₹50 Crore Pangolin Deal Foiled: रायपुर :23 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वन्यजीव तस्करी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। रायपुर संभाग के आरंग क्षेत्र में 50 करोड़ रुपये के सौदे से ठीक पहले पुलिस ने दो तस्करों को जिंदा पैंगोलिन के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने की, जो अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ी सफलता है।
आरंग के ग्राम उदनी स्थित एक सुनसान गोदाम में मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम पहुंची। वहां दो आरोपी, मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले रमेश साहू (35) और छत्तीसगढ़ के ही प्रकाश वर्मा (28), जिंदा पैंगोलिन को लोहे के डिब्बे में बंद करके 50 करोड़ रुपये के संभावित खरीदारों का इंतजार कर रहे थे। खरीदार विदेशी माफिया के एजेंट बताए जा रहे हैं, जो पैंगोलिन के काले बाजार में इसकी कीमत 5-7 करोड़ प्रति किलो तक देते हैं।
पैंगोलिन का वजन लगभग 20 किलो था, जिसकी बाजार मूल्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करोड़ों में आंकी गई। तस्करों ने इसे ओडिशा के जंगलों से पकड़कर रायपुर लाया था। सौदा रात 12 बजे फाइनल होने वाला था, लेकिन पुलिस की घेराबंदी से पूरा नेटवर्क बिखर गया। आरोपी घबरा गए और भागने की कोशिश की, लेकिन वन रेंजर की टीम ने उन्हें पकड़ लिया। पैंगोलिन को सुरक्षित मुक्त कर वन्यजीव उद्यान भेज दिया गया।
यह गिरोह पिछले 2 साल से छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर सक्रिय था। पैंगोलिन को चीन और वियतनाम के काला बाजार में औषधीय उपयोग के लिए तस्करी किया जाता है। इसकी तराजू और मांस पर अंधविश्वास के कारण मांग बनी रहती है। तस्कर जंगल में विशेष जाल बिछाते, फिर रायपुर जैसे शहरों में गोदामों में छिपाते। सौदे डार्क वेब और व्हाट्सएप ग्रुप्स से तय होते। इस केस में खरीदार नागपुर से आने वाले थे।
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे 6 महीने में 3 पैंगोलिन तस्करी कर चुके हैं। उनका सरगना कोलकाता में रहता है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस ने उनके फोन से 20 संदिग्ध नंबर बरामद किए, जो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तक फैले हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 51 के तहत मामला दर्ज हुआ, जिसमें 3-7 साल की सजा और लाखों जुर्माना है।
₹50 Crore Pangolin Deal Foiled
रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल के नेतृत्व में विशेष वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की टीम सक्रिय थी। मुखबिर ने 48 घंटे पहले टिप मिली थी। ट्रैप के दौरान ड्रोन और थर्मल कैमरा इस्तेमाल किए गए। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को रिमांड पर लिया गया। वन Conservator डॉ. अनिता शर्मा ने कहा, “पैंगोलिन विश्व का सबसे अधिक तस्करी वाला स्तनपायी है। हम इसे बचाने के लिए सतर्क हैं।” रायपुर पुलिस ने नेटवर्क के अन्य सदस्यों की धरपकड़ के लिए 5 टीम गठित कीं।
भारत में पैंगोलिन तस्करी 2018 से बढ़ी है। छत्तीसगढ़ के घने जंगल इसे ट्रांजिट पॉइंट बनाते हैं। पिछले साल राज्य में 12 मामले दर्ज हुए, जिनमें 8 पैंगोलिन बरामद हुए। रायपुर संभाग में बस्तर और महासमुंद हॉटस्पॉट हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर CITES ने पैंगोलिन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, लेकिन काला बाजार फल-फूल रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय जागरूकता और सख्त सीमा निगरानी जरूरी।
यह घटना पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश पैदा कर रही। वन्यजीव एनजीओ ने बयान जारी कर प्रशासन की तारीफ की, लेकिन बड़े नेटवर्क पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर #SavePangolin ट्रेंड कर रहा, जहां लोग तस्करी के खिलाफ मुहिम चला रहे। ग्रामीणों ने बताया कि तस्कर स्थानीय को लालच देकर मदद लेते। अब गांवों में जागरूकता कैंप चलेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ट्वीट कर पुलिस की सराहना की। विपक्ष ने इसे उपलब्धि बताया, लेकिन वन्यजीव सुरक्षा बजट बढ़ाने की मांग की। केंद्र सरकार के वन्यजीव मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ को बधाई दी। यह केस राष्ट्रीय मीडिया में छाया हुआ।
तस्करी नेटवर्क सीमा पार हैं, इसलिए INTERPOL से सहयोग लिया जाएगा। वन विभाग ड्रोन पेट्रोलिंग बढ़ाएगा। कोर्ट में तेज सुनवाई से नजीर बनेगी। पैंगोलिन संरक्षण के लिए ब्रिडिंग सेंटर प्रस्तावित। यह सफलता राज्य की वन्यजीव सुरक्षा को मजबूत करेगी।
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