मांड नदी का मुँह मोड़ दिया बालू माफियाओं ने: अवैध रेत खनन ने छीना पानी और पर्यावरण का संतुलन, जगह जगह बन गए जानलेवा गड्ढे : Sand mafia diverts the course of the Mand River

Uday Diwakar
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Sand mafia diverts the course of the Mand River: सरगुजा:​​​अंबिकापुर (08 June 2026): सीतापुर — मांड नदी का स्वरूप बदल चुका है। लंबे समय से सक्रिय बालू माफियाओं द्वारा ऊँची-ऊँची डंपिंग और अवैध रेत निकासी ने नदी के जलस्तर को घटा दिया है और कई हिस्सों में नदी सूख चुकी है। नदी तट पर बने बड़े-बड़े गड्ढे अब सिर्फ भूमि ही नहीं खोद रहे, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की ज़िंदगी, कृषि और जल आपूर्ति पर भी विनाशकारी असर डाल रहे हैं।

स्थानीय निवासी और किसान बताते हैं कि पिछले दो-तीन साल में नदी का पानी घटता गया और कई बार सूखने की स्थिति आ गई। “पहले मांड नदी सालभर पानी रखती थी। गाय-भैंस को नहलाने, सिंचाई और घरेलू जरूरतों के लिए भरोसा था। अब नदी सूख जाती है और जो गड्ढे बने हैं, वे खतरनाक हो गए हैं,” गाँव वाले रामप्रसाद यादव ने कहा। उन्होंने बताया कि कई जगहों पर गहरे गढ्ढों में बच्चे और जानवर गिरने का खतरा बना रहता है।

स्थानीय कृषि विज्ञानियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट में कहा गया है कि अवैध खुदाई से बने गड्ढों की संख्या सौ से अधिक है और कई स्थानों पर ये 6 से 8 मीटर तक गहरे हैं। इन गड्ढों में भरे पानी से पर्ट्रीकुलर इकॉलॉजी टूट रही है — मछलियाँ, वन्यजीव और नदी किनारे की फसलों हेतु जीवनदायिनी जल उपलब्धता खत्म हो रही है। नदी की पारंपरिक धारा भी बदल गयी है क्योंकि बालू निकालने के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है।

मांड नदी पर निर्भर दर्जनों गाँवों में पेयजल और सिंचाई के लिए बुंदेली बोरवेल और जलाशयों पर निर्भरता बढ़ी है। कई किसानों ने कहा कि उनकी फसलें सूखने लगीं और बोरवेलों का पानी खारे होने लगा है। “हमारी धान की फसलें और सब्जियाँ पहले नदीनदी के ऊपर निर्भर थीं। अब पानी के बिना खेती मुश्किल हो गयी है। बच्चे स्कूल छोड़कर पानी लाने निकलते हैं,” एक महिला ने बताया।

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जलविज्ञानी और पर्यावरणविद कहते हैं कि नदी की चैनलिंग और नदी तल का कटाव न केवल स्थानीय जलस्तर पर असर डालता है, बल्कि भूजल पत्रिका (aquifer) के रिचार्जिंग को भी नष्ट करता है। इससे भूजल स्तर नीचे चला जाता है और क्षेत्रीय जल सुरक्षा प्रभावित होती है। मांड नदी के प्राकृतिक रेत-ढांचे में होने वाले परिवर्तन नदी के पारिस्थितिकी चक्र को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं।

गाँव वालों का आरोप है कि रेत खनन में स्थानीय बाहुबल और रात-दिन काम करने वाले ठेकेदार शामिल हैं। “नियमों के बावजूद मशीनें और पोरियाँ रात में भी काम करती हैं। किसी भी सरकारी तंत्र की वास्तविक जांच नजर नहीं आती,” ग्राम प्रधान मीना कुमारी ने कहा। नगर पंचायत के पास शिकायतें पहुंचने के बावजूद, कार्रवाई नहीं होने का डर ग्रामीणों में परिवाराने बना हुआ है।

Sand mafia diverts the course of the Mand River

स्थानीय सरकार और खनन विभाग की ओर से मिली ताजा जानकारी में कहा गया कि कई जगहों पर छापेमारी की जा चुकी है और कुछ उपकरण जब्त भी किए गए हैं। क्षेत्रीय खनन अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि सीमित संख्या में लाइसेंस धारकों के अलावा भी कुछ अवैध समूह सक्रिय हैं जिन्हें चिन्हित कर हटाया जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई नाकाफी है और ठेकेदारों का टालमटोल और स्थानीय सियासत से जुड़ाव मामले को जटिल बना देता है।

अवैध रेत खनन ने स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी फर्क डाला है। जहां कुछ लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खनन से जुड़ कर कमाई कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों की पारम्परिक आजीविका प्रभावित हुई है। कई युवाओं ने बताया कि खेती छोड़कर वे अस्थायी रेत काम करने को मजबूर हुए, परन्तु यह अस्थायी और अनियमित कमाई है और सुरक्षा व स्वास्थ्य जोखिम से भरी है।

गहरे गड्ढों और बेकरार किनारों के कारण क्षेत्र में हादसों की संख्या बढ़ी है। पिछले छह महीनों में दो दर्जन से अधिक छोटे-मोटे हादसे दर्ज किए गए हैं जिनमें लोग पांव फिसलकर गढ्ढों में गिर गए या वाहन फंस गए। ग्रामीणों ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन से इन गड्ढों को भरने, सुरक्षा चेतावनियाँ लगाने और लोगों को जागरूक करने की मांग की है।

स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि अवैध खनन पूरी तरह से बंद कराया जाए, गढ्ढों को भरकर नदी का प्राकृतिक प्रवाह बहाल किया जाए और प्रभावित परिवारों को राहत दी जाए। “हमें सिर्फ आज की मदद नहीं चाहिए; हम चाहते हैं कि नदी फिर से बह सके ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ भी पानी और कृषि पर निर्भर कर सकें,” एक बुजुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा।

समस्या का स्थायी हल बहु-स्तरीय होगा: कड़े निरीक्षण और मुआवजे के साथ अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई; नदी के प्राकृतिक ढांचे को बहाल करने के लिए पुनर्स्थापना योजना (river restoration) और गढ्ढों को भरने की तकनीकी पहल; स्थानीय समुदायों को शामिल करके सतत प्रबंधन और वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना। साथ ही लंबी अवधि में नदी के रिचार्ज और जल-प्रबंधन के लिए एक समेकित नीतिगत दृष्टिकोण आवश्यक है।

मांड नदी पर चल रहे अवैध रेत खनन ने सिर्फ पानी ही नहीं छीना है बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी, खेती और ग्रामीण जीवन को भी गहरे प्रभावित किया है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन शीघ्र, पारदर्शी और निर्णायक कार्रवाई करे ताकि नदी को पुनर्जीवित किया जा सके और भविष्य में ऐसी क्षति से बचाव संभव हो।

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