छत्तीसगढ़ के प्रतापपुर विधायक शकुंतला पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र की सत्यता जांच के लिए नई हलचल : New stir to verify caste certificate of Pratappur MLA Shakuntala Porte of Chhattisgarh

Uday Diwakar
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New stir to verify caste certificate of Pratappur MLA Shakuntala Porte of Chhattisgarh: प्रतापपुर : बलरामपुर:​छत्तीसगढ़ के प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाण पत्र हाल ही में एक विवाद का केंद्र बन गया है। उन्हें फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाने और इसके आधार पर आदिवासी आबादी के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। मामला तब सुर्खियों में आया जब आदिवासी समाज के एक वर्ग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाए कि विधायक ने जाति प्रमाण पत्र पिता पक्ष से बनवाने की परंपरा को नज़रअंदाज़ करते हुए, पति पक्ष के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनवाया है, जो कि कानूनन गलत है। इस आधार पर उनकी जाति प्रमाण पत्र की सत्यता पर सवाल उठाए गए।

इस विवाद की जांच उच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में हो रही है। छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय ने बिलासपुर में इस मामले की सुनवाई के दौरान 17 जून 2025 को जिला स्तरीय और उच्च स्तरीय छानबीन समितियों को तत्काल जांच का निर्देश दिया। इसके बाद जिला कलेक्टर ने शकुंतला पोर्ते को नोटिस जारी कर कहा है कि वे 27 नवंबर 2025 को जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष सभी मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित हों।

जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने इस मामले में कड़ी जांच के लिए कई बार विधायक को नोटिस भेजा है, जिसमें उन्होंने जाति प्रमाण पत्र से जुड़े दस्तावेजों और अभिलेखों की मूल प्रति प्रस्तुत करने को कहा है। इस जांच की पृष्ठभूमि में आदिवासी समाज की ओर से दाखिल याचिका भी है, जिसमें जयश्री सिंह पुसाम नामक व्यक्ति ने बिलासपुर उच्च न्यायालय में शिकायत की थी कि विधायक का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है।

इससे पहले छत्तीसगढ़ की राजनीति में जाति प्रमाण पत्र पर विवाद कोई नया विषय नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके परिवार के ऊपर भी ऐसी ही जाति प्रमाण पत्र की जांच हो चुकी है, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। ऐसे मामलों का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव गहरा होता है और यह जाति आधारित आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की संवेदनशीलता को उजागर करता है।

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इस मामले में एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक हलचल छिड़ चुकी है। प्रतापपुर और बलरामपुर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है कि जाति प्रमाण पत्र की असलियत क्या है। आदिवासी और गैर-आदिवासी दोनों समुदायों के बीच बहस जारी है। संबंधित अधिकारियों और जांच समिति की प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है क्योंकि इस प्रकार के मामले अक्सर चुनावी परिणामों और राजनीतिक करियर को प्रभावित कर सकते हैं।

विधायक शकुंतला पोर्ते अपनी पार्टी भाजपा के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में देखी जाती हैं, और ऐसे विवाद पार्टी के लिए भी चिंता का विषय बन सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद उच्च न्यायालय को रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य है, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई संभव है। अगर जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं तो न केवल विधायक का निर्वाचन मान्य नहीं माना जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

इस विवाद के चलते स्थानीय प्रशासन, न्यायपालिका और राजनीतिक दलों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण मामला बन गया है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण छाप छोड़ सकता है। समाज और राजनीतिक नेतृत्व को इस मामले में सच के पक्ष में रहकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी होगी ताकि सामाजिक संतुलन और कानून का सम्मान बना रहे।

New stir to verify caste certificate of Pratappur MLA Shakuntala Porte of Chhattisgarh

यह पूरा विवाद जाति आधारित आरक्षण नीतियों की संवेदनशीलता और प्रमाण पत्र सत्यापन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है, जो भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती हैं।

छत्तीसगढ़ के प्रतापपुर की विधायक शकुंतला पोर्ते के जाति प्रमाण पत्र की जांच कलेक्टर द्वारा जारी नोटिस, उच्च न्यायालय के आदेश और जिला स्तरीय सत्यापन समिति की सुनवाई के तहत हो रही है, जो 27 नवंबर 2025 को होने वाली है, और इसका व्यापक राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक प्रभाव देखने को मिलेगा।

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