Mainpat: Bulldozer Demolishes Widow’s Home: सरगुजा:अंबिकापुर:सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र में प्रशासन द्वारा एक आदिवासी विधवा महिला के घर पर बुलडोजर चलाने की घटना ने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया है। रोपाखार गांव में शासकीय भूमि पर बने विधवा के मकान को ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई से आहत उसकी भाई, भाजपा मंडल महामंत्री गौतम पैकरा ने पार्टी के मंडल महामंत्री पद, सक्रिय सदस्यता और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए त्यागपत्र मैनपाट भाजपा मंडल अध्यक्ष को सौंपा, जिसकी प्रतिलिपियां प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव, संगठन महामंत्री पवन साय और जिला अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया को भी भेजीं।
घटना की पृष्ठभूमि में खसरा नंबर 853 की 0.002 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर विधवा का मकान था, जिसका उसे वन अधिकार पत्र मिल चुका था। हालांकि, त्रुटि से खसरा 754 का पत्र जारी हो गया। विधवा ने सरगुजा कलेक्टर को सुधार के लिए आवेदन दिया था, लेकिन अंबिकापुर के आयुष गर्ग की शिकायत पर तहसील मैनपाट ने इसे अवैध अतिक्रमण मानकर बुलडोजर चला दिया। पैकरा ने पत्र में लिखा, “1992 से परिवार ने पार्टी के लिए निष्ठा से काम किया, मुख्यमंत्री भी हमारी जाति के हैं, फिर भी कोई सहयोग नहीं मिला।” विधवा ने कहा कि मैनपाट में कई अवैध निर्माण हैं, लेकिन चुनिंदा कार्रवाई हो रही है।
भाजपा नेता के इस्तीफे ने स्थानीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। पैकरा ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में गरीब आदिवासी विधवा को निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर त्यागपत्र वायरल होने से पार्टी में असहजता फैल गई। जिला अध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि इस्तीफा नकली है और किसी ने फर्जी पत्र बनाकर वायरल किया। उन्होंने कहा, “मकान टूटना सही है, लेकिन कोई आधिकारिक इस्तीफा नहीं मिला। जांच होगी।” हालांकि, पैकरा के समर्थक इसे सच्चाई बता रहे हैं, जिससे मंडल स्तर पर नाराजगी बढ़ रही है।
यह घटना सरगुजा में बुलडोजर कार्रवाइयों की कड़ी का हिस्सा लगती है। मार्च 2026 में अंबिकापुर के गंगापुर में 37 अवैध मकानों पर ऐसी ही कार्रवाई हुई थी, जहां महिलाएं रोतीं दिखीं। स्थानीय लोग प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे भाजपा सरकार का “अत्याचार” करार दिया, जबकि प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाना कानूनी है। आदिवासी संगठन भी विधवा के समर्थन में उतर आए हैं।
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रोपाखार की विधवा, पति की मौत के बाद परिवार चलाने के लिए संघर्षरत, अब खुले आसमान तले है। उसने बताया, “पति की मृत्यु के बाद वन अधिकार मिला था, लेकिन एक शिकायत पर सब उजड़ गया।” पैकरा परिवार ने वर्षों पार्टी के लिए कार्य किया, लेकिन इस संकट में कोई साथ नहीं मिला। प्रशासन के अनुसार, शिकायत पर जांच हुई और अतिक्रमण साबित होने पर कार्रवाई जरूरी थी। तहसीलदार ने कहा कि सुधार आवेदन लंबित था, लेकिन अतिक्रमण नियमों का उल्लंघन था। आयुष गर्ग की भूमि से सटी होने के कारण शिकायत दर्ज हुई।
वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत पट्टे पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। पैकरा ने चेतावनी दी कि यदि न्याय न मिला तो आंदोलन करेंगे। यह मामला सरगुजा की आदिवासी राजनीति को प्रभावित कर सकता है, जहां अतिक्रमण हटाओ अभियान तेज है। स्थानीय विधायक ने जांच का आश्वासन दिया है।
यह घटना भाजपा की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है। यदि इस्तीफा सत्यापित हुआ तो अन्य कार्यकर्ता नाराज हो सकते हैं। प्रशासन को अब पारदर्शिता दिखानी होगी। विधवा के लिए पुनर्वास की मांग तेज हो रही है। सरगुजा में बुलडोजर कार्रवाइयों से प्रभावित परिवारों की संख्या 100 से अधिक है। राजनीतिक दल इसे चुनावी मुद्दा बना सकते हैं। पैकरा परिवार न्याय की लड़ाई जारी रखेगा। यह आदिवासी क्षेत्र में प्रशासन-राजनीति संबंधों की पड़ताल कराता है।
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