Sarguja Gangrape: Congress Stages Gherao of CMHO Office Demands Dismissal of Accused Doctor: सरगुजा:अंबिकापुर:8 मई 2026: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में नाबालिग आदिवासी बच्चियों के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। सीतापुर थाना क्षेत्र में हुई इस घटना में आरोपी डॉक्टर द्वारा गलत मेडिकल रिपोर्ट देने के आरोप लगे हैं, जिसके चलते जिला कांग्रेस ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय का जोरदार घेराव किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोपी चिकित्सक की तत्काल बर्खास्तगी और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। सीएमएचओ ने 3 दिनों में एक्शन का लिखित आश्वासन दिया, तो प्रदर्शनकारी शांत हुए, लेकिन चेतावनी दी कि कार्रवाई न होने पर आंदोलन तेज होगा।
सरगुजा के सीतापुर थाना क्षेत्र में हाल ही में दो नाबालिग आदिवासी बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार की वारदात सामने आई। आरोपी, जो स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली बताए जा रहे हैं, ने बच्चियों को शिकार बनाया। पीड़ित परिवारों ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज तो की, लेकिन जांच में लापरवाही बरती। सबसे गंभीर आरोप स्वास्थ्य विभाग पर लगा, जहां मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टर ने गलत रिपोर्ट तैयार की। एमएलसी (मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट) में चोटों और बलात्कार के स्पष्ट प्रमाणों को छिपाने का इल्जाम है, जिससे आरोपी बच सकते थे।
ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासी बहुल सरगुजा में ऐसी घटनाएं महिलाओं और बच्चों के लिए खतरा बन गई हैं। “हमारी बेटियां जंगल जाते ही खतरे में पड़ जाती हैं। पुलिस और डॉक्टर मिले हुए हैं,” एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने गुस्से में कहा। यह मामला बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में है, और सोशल मीडिया पर #JusticeForSurgujaGirls ट्रेंड कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार का ‘सुशासन’ नाबालिगों की सुरक्षा में नाकाम साबित हो रहा है।
कांग्रेस का आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन: सीएमएचओ दफ्तर पर धरना
गुरुवार को जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अंबिकापुर में सीएमएचओ कार्यालय का घेराव किया। जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने नेतृत्व किया, जबकि सीतापुर विधानसभा के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी मौजूद रहे। कोठीघर से रैली निकालकर कार्यकर्ता नारों के साथ सीएमएचओ पहुंचे: “सुशासन नहीं, दुशासन है!”, “आरोपी डॉक्टर बर्खास्त करो!”, “नाबालिगों का न्याय दो!”।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार, स्थानीय विधायक और स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा, “नाबालिग आदिवासी बच्चियों जैसे संवेदनशील मामले में गलत मेडिकल रिपोर्ट देना अपराध है। इससे न्याय प्रक्रिया बाधित हुई। बीएमओ को तत्काल बर्खास्त किया जाए।” जिला अध्यक्ष पाठक ने चेतावनी दी, “पुलिस और डॉक्टर आरोपी बचाने में जुटे हैं। अगर 3 दिनों में कार्रवाई न हुई, तो statewide आंदोलन छेड़ेंगे।” कार्यक्रम में जिला-ब्लॉक कार्यकारिणी सदस्य, मोर्चा संगठन, मंडल अध्यक्ष और बूथ कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।
सीएमएचओ ने ज्ञापन स्वीकार किया और लिखित में आश्वासन दिया कि 3 दिनों में दोषी चिकित्सक के खिलाफ विभागीय जांच पूरी कर कार्रवाई होगी। इसके बाद कांग्रेस ने घेराव समाप्त किया, लेकिन निगरानी रखने का ऐलान किया।
सुशासन पर सवाल
यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ की सियासत में गरमा गया है। कांग्रेस इसे भाजपा सरकार की नाकामी बता रही है, खासकर विष्णु देव साय के ‘सुशासन’ मॉडल पर। विपक्ष का कहना है कि सरगुजा जैसे आदिवासी इलाकों में अपराध बढ़ रहे हैं, और प्रशासन संरक्षण दे रहा। भाजपा ने अभी तक चुप्पी साधी है, लेकिन स्थानीय नेता कार्रवाई का दावा कर रहे। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा, “कानून अपना काम करेगा, राजनीति न करें।”
पिछले साल सरगुजा में इसी तरह के मामलों में पुलिस पर रिश्वत लेने के आरोप लगे थे, जहां आईजी दीपक झा ने एएसआई को लाइन अटैच किया था। स्वास्थ्य विभाग पर भी सवाल उठे, जैसे तालाब डूबने के केस में डॉक्टरों का पैसे मांगना। यह घटना उन विवादों को ताजा कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में पुलिस-स्वास्थ्य तंत्र की कमजोरी से न्याय प्रभावित हो रहा।
Sarguja Gangrape: Congress Stages Gherao of CMHO Office Demands Dismissal of Accused Doctor
पीड़ित बच्चियों का परिवार सदमे में है। “डॉक्टर ने रिपोर्ट गलत बनाई, आरोपी खुले घूम रहे। हमारी बेटी का भविष्य बर्बाद हो गया,” मां ने रोते हुए कहा। एनजीओ ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की योजना बनाई। सरगुजा में आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार के आंकड़े डराने वाले हैं—पिछले साल 200 से ज्यादा बलात्कार केस दर्ज। यह घटना जागरूकता फैला रही, ग्रामीण महिलाएं सड़कों पर उतर आईं।
सीएमएचओ ने कहा, “हम जांच कर रहे। गलत रिपोर्ट साबित हुई तो बर्खास्तगी होगी।” पुलिस ने आरोपी बनाम दर्ज कर जांच तेज की। राज्य सरकार ने विशेष जांच टीम गठित करने का संकेत दिया। कांग्रेस ने हाईकमान को सूचित किया, statewide प्रदर्शन की धमकी दी।
यह मामला न केवल न्याय की लड़ाई है, बल्कि आदिवासी समाज की सुरक्षा का सवाल। अगर डॉक्टर बर्खास्त हुए, तो सुशासन को झटका लगेगा। ग्रामीण उम्मीद कर रहे कि बच्चियों को न्याय मिले, और दोषी सजा पाएं। सरगुजा की सड़कों पर आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा।
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