Shala Pravesh Utsav in Chhattisgarh on June 16: सरगुजा:अंबिकापुर (13 June 2026): नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ के शासकीय स्कूलों में इस बार 16 जून से शाला प्रवेश उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों, जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन समितियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे इसे बच्चों के लिए उत्साह, सम्मान और प्रेरणा का माहौल बनाने वाला अभियान बनाएं। शाला प्रवेश के दौरान न केवल नए बच्चों का तिलक लगाकर, आरती और पुष्पगुच्छ से स्वागत किया जाएगा, बल्कि उन्हें निशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों को स्कूल से जोड़ना, ड्रॉपआउट कम करना और शिक्षा के प्रति परिवारों में सकारात्मक माहौल तैयार करना है। ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विशेष रूप से यह प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी बच्चा स्कूल से वंचित न रहे। शाला प्रवेश उत्सव के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों से निकलकर पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम रखे जाएंगे, ताकि वे स्कूल के माहौल को अपनाने में सहज महसूस करें।
शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, सभी प्राथमिक, मिडिल और हाई स्कूलों में 16 जून की सुबह प्रार्थना के बाद शाला प्रवेश कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। स्कूल भवन को साफ-सफाई के साथ सजाने, मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने और बच्चों के लिए स्वागत तोरण लगाने पर ज़ोर दिया गया है। कई जगहों पर ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधि, अभिभावक, पूर्व छात्र और स्थानीय सामाजिक संगठन भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे, ताकि समुदाय की भागीदारी के साथ स्कूल को विकसित करने का संदेश दिया जा सके।
नए प्रवेश लेने वाले बच्चों को स्वागत के समय पुष्प, तिलक, और मिठाई के साथ सम्मानित किया जाएगा। शिक्षक बच्चों के नाम की घोषणा कर उन्हें मंच पर बुलाएंगे और संक्षिप्त परिचय के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की कोशिश करेंगे। खासकर पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों के लिए यह व्यवस्था की गई है कि शिक्षक और वरिष्ठ छात्र उन्हें कक्षा, खेल का मैदान, पुस्तकालय और अन्य सुविधाओं से परिचित कराएं, ताकि उनके मन में स्कूल के प्रति उत्साह पैदा हो।
शाला प्रवेश उत्सव के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहल मुफ्त किताबों और यूनिफॉर्म के वितरण की है। राज्य सरकार की योजना के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जानी हैं। इसके अलावा निर्धारित वर्गों के विद्यार्थियों को दो जोड़ी यूनिफॉर्म भी प्रदान की जाएगी। कई स्थानों पर पुस्तक वितरण के लिए अलग से काउंटर बनाए जाएंगे, जहां शिक्षक और छात्र मिलकर सूची के आधार पर किताबें देंगे, ताकि किसी भी बच्चे को पुस्तकें मिलने में असुविधा न हो।
Shala Pravesh Utsav in Chhattisgarh on June 16
यूनिफॉर्म वितरण के संदर्भ में विभाग ने स्कूलों को यह भी निर्देश दिए हैं कि सिलाई और माप के लिए समय रहते तैयारी पूरी कर ली जाए। जिन स्कूलों में स्थानीय स्तर पर सिलाई कराई जाती है, वहां सिलाईकारों को पहले ही सूची और समय सीमा दे दी गई है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही बच्चों को यूनिफॉर्म मिल जाए और वे समानता की भावना के साथ स्कूल आ सकें। यूनिफॉर्म का उद्देश्य न केवल बच्चों की आर्थिक सहायता करना है, बल्कि स्कूल में अनुशासन, एकरूपता और आत्मसम्मान की भावना विकसित करना भी है।
शाला प्रवेश उत्सव को आकर्षक बनाने के लिए कई स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रेरक संबोधन भी आयोजित किए जाएंगे। छात्र-छात्राएँ स्वागत गीत, देशभक्ति गीत, कविता पाठ और लघु नाटिका प्रस्तुत करेंगे, जिनका विषय शिक्षा का महत्व, बाल विवाह रोकथाम और बाल अधिकार जैसे मुद्दों पर आधारित होगा। कई जगहों पर मेधावी छात्रों का सम्मान भी किया जाएगा, ताकि अन्य बच्चों को प्रेरणा मिले और वे पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए उत्साहित हों।
राज्य में बालिकाओं के नामांकन पर विशेष फोकस करते हुए शिक्षकों को घर-घर जाकर अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि कई परिवार अब भी बेटियों की पढ़ाई को लेकर उदासीन रहते हैं, ऐसे में शाला प्रवेश उत्सव एक बेहतर अवसर है कि स्कूल और समाज मिलकर उन्हें जागरूक करें। इसी कड़ी में अभिभावक संपर्क अभियान के तहत शिक्षकों ने पहले ही कई मोहल्लों और गांवों में बैठकें कर अभिभावकों से सीधी बातचीत की है।
शाला प्रवेश उत्सव के दौरान ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान और पुनः नामांकन पर भी जोर रहेगा। शिक्षक पिछले वर्षों के रिकॉर्ड के आधार पर उन बच्चों की सूची तैयार कर रहे हैं जो किसी कारण से स्कूल छोड़ चुके हैं या नियमित रूप से नहीं आ रहे। कार्यक्रम के मंच से ही ऐसे बच्चों को सम्मान के साथ वापस स्कूल लाने की अपील की जाएगी, और यदि संभव हो तो उन्हें मौके पर ही पुनः नामांकित किया जाएगा।
इस पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। वे अलग-अलग स्कूलों का निरीक्षण कर यह देखेंगे कि शाला प्रवेश उत्सव निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित हो रहा है या नहीं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस अभियान को अधिक से अधिक प्रचारित करने की योजना है, ताकि लोग अपने बच्चों को समय पर स्कूल भेजने के लिए प्रेरित हों। कुछ जिलों में व्हाट्सऐप ग्रुप, फेसबुक पेज और स्थानीय समाचार माध्यमों के जरिए शाला प्रवेश के फोटो और वीडियो साझा किए जाएंगे।
अभिभावकों के लिए भी यह संदेश दिया जा रहा है कि वे शाला प्रवेश उत्सव के दिन अपने बच्चों के साथ स्कूल अवश्य जाएं। इससे न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्कूल और अभिभावकों के बीच संवाद भी मजबूत होगा। कई स्कूलों में इसी दिन अभिभावक-शिक्षक बैठक रखी जाएगी, जिसमें वे बच्चों के भविष्य, पढ़ाई, अनुशासन और सुविधाओं को लेकर चर्चा कर सकेंगे।
शाला प्रवेश उत्सव को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में खास उत्साह देखा जा रहा है। कई पंचायतों ने अपने स्तर पर स्कूलों के लिए छत मरम्मत, पेयजल, शौचालय और बाउंड्रीवाल से संबंधित छोटे-मोटे काम भी शुरू किए हैं, ताकि नए सत्र में बच्चों को बेहतर माहौल मिल सके। कुछ स्थानों पर जनप्रतिनिधि स्वयं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और अन्य सामग्री वितरित करने भी आ रहे हैं, जिससे शिक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
16 जून से शुरू होने वाला शाला प्रवेश उत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आ रहा है। सरकार, प्रशासन, शिक्षक, अभिभावक और समाज मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि हर बच्चा स्कूल पहुंचे, नियमित रूप से पढ़े और अपने भविष्य को मजबूत बनाए। इस उत्सव के माध्यम से यह भी प्रयास है कि स्कूल बच्चों के लिए डर या दबाव का नहीं, बल्कि सीखने, खेलने और आगे बढ़ने का खुला और आनंददायक मंच बन सकें।
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