A 13-year-old boy in Namanakala died of jaundice: सरगुजा:अंबिकापुर।अंबिकापुर शहर के नमनाकला खटिकपारा क्षेत्र से एक ऐसी दुखद खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। यहां 13 वर्षीय छात्र दिव्यांश राय की पीलिया से मौत हो गई। उसकी तबीयत खराब होने के बाद परिजनों ने उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः दम तोड़ दिया।
इस घटना ने प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। शहर में पीलिया के बढ़ते मामलों के बीच यह पहली मौत दर्ज की गई है। इससे पहले नवागढ़ और घुटरापारा क्षेत्रों में भी पीलिया के कई मरीज सामने आ चुके थे, जिससे हड़कंप मच गया था। अब तक शहर भर में 50 से अधिक लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता दिखाते हुए जांच शिविर लगाए हैं, जहां सैकड़ों लोगों के सैंपल एकत्र किए जा रहे हैं।
नमनाकला खटिकपारा में रहने वाले दिव्यांश राय एक सामान्य परिवार से थे। अचानक उसके पेट में दर्द शुरू हो गया और उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी। शुरू में परिजनों ने घरेलू उपचार आजमाया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद पीलिया की आशंका जताई और उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार, कुछ दिनों की जद्दोजहद के बाद उसकी मौत हो गई।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। दिव्यांश अपने माता-पिता का इकलौता संतान था। पिता मजदूरी करते हैं, जबकि मां घर संभालती हैं। मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई है। पड़ोसियों ने बताया कि इलाके में हाल ही में कई लोग बीमार पड़े हैं, जिनमें बच्चों की संख्या अधिक है। पानी की खराब गुणवत्ता और गंदगी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
पीलिया, जिसे हेपेटाइटिस ए भी कहा जाता है, मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन से फैलता है। अंबिकापुर शहर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच सीवरेज सिस्टम की लापरवाही और अनियमित सफाई ने इस बीमारी को महामारी का रूप दे दिया है। नवागढ़ क्षेत्र में पिछले हफ्ते 15 मरीज मिले, जबकि घुटरापारा में 10 से अधिक लोग प्रभावित हुए। नमनाकला में ही 20 के करीब मामले दर्ज हो चुके हैं। कुल 50 संक्रमितों में से अधिकांश युवा और बच्चे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गंदे पानी में मौजूद वायरस लीवर को प्रभावित करता है, जिससे पीलिया होता है। लक्षणों में पेट दर्द, उल्टी, बुखार, पेशाब का पीला होना और आंखों का सफेद भाग पीला पड़ना शामिल है। यदि समय पर इलाज न हो तो यह जानलेवा साबित हो सकता है, जैसा कि दिव्यांश के मामले में हुआ। सरगुजा जिले में पहले भी पीलिया के प्रकोप ने प्रशासन को हिलाकर रख दिया था।
A 13-year-old boy in Namanakala died of jaundice
मौत की खबर फैलते ही कलेक्टर ने तुरंत बैठक बुलाई। सीएमएचओ ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष जांच शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम ने नमनाकला, नवागढ़ और घुटरापारा में क्लोरीन टैबलेट बांटना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य टीमों को घर-घर जाकर सैंपल लेने और जागरूकता फैलाने का काम सौंपा गया है।
कलेक्टर ने कहा, “हम स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कदम उठा रहे हैं। पानी की गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल भेजे गए हैं।” नगर निगम आयुक्त ने सीवर लाइन की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने की योजना बनाई है। साथ ही, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। अब तक 200 से अधिक सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं, जिनकी रिपोर्ट आने वाली है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से स्वच्छ पानी उबालकर पीने, हाथ धोने और साफ भोजन करने की अपील की है। डॉक्टरों का कहना है कि पीलिया से बचाव का सबसे अच्छा तरीका स्वच्छता है। फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोएं, कच्चा भोजन न खाएं और बच्चों को साफ पानी पिलाएं। वैक्सीनेशन कैंप भी लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय निवासी रमेश कहते हैं, “पानी की सप्लाई में गंदगी आ रही है। नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।” एक अन्य महिला ने बताया, “हमारे मोहल्ले में कई बच्चे बीमार हैं। तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”
यह घटना सरगुजा प्रमखंड के लिए है। अंबिकापुर जैसे विकासशील शहर में बुनियादी सुविधाओं की कमी घातक साबित हो रही है। यदि समय रहते कदम न उठाए गए तो प्रकोप और फैल सकता है। प्रशासन को लंबे समय के उपाय जैसे स्वच्छ भारत अभियान को मजबूत करना होगा। जागरूकता ही एकमात्र हथियार है।
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