Surajpur: Villagers stage violent protest against SECL survey: सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एसईसीएल की ओर से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण और सड़क डायवर्जन के लिए किए जा रहे सर्वे को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया। भटगांव क्षेत्र में जमीन का सर्वे करने पहुंची टीम का ग्रामीणों ने विरोध करते हुए हंगामा किया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सर्वे टीम के कुछ कर्मचारियों को मौके से लौटना पड़ा, जबकि एक सर्वेयर ग्रामीणों के बीच घिर गया। बाद में पुलिस ने भारी बल के साथ सर्वेयर को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना से इलाका में तनाव का माहौल बना है और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की मांग उठ रही है।
घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि एसईसीएल की ओर से जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव काफी पहले रखा था, लेकिन वर्षों से न मुआवजा मिला है और न नियमित नौकरी। ऐसे में नई सर्वे टीम के आते ही मानसिकता और भी उग्र हुईं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी जमीन पर खान-पहाड़ या सड़क निर्माण के लिए सीमांकन किया जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप वे भविष्य में विस्थापित हो सकते हैं। वे इस पर सशर्त सहमति देने की बात कर रहे हैं, लेकिन कोई स्पष्ट आश्वासन न मिलने से विरोध बढ़ा।
मौके पर पहुंची एसईसीएल की सर्वे टीम ने जमीन के सीमांकन और सर्वे के लिए रिकॉर्ड चेक करने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और टीम के आगे बैरियर बनाकर नहीं छूटने की बात कह दी। विवाद बढ़ते-बढ़ते झगड़े की स्थिति में बदल गया। कुछ लोगों ने टीम के कर्मचारियों को रस्सियों से घसीटने की कोशिश भी की। इस दौरान एक सर्वेयर ग्रामीणों के बीच घिर गया, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई।
Surajpur: Villagers stage violent protest against SECL survey
घटना की सूचना पाते ही बिश्रामपुर और भटगांव क्षेत्र की पुलिस ने भारी बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। पुलिस ने ग्रामीणों से शत-शत बातचीत की और उन्हें सर्वे के काम को किसी भी तरह न रोकने की अपील करते हुए स्थान से सर्वे टीम को सुरक्षित निकाला। सर्वेयर को ग्रामीणों के घेरे से बाहर निकालकर पुलिस वाहन में बिश्रामपुर थाने तक सुरक्षित पहुंचाया गया। सर्वे टीम के अन्य कर्मचारियों को भी पुलिस की मदद से सुरक्षित लौटने में सफलता मिली।
एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों के बीच शांतिपूर्ण बातचीत की मांग करते हुए कहा कि सर्वे के काम को रोककर कोई समाधान नहीं निकलेगा। वे ग्रामीणों को मुआवजा, नौकरी और विस्थापन के बाद के पुनर्वास के लिए स्पष्ट आश्वासन देने की बात कर रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों ने भी कहा कि वे सर्वे के काम को पूरी तरह नहीं रोकना चाहते, लेकिन अपने जमीन के अधिकारों और भविष्य के पुनर्वास के लिए स्पष्ट लिखित सहमति चाहते हैं।
पुलिस ने सर्वे टीम के अधिकारियों और कर्मचारियों की शिकायत के आधार पर ग्रामीणों के कुछ लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। मामले में ग्राम पटना की सरपंच और अन्य कई लोगों के खिलाफ धारा 296, 351, 324 आदि के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस जांच कर रही है कि हमले में कितने लोग शामिल थे और किसकी भूमिका अधिक थी।
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