Surguja Collector issued extensive transfer orders for 58 Patwaris: सरगुजा:अंबिकापुर।सरगुजा जिले के कलेक्टर अजीत वसंत ने प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने और राजस्व कार्यों के बेहतर संपादन के उद्देश्य से एक बार फिर पटवारियों के व्यापक तबादले का आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात 58 हल्का पटवारियों को विभिन्न तहसीलों—अंबिकापुर, लखनपुर, लुण्ड्रा (धौरपुर), सीतापुर, मैनपाट, दरिमा, उदयपुर और बतौली—में आगामी आदेश तक पदस्थापित किया गया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता एवं भू-अभिलेख नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप पूरी की गई है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह स्थानांतरण लंबे समय से पदस्थ पटवारियों के कार्यों में प्रभावशीलता लाने, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और लोकहित को ध्यान में रखते हुए किया गया है। सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल जिले में राजस्व कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है, जहां भूमि विवाद, नामांतरण, सीमांकन और भू-अभिलेख अद्यतन जैसे मुद्दे आम हैं। कलेक्टर के इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व सेवाओं की गति और पारदर्शिता में वृद्धि की उम्मीद है।
पिछले कुछ दिनों में सरगुजा प्रशासन सक्रिय मोड में दिखा है। 83 पटवारियों के तबादले का आदेश जारी हो चुका था, जिसमें शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण इलाकों में स्थानांतरण पर जोर दिया गया था। अब 58 पटवारियों का यह दूसरा चरणीय तबादला जिला राजस्व तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कुल 141 पटवारियों के स्थानांतरण से प्रशासनिक फेरबदल का बड़ा संदेश गया है।
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी संबंधित पटवारियों को 24 फरवरी 2026 की अपरान्ह स्थिति तक अपने पुराने पदस्थापना स्थल पर एकतरफा भारमुक्त हो जाना है। साथ ही, उसी समय तक नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। जिला भू-अभिलेख शाखा ने सभी तहसीलदारों और राजस्व अधिकारियों को आदेश का त्वरित अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देशित किया है।
यह स्थानांतरण छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के नियम 7(2) और राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों पर आधारित है। इन नियमों के तहत दो वर्ष से अधिक समय तक एक ही हल्के में पदस्थ पटवारियों का स्थानांतरण अनिवार्य माना जाता है, ताकि भ्रष्टाचार की आशंका कम हो और कार्य निष्पादन बेहतर हो। सरगुजा जिले में 20 से अधिक तहसीलें हैं, जहां सैकड़ों पटवारी हल्के कार्यरत हैं।
तबादला आदेश में अंबिकापुर की मुख्य तहसील के अलावा लखनपुर, लुण्ड्रा (धौरपुर), सीतापुर, मैनपाट, दरिमा, उदयपुर और बतौली जैसे ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इन तहसीलों में भूमि रिकॉर्ड कंप्यूटरीकरण, ड्रोन मैपिंग और भू-उपयोग प्रमाण-पत्र जैसे आधुनिक कार्य तेजी से चल रहे हैं। नए पटवारियों की तैनाती से इन कार्यों में तेजी आएगी। उदाहरणस्वरूप, मैनपाट और बतौली जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सीमांकन कार्यों में देरी की शिकायतें आम थीं, जो अब दूर होंगी।
स्थानीय पटवार संघ ने इस आदेश का स्वागत किया है, लेकिन कुछ पटवारियों ने निजी पारिवारिक कारणों से छूट की मांग की है। प्रशासन ने स्पष्ट कहा है कि केवल विशेष मामलों में ही छूट दी जा सकती है।
Surguja Collector issued extensive transfer orders for 58 Patwaris
कलेक्टर अजीत वसंत के नेतृत्व में सरगुजा प्रशासन पिछले कुछ महीनों से राजस्व सुधारों पर जोर दे रहा है। हाल ही में भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण, राजस्व न्यायालयों के निपटान और किसान पोर्टल पर नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे कदम उठाए गए हैं। पटवारियों के लगातार तबादलों से क्षेत्रीय पक्षपात की आशंका कम होगी और जनता को त्वरित सेवाएं मिलेंगी।
जिले के निवासियों ने इस पहल का समर्थन किया है। एक स्थानीय किसान ने बताया, “पटवारी बदलने से काम जल्दी होता है, पुराने लोग रिश्वत मांगते थे।” इसी तरह, ग्रामीण महिलाओं ने भूमि दस्तावेज सुधार में पारदर्शिता की सराहना की। प्रशासन का लक्ष्य है कि 2026-27 तक सभी भू-अभिलेख पूर्णतः डिजिटल हो जाएं।
यह तबादला श्रृंखला सरगुजा को राजस्व प्रशासन के मामले में आदर्श जिला बनाने की दिशा में है। हालांकि, नए स्थानों पर पटवारियों को स्थानीय भाषा, भौगोलिक चुनौतियों और जनजातीय रीति-रिवाजों से परिचित होने में समय लगेगा। प्रशासन ने इनके लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की योजना बनाई है।
कुल मिलाकर, 58 पटवारियों का यह तबादला सरगुजा जिले में प्रशासनिक सक्रियता का प्रतीक है। इससे न केवल कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि आम जनता को भी लाभ मिलेगा। जिला प्रशासन अपेक्षा कर रहा है कि राजस्व कार्यों में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होगी।
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