आयुष विभाग द्वारा संचालित हो रहे चार राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम, जिलेवासियों को मिल रहा लाभ : Four National AYUSH Programs Being Operated by the AYUSH Department

Uday Diwakar
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Four National AYUSH Programs Being Operated by the AYUSH Department: सूरजपुर : कलेक्टर रेना जमील के निर्देशानुपालन में जिला सूरजपुर में आयुष विभाग द्वारा चार प्रमुख राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूली बच्चों, गर्भवती माताओं, नवजात शिशुओं, असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों एवं जोड़ों व मांसपेशियों संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों को आयुर्वेद पद्धति से चिकित्सा एवं देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन कार्यक्रमों का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाए तथा व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से जनसामान्य को आयुर्वेद पद्धति के प्रति जागरूक किया जाए।। राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम ‘आयुर्विद्या‘ के तहत स्कूली बच्चों में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता उत्पन्न करते हुए उनकी जीवनशैली में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच, योग के प्रति प्रशिक्षण एवं आयुर्वेद विषयक जागरूकता व्याख्यान पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही विद्यार्थियों को औषधीय उद्यान एवं आयुर्वेद चिकित्सालयों के भ्रमण की सुविधा भी दी जा रही है, जिससे उनमें आयुष पद्धति के प्रति रुचि उत्पन्न हो सके। वर्तमान में यह कार्यक्रम जिला मुख्यालय सूरजपुर के 25 किलोमीटर की परिधि में संचालित किया जा रहा है।


इसी प्रकार राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम ष्सुप्रजाष् के अंतर्गत गर्भवती माताओं की देखभाल, उचित गर्भिणीचर्या, नवजात एवं शिशु की देखभाल के साथ-साथ ए.एन.सी., पी.एन.सी. एवं गर्भ संस्कार के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इस कार्यक्रम के लिए जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजनगर तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बतरा, भटगांव एवं धरमपुर को अधिकृत किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेदिक पद्धति से माताओं एवं शिशुओं के स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना है, जिससे एक स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण हो सके। राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘‘कारूण्य-पैलिएटिव केयर‘‘ (प्रशामक देखभाल) एक ऐसा संवेदनशील दृष्टिकोण है, जो जीवन-घातक बीमारियों से जूझ रहे रोगियों एवं उनके परिजनों की शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक समस्याओं की प्रारंभिक पहचान कर उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है।

Four National AYUSH Programs Being Operated by the AYUSH Department

इस कार्यक्रम के तहत चिकित्सकों एवं कर्मचारियों की टीम द्वारा घर-घर जाकर असाध्य रोगियों का उपचार एवं देखभाल की जा रही है। अब तक जिले में 389 रोगियों का पंजीयन कर उन्हें निरंतर उपचार एवं देखभाल सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। यह कार्यक्रम मानवीय दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील एवं समाजोपयोगी सिद्ध हो रहा है तथा रोगियों के परिजनों के लिए भी एक बड़ा संबल बना है। वहीं ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर कार्यक्रम जोड़ों एवं मांसपेशियों संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों के लिए संचालित एक विशेष पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा उन्हें जोड़ों व मांसपेशियों की समस्याओं के प्रभावी प्रबंधन में सहायता प्रदान करना है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 4,261 लोगों की जांच कर उन्हें आयुर्वेद पद्धति से उपचार प्रदान किया जा चुका है। वर्तमान में यह कार्यक्रम जिले के विकासखंड सूरजपुर, प्रतापपुर, प्रेमनगर एवं ओड़गी में संचालित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इसका लाभ पहुंच रहा है।

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कलेक्टर, रेना जमील ने कहा कि आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा पद्धति की अमूल्य धरोहर है, जो रोगों के उपचार के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी बल देती है। इन चारों राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रमों के माध्यम से जिले के बच्चे, माताएं, बुजुर्ग एवं असाध्य रोगों से ग्रसित नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि वे इन कार्यक्रमों का अधिकाधिक लाभ उठाएं तथा स्वस्थ एवं सुखमय जीवन की ओर अग्रसर हों। उल्लेखनीय है कि जिला आयुष विभाग द्वारा निरंतर शिविरों, जन-जागरूकता अभियानों एवं घर-घर पहुंच सेवाओं के माध्यम से इन कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

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