकीय स्कूलों में तुरंत व्यवस्था करें। जहां आवश्यकता हो, वहां अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं या निकट के स्कूलों से रोटेशनल व्यवस्था अपनाने जैसे विकल्पों पर भी विचार करने को कहा गया।

Directive from the Ambikapur Collector: No school should be left with only a single teacher

उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ स्कूलों में स्वीकृत पद तो अधिक हैं, लेकिन शिक्षक उपस्थित नहीं हो रहे, वहां अनुपस्थित शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाए। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि स्कूलों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने वाले शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, वेतन रोकने और स्पष्टीकरण नोटिस जारी करने जैसे कदम उठाए जाएँ।

बैठक में ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में फील्ड विजिट बढ़ाएँ और स्वयं स्कूलों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति देखें। उन्हें यह भी कहा गया कि हफ्ते में कम से कम तय संख्या में विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि शिक्षक समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं, कक्षाएँ नियमित रूप से चल रही हैं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है।

कलेक्टर ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए केवल शिक्षक की संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि शिक्षण पद्धति, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और परिणाम आधारित मूल्यांकन पर भी काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि एक बार अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती हो जाने के बाद, लर्निंग आउटकम (सीखने के परिणाम) पर नियमित मॉनिटरिंग की जाए और धीमी गति से सीखने वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष कक्षाओं की व्यवस्था की जाए।

इसके अलावा, कलेक्टर ने शाला प्रवेश उत्सव से जुड़े निर्देशों को भी दोहराया और कहा कि जहाँ नए सत्र के शुरुआत में बच्चों का स्वागत तिलक और कार्यक्रमों के साथ किया जा रहा है, वहाँ शिक्षक की पर्याप्त उपलब्धता अत्यधिक ज़रूरी है। यदि बच्चों को पहले दिन से ही पढ़ाई, गतिविधियाँ और अनुशासन का सकारात्मक अनुभव मिलेगा तो वे स्कूल के प्रति आकर्षित रहेंगे और ड्रॉपआउट दर घटेगी।

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि कई स्कूलों में शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन वे लंबे समय से डेपुटेशन, लोन या अन्य विभागीय कार्यों में लगे हुए हैं। कलेक्टर ने इस पर नाराज़गी जताई और ऐसे मामलों की समीक्षा कर उन्हें मूल विद्यालय में वापस भेजने के निर्देश दिए। साथ ही, महिला शिक्षकों, दिव्यांग शिक्षकों और विशेष परिस्थितियों वाले मामलों में मानवीय आधार पर समुचित समायोजन करने को कहा।

कलेक्टर ने ग्राम पंचायतों, स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) और अभिभावकों की भी भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि वे यदि किसी स्कूल में एकल शिक्षकीय स्थिति या शिक्षक की अनुपस्थिति देखें तो तत्काल इसकी सूचना ब्लॉक शिक्षा अधिकारी या जिला प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि सामुदायिक निगरानी के बिना शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार मुश्किल है, इसलिए समाज की भागीदारी अनिवार्य है।

बैठक के अंत में कलेक्टर ने सभी अधिकारियों से यह लिखित आश्वासन लिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनके ब्लॉक में किसी भी विद्यालय को एकल शिक्षकीय नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि समीक्षा के दौरान यदि कहीं ऐसी स्थिति पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस निर्णय से जिले के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में संचालित स्कूलों को बड़ा लाभ मिलेगा। अभी तक जहां एक शिक्षक सभी कक्षाओं को बारी-बारी से देखता था, अब अतिरिक्त शिक्षकों के आने से कक्षाएँ नियमित और विषयवार संचालित हो सकेंगी। इससे बच्चों की उपस्थिति के साथ-साथ उनका सीखने का स्तर भी बेहतर होने की उम्मीद है।

अंबिकापुर कलेक्टर का यह कदम शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने और सरकारी स्कूलों पर आमजन का भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यदि निर्देशों का ईमानदारी से पालन हुआ और समय रहते अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती हो गई, तो सरगुजा जिले में सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की दिशा में यह एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है।

यह भी पढ़ें-छत्तीसगढ़ में 16 जून से शुरू होगा शाला प्रवेश उत्सव; तिलक-लगाकर बच्चों का स्वागत, मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म वितरित होगी

Share This Article
Leave a Comment