संकल्प हॉस्पिटल अंबिकापुर: जनरेटर में दुपट्टा फंसने से महिला गार्ड अनिषा तिग्गा की दर्दनाक मौत, 9 लाख में सुलझा मामला : Scarf Gets Entangled in Generator in Sankalp Hospital

Uday Diwakar
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Scarf Gets Entangled in Generator in Sankalp Hospital: सरगुजा:​​​अंबिकापुर:   अंबिकापुर के संकल्प हॉस्पिटल में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। सुरक्षा गार्ड अनिषा तिग्गा की ड्यूटी के दौरान जनरेटर हादसे में मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों का आक्रोश भड़क उठा।

दर्रीपारा स्थित संकल्प हॉस्पिटल में 26 वर्षीय अनिषा तिग्गा (पति अमित तिग्गा) सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत थीं। दोपहर में अचानक मौसम बिगड़ गया। आंधी-बारिश के बीच बिजली चली गई, तो अनिषा जनरेटर में डीजल लेवल चेक करने पहुंचीं।

उनके गले में लिपटा दुपट्टा तेज रफ्तार से घूमते जनरेटर के पंखे में फंस गया। वे संभल पातीं, इससे पहले पंखे के घुमाव में उलझकर जमीन पर अनियंत्रित तरीके से गिरीं। सिर में गंभीर चोटें लगीं, और चीखें गूंज उठीं। अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने शोर सुनकर उन्हें तुरंत भर्ती किया।

इलाज और मौत

अनिषा को संकल्प हॉस्पिटल के ही आपातकालीन वार्ड में भर्ती किया गया। उनकी हालत नाजुक बनी रही। लगातार उपचार के बावजूद दोपहर करीब 3 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी।

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मृत्यु के बाद मणिपुर थाना पुलिस ने जांच शुरू की। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन पर गैर इरादतन हत्या (IPC धारा 304A) का मामला दर्ज हो सकता है, क्योंकि ड्यूटी के दौरान लापरवाही से मौत हुई।

5 मई को पोस्टमॉर्टम के बाद शव सौंपा गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मुआवजे की मांग की, लेकिन शुरुआत में इनकार मिला। गुस्साए परिजनों ने शव को हॉस्पिटल के सामने मुख्य सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। मेडिकल कॉलेज रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

परिजनों का आरोप था कि अस्पताल ने ड्यूटी के दौरान हुई मौत पर उचित मुआवजा नहीं दिया। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोग भी इकट्ठा हो गए, और मामला तूल पकड़ लिया। पुलिस ने समझाइश कर प्रदर्शन समाप्त कराया।

Scarf Gets Entangled in Generator in Sankalp Hospital

प्रदर्शन के दबाव में अस्पताल प्रबंधन ने बातचीत की। अंततः 9 लाख रुपये के मुआवजे पर सहमति बनी। प्रबंधन ने अतिरिक्त सहायता के वादे किए: परिवार के एक सदस्य को योग्यता आधार पर नौकरी, मृतका की बेटी की पढ़ाई के लिए संकल्प फाउंडेशन से मदद, और भविष्य में बच्ची को रोजगार का अवसर।

यह समझौता परिजनों और प्रबंधन के बीच लिखित रूप में हुआ, जिससे मामला शांत हो गया। हालांकि, पुलिस जांच जारी है।

संकल्प हॉस्पिटल अंबिकापुर का जाना-माना निजी अस्पताल है, जो ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू सुविधाओं के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इसका विवादों से पुराना नाता रहा है। पहले भी प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत पर लापरवाही के आरोप लगे हैं। परिजनों ने गलत इलाज का दावा किया था।

वकील संजय अबष्ट जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में प्रबंधन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जनरेटर जैसे उपकरणों पर सुरक्षा मानकों का पालन न होने से हादसे होते हैं।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी?

यह घटना अस्पतालों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी उजागर करती है। जनरेटर क्षेत्र में दुपट्टा या ढीले कपड़े पहनने पर प्रतिबंध, चेतावनी संकेतक, और नियमित जांच जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। छत्तीसगढ़ में ऐसे कई हादसे हुए हैं, जहां लापरवाही घातक साबित हुई।

स्थानीय सोशल मीडिया पर घटना वायरल हो गई। लोग अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की निंदा कर रहे हैं। महिला सुरक्षा गार्ड की मौत ने निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। सरगुजा जिले के निवासियों ने स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग की है।

अनिषा तिग्गा की मौत एक सबक है कि कार्यस्थल सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। 9 लाख के समझौते से परिवार को कुछ राहत मिली, लेकिन खोई जिंदगी वापस नहीं आ सकती। पुलिस जांच पूरी होने पर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अंबिकापुर जैसे शहरों में निजी अस्पतालों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

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