Sarguja-Udaipur: Groundbreaking Ceremony Held for 4 PMGSY Roads Worth ₹14.64 Crore: सरगुजा:अंबिकापुर/ उदयपुर (13 मई 2026): छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के उदयपुर ब्लॉक में विकास की नई इबारत लिखी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत उन्होंने चार महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का विधिवत भूमिपूजन किया। कुल 14.64 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली ये सड़कें क्षेत्र के दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों के लिए जीवनरेखा साबित होंगी। लंबे समय से पक्की सड़कों के अभाव में मुख्यधारा से कटे ये गांव अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
मंत्री अग्रवाल ने भूमिपूजन के अवसर पर कहा, “ये परियोजनाएं केवल डामर की सड़कें नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों के उज्ज्वल भविष्य के द्वार हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि कनेक्टिविटी के बिना विकास अधूरा है। सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल जिले में जहां जंगलों और पहाड़ियों का बोलबाला है, वहां सड़कें न केवल यातायात का साधन होंगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर भी लेकर आएंगी। इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक, जिला पंचायत सदस्य, सरपंच और सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
चार सड़क परियोजना
PMGSY के तहत शुरू होने वाली इन चार सड़कों की कुल लंबाई लगभग 25 किलोमीटर है। इनमें से पहली सड़क उदयपुर ब्लॉक के ग्राम कुक्षी से मनेंदा तक 6.5 किलोमीटर लंबी होगी, जिसकी लागत 4.2 करोड़ रुपये है। यह सड़क 200 से अधिक परिवारों को लाभ पहुंचाएगी, जो अब तक पैदल या बैलगाड़ी पर निर्भर थे। दूसरी परियोजना मनेंदा से घुरदंगी तक 5.8 किलोमीटर की सड़क है, लागत 3.8 करोड़ रुपये। तीसरी सड़क घुरदंगी से पुसौली तक 7.2 किलोमीटर लंबी बनेगी, जिस पर 4.1 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चौथी और अंतिम सड़क पुसौली से कोटाबाड़ी तक 5.5 किलोमीटर की होगी, लागत 2.54 करोड़ रुपये।
ये सड़कें डबल लेन वाली होंगी, जिनमें ड्रेनेज सिस्टम, कंधे और सुरक्षा दीवारें शामिल होंगी। निर्माण कार्य छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (CGRRDA) की देखरेख में होगा। अनुमान है कि ये सड़कें अगले 18 महीनों में पूरी हो जाएंगी। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुणवत्ता पर कोई समझौता न हो और समयसीमा का सख्ती से पालन किया जाए।
सरगुजा जिला छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जिला है, जो 25 आदिवासी ब्लॉकों वाला क्षेत्र है। उदयपुर ब्लॉक में करीब 150 से अधिक गांव हैं, जिनमें से 40 प्रतिशत अभी भी पक्की सड़क से वंचित हैं। मानसून के दौरान कीचड़ भरी कच्ची सड़कें और जंगली इलाके ग्रामीणों के लिए अभिशाप साबित होते हैं। बीते वर्षों में कई घटनाएं घटीं जब गर्भवती महिलाएं या मरीज पैदल या डोली में अस्पताल ले जाए गए। स्थानीय सरपंच रामेश्वर साहू ने बताया, “हमारे गांव में स्कूल है, लेकिन शिक्षक आने में हिचकते हैं। सड़क बनने से बच्चे पढ़ाई में बेहतर करेंगे।”
जिला कलेक्टर ने बताया कि PMGSY के तहत सरगुजा में अब तक 1200 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं, लेकिन उदयपुर जैसे दुर्गम इलाकों में अभी भी चुनौतियां बाकी हैं। इन नई सड़कों से न केवल 5000 से अधिक ग्रामीण लाभान्वित होंगे, बल्कि वन उत्पादों का बाजार तक आसान पहुंच संभव होगी। आदिवासी समुदाय के लोग महुआ, तेंदू पत्ता और अन्य जंगली फलों को अब बेहतर दाम पर बेच सकेंगे।
Sarguja-Udaipur: Groundbreaking Ceremony Held for 4 PMGSY Roads Worth ₹14.64 Crore
भूमिपूजन के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ हर गांव को सड़क, बिजली और पानी से जोड़ रहा है।” अग्रवाल ने पर्यटन विभाग की योजनाओं का भी जिक्र किया। सरगुजा के प्राकृतिक सौंदर्य और रामगढ़ झरनों को जोड़ने वाली ये सड़कें पर्यटकों को आकर्षित करेंगी। “संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देकर हम स्थानीय युवाओं को रोजगार देंगे,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में स्थानीय विधायक ने सराहना की और कहा कि यह कदम आदिवासी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक है। ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों से स्वागत किया, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।
इन सड़कों से शिक्षा क्षेत्र में क्रांति आएगी। उदयपुर ब्लॉक के 20 प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ेगी, क्योंकि शिक्षक नियमित पहुंच सकेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा—नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक मरीजों का आवागमन आसान हो जाएगा। आर्थिक रूप से, ये सड़कें किसानों को बाजार से जोड़ेंगी। स्थानीय किसान धान, मक्का और सब्जियों का उत्पादन बढ़ा सकेंगे।
जिला प्रशासन ने बताया कि PMGSY के अलावा, नरवा, गरवा, घुरवा, बारी (NGGB) योजना के तहत भी उदयपुर में तालाब निर्माण और वन संरक्षण पर काम चल रहा है। भविष्य में 10 और सड़क परियोजनाओं का प्रस्ताव है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क निर्माण में वन संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि जैव विविधता प्रभावित न हो।
स्थानीय निवासी मीरा बाई ने कहा, “अब बेटी की शादी में रिश्तेदार आ सकेंगे।” युवा किसान रवि ने बताया, “सड़क से हमारा उत्पाद बाजार पहुंचेगा, दाम दोगुना मिलेगा।” सरपंचों ने एकमत से कहा कि यह विकास का महायज्ञ है।
यह परियोजना छत्तीसगढ़ सरकार की ‘हर गांव, हर सड़क’ संकल्पना को मजबूत करती है। सरगुजा जैसे पिछड़े क्षेत्रों में कनेक्टिविटी से नई उम्मीदें जगी हैं। आने वाले दिनों में उदयपुर ब्लॉक विकास के मानचित्र पर चमकेगा।
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