खाकी पर दाग: साथी आरक्षक की मौत के 126 दिन बाद भी सूरजपुर पुलिस के हाथ खाली, जांच अधिकारी पर आरोपी को बचाने का आरोप : 126 Days After a Colleagues Death Surajpur Police Remain Empty-Handed

Uday Diwakar
6 Min Read

126 Days After a Colleagues Death Surajpur Police Remain Empty-Handed: सूरजपुर : सूरजपुर कर्तव्य की वेदी से लौट रहे आरक्षक अभय पाण्डेय को रौंदने वाली पिकअप का सुराग लगाने में ‘हाईटेक’ पुलिस नाकाम, परिजनों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी।
सूरजपुर। कहते हैं कि पुलिस की पैनी नजरों से अपराधी का बचना नामुमकिन होता है, लेकिन जब खुद खाकी वर्दी पहनने वाले किसी अपने के साथ अन्याय हो और विभाग ही हाथ पर हाथ धरे बैठा रहे, तो इसे आप क्या कहेंगे? संवेदनहीनता की पराकाष्ठा या फिर जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता?


आज से ठीक तीन महीने पहले, 2 फरवरी की शाम करीब 8 बजे कर्तव्य की वेदी पर अपनी सेवाएं देकर घर लौट रहे पुलिस आरक्षक अभय कुमार पाण्डेय की एक सड़क दुर्घटना में असामयिक और दर्दनाक मौत हो गई थी। वह आरक्षक, जिसने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों की सुरक्षा में लगा दी, आज उसका अपना परिवार न्याय की भीख मांग रहा है। लेकिन अफसोस! घटना के 126 दिन बीत जाने के बाद भी खुद को ‘हाईटेक’ बताने वाली सूरजपुर पुलिस उस घटनाकारी वाहन और उसके चालक का सुराग तक नहीं लगा पाई है। इस दिशाहीन और कछुआ गति से चल रही जांच ने मृतक आरक्षक के परिजनों को गहरे सदमे और निराशा में धकेल दिया है।


जांच अधिकारी सुशील तिवारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप, प्रत्यक्षदर्शी को दरकिनार करने का दावा
मृतक आरक्षक के परिजनों का गुस्सा जांच अधिकारी सुशील तिवारी की कार्यप्रणाली को लेकर चरम पर है। परिजनों का आरोप है कि घटना के तत्काल बाद मुख्य गवाह और प्रत्यक्षदर्शी ने थाना प्रभारी को फोन पर पूरी जानकारी दी थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उसका बयान दर्ज नहीं किया गया।


परिजनों ने जांच अधिकारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:


“प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से साफ था कि दुर्घटना कारित करने वाली पिकअप यूपी (उत्तर प्रदेश) नंबर की थी। जांच अधिकारी सुशील तिवारी ने शुरुआत में ड्राइवर और पिकअप दोनों को पकड़कर भी छोड़ दिया। बाद में जब भारी दबाव बनाया गया, तो तीन महीने बाद पुनः उसी पिकअप ड्राइवर को पकड़ा गया और मामूली धाराएं लगाकर थाने से ही जमानत दे दी गई। यह सीधे तौर पर आरोपी को बचाने और जांच में लापरवाही बरतने का मामला है।”
परिजनों ने मांग की है कि मामले में ‘हिट एंड रन’ के तहत पर्याप्त और सख्त धाराएं जोड़ी जाएं, जांच अधिकारी पर दंडात्मक कार्रवाई हो और आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।

- Advertisement -
Website Designer in AmbikapurWebsite Designer in Ambikapur


🛑 विशेष बॉक्स: न्याय की आस में सिसकता ‘पुलिस परिवार’


एक बेबस मां, लाचार पिता, सुहाग खो चुकी पत्नी और अनाथ हो चुके मासूम बेटा-बेटी… यह उस जांबाज आरक्षक अभय कुमार पाण्डेय का परिवार है, जिसने समाज की रक्षा के लिए खाकी चुनी थी। आज इस पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
सबसे विडंबनापूर्ण और कड़वा सच यह है कि जो पुलिस विभाग पूरे जिले को सुरक्षा और न्याय देने का दावा करता है, आज वही ‘पुलिस परिवार’ अपने ही विभाग के दिवंगत स्टाफ को न्याय दिलाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
बिलखते परिजनों का तंत्र से एक ही तीखा सवाल है— “अगर एक पुलिसवाले के हत्यारे को पुलिस नहीं पकड़ सकती, तो आम जनता की सुरक्षा का दावा कैसे किया जा सकता है? क्या हमारे बेटे के खून की कोई कीमत नहीं थी?”


फाइलों में दफन हुई संवेदना; तकनीक और एकजुटता पर उठे सवाल


मृतक के पिता के अनुसार, जांच के नाम पर अब तक केवल कागजी घोड़े दौड़ाए गए हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगालने और चश्मदीदों से कड़ाई से पूछताछ करने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इस पूरे मामले में पुलिस के आला अधिकारियों की चुप्पी भी हैरान करने वाली है। जिस विभाग को अपने साथी की मौत पर सबसे ज्यादा आक्रामक होना चाहिए था, उसकी यह सुस्ती अपराधियों के हौसले बुलंद कर रही है।


इस ढर्रे ने व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:


तकनीक का क्या हुआ? शहर भर में लगे नाइट विजन और स्मार्ट सिटी के सीसीटीवी कैमरे क्या सिर्फ आम जनता का चालान काटने के लिए हैं? एक आरक्षक को कुचलने वाली गाड़ी गायब कैसे हो गई?
इच्छाशक्ति की कमी क्यों? अगर यही घटना किसी रसूखदार, नेता या बड़े अधिकारी के साथ हुई होती, तो क्या पुलिस अब तक हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती?

126 Days After a Colleagues Death Surajpur Police Remain Empty-Handed


सहकर्मियों की एकजुटता कहां है? अपने ही एक साथी के परिवार के आंसू क्या महकमे के बड़े अफसरों को नजर नहीं आ रहे?
उग्र आंदोलन की चेतावनी
मृतक आरक्षक के परिजनों और आक्रोशित नागरिकों ने अब साफ कर दिया है कि उन्हें खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। उन्होंने मामले की जांच किसी सक्षम और निष्पक्ष अधिकारी से कराने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि पुलिस विभाग अब भी कुंभकर्णी नींद से नहीं जागा और आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो यह मामला केवल एक दुर्घटना की जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह खाकी के रक्षकों के खिलाफ एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लेगा।

यह भी पढ़ें- आयुष विभाग द्वारा संचालित हो रहे चार राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम, जिलेवासियों को मिल रहा लाभ

Share This Article
Leave a Comment