11 juvenile delinquents escape from Ambikapurs juvenile observation home: सरगुजा:अंबिकापुर (24 June 2026):अंबिकापुर के बाल संप्रेक्षण गृह से रात को 11 अपचारी बालक फरार हो गए। तेज बारिश और उस रात बिजली गुल रहने की स्थिति का फायदा उठाकर हुए इस भागने की घटना ने विभागीय और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर व्यापक चिंता पैदा कर दी है। घटना का पूरा पता गृह के कर्मचारियों द्वारा सुबह गिनती करने पर चला, जब बच्चों की कमी नोटिस की गई और तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार यह घटना रात करीब 10:30 बजे से 12:00 बजे के बीच हुई। उस दौरान इलाके में तीव्र वर्षा हो रही थी और कई हिस्सों में विद्युत सेवाएँ बाधित थीं। गृह के प्रभारी ने बताया कि सुरक्षा दल मौजूद था, पर बिजली कटने के कारण सीसीटीवी कैमरों और कुछ इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरणों का संचालन प्रभावित हुआ था। प्रभारी ने कहा कि परिस्थितियाँ अचानक बिगड़ीं और मानवीय-तकनीकी कमजोरियों के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर चली गई।
गृह प्रशासन की दलीलों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। प्रशासन ने माना कि संस्थान में सीसीटीवी नेटवर्क था, पर कुछ कैमरे खराब थे और बैकअप पावर पर्याप्त नहीं थी। कर्मचारियों की संख्या, शिफ्ट रोटेशन और रात के समय निगरानी की सख्ती पर भी पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई जा रही है। कुछ कर्मचारियों ने स्वयं सुरक्षा सामर्थ्य की कमी की ओर संकेत किया है, जिससे रात में निगरानी कमजोर रह जाती है।
स्थानीय पुलिस ने मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए फरार बच्चों की खोजबीन तेज कर दी है। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे संभावित मार्गों की जाँच शुरू कर दी है। अधिकारी आशंका जता रहे हैं कि बच्चों ने अंधकार व बारिश का फायदा उठाकर नजदीकी मार्गों से निकलने की कोशिश की होगी, जबकि किसी बाहरी सहयोग की संभावना की भी पड़ताल की जा रही है। थाना इंचार्ज ने बताया कि गृह के कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है और क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है।
घटना के बाद स्थानीय समुदाय और परिजन गहरे चिंतित और आक्रोशित हैं। कई नागरिकों ने आरोप लगाए कि संवेदनशील संस्थान की सुरक्षा इतनी कमजोर कैसे रह सकती है और रिहैबिलिटेशन तथा सुरक्षा दोनों पक्षों में सुधार की माँग उठाई है। फरार बच्चों के परिजन भी बेचैनी में हैं; कई ने पुलिस से मदद मांगी और बच्चों के सुरक्षित लौटने की अपील की है। कुछ सामाजिक संस्थाओं ने भी प्रशासन से शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई की माँग की है।
बता दें कि अंबिकापुर के इस बाल संप्रेक्षण गृह पर पहले भी सुरक्षा व व्यवस्थागत कमियों की शिकायतें उठ चुकी हैं। मानवाधिकार समूहों और स्थानीय संगठनों ने समय-समय पर स्टाफिंग, संरचना और बच्चों के मानव-संबंधी व्यवहार पर रिपोर्टें प्रस्तुत की हैं। प्रशासन ने अतीत में सुधार का आश्वासन दिया था, पर नियमित निगरानी और संसाधन आवंटन की कमी को लेकर बार-बार चिंताएँ सामने आई हैं।
11 juvenile delinquents escape from Ambikapurs juvenile observation home
बाल कल्याण और रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी संस्थाओं में केवल कड़ी सुरक्षा ही पर्याप्त नहीं होती; बच्चों के मनोवैज्ञानिक पक्ष, स्टाफ़ प्रशिक्षण और इमरजेंसी प्रोटोकॉल पर भी बराबर ध्यान देना आवश्यक है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि बैकअप पावर, नियमित हेड-काउंट और आपातकालीन ड्रिल जैसे उपाय अनिवार्य होने चाहिए, अन्यथा हवा-पानी का छोटा सा बदलाव भी बड़े सुरक्षा उल्लंघन में बदल सकता है।
प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच का आदेश दे दिया है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। साथ ही बताया गया कि गृह में सीसीटीवी निगरानी, बैकअप पावर व्यवस्था और स्टाफ़िंग की समीक्षा कराई जाएगी तथा ज़रूरत पड़ने पर तत्काल तकनीकी व मानवीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएँगे। जिला अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य में बाल विकास परियोजनाओं और संरक्षण गृहों के मानक पालन को कड़ा किया जाएगा।
फिलहाल पुलिस की टीमें रात-दिन खोजी कार्य कर रही हैं और क्षेत्र के आसपास गश्त बढ़ा दी गई है। परिजन व समुदाय को नियमित अपडेट दिए जा रहे हैं और परिवारों की मदद के लिए प्रशासनिक स्तर पर समन्वय बढ़ाया जा रहा है। नागरिक तथा मानवाधिकार संगठन अब निरीक्षण और पारदर्शिता की मांग पर निगाह टिकाए हुए हैं कि प्रशासन कितनी शीघ्रता एवं प्रभावी रूप से बच्चों को सुरक्षित वापस लाता है और भविष्य में ऐसी चूक की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाता है।
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