रायपुर/नई दिल्ली। ₹6,000 करोड़ के महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। मामले के मुख्य आरोपी और ऐप के प्रोमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। रविवार शाम दिल्ली पहुंचने के बाद उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया जा रहा है, ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद उन्हें रायपुर ले जाया जाएगा, जहां आज सोमवार को CBI की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
CBI के अनुसार, चंद्राकर के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उन्हें तलाश कर हिरासत में लिया था। इसके बाद CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों के साथ औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव ओमान सरकार को भेजे। भारत सरकार की विभिन्न एजेंसियों, इंटरपोल की नेशनल सेंट्रल ब्यूरो इकाई और ओमान की सक्षम एजेंसियों के समन्वय से प्रक्रिया पूरी हुई। मंजूरी मिलने पर विशेष रूप से ओमान भेजी गई CBI की टीम उन्हें मस्कट से भारत लेकर आई। एजेंसी ने सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, चंद्राकर 2023 से फरार थे और हाल ही में ED को पता चला कि वे ओमान में हैं, जिसके बाद भारतीय एजेंसियों ने वहां के अधिकारियों के साथ समन्वय शुरू किया। वे CBI के दो मामलों में वांछित हैं, जिनमें आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, और ED के एक मामले में उनके खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की जा चुकी है।
CBI ने महादेव ऑनलाइन बुक प्रकरण की जांच छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि यह देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक था, जिसे विदेश से चलाया जा रहा था। प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टा लगाया जाता था और देशभर में फैले फ्रेंचाइजी आधारित पैनल व शाखाओं के जरिए लोगों को जोड़ा जाता था।
एजेंसी का दावा है कि सट्टेबाजी की कमाई बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए परत-दर-परत घुमाई जाती थी और फिर हवाला चैनलों से विदेश भेजी जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि रकम का एक हिस्सा लोक सेवकों को कथित तौर पर संरक्षण राशि देने में इस्तेमाल किया गया, ताकि सिंडिकेट बिना बाधा काम कर सके। आरोपपत्र भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, भारतीय न्याय संहिता की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत दाखिल किए गए हैं।
इस बीच ED ने इस साल मार्च में चंद्राकर के खिलाफ मामले में ₹1,700 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी, जिनमें दुबई के सबसे महंगे इलाकों में स्थित लक्जरी विला और बुर्ज खलीफा के हाई-एंड अपार्टमेंट शामिल हैं। 2023 में दुबई में उनकी कथित ₹200 करोड़ की शादी भी चर्चा में रही थी, जिसमें मेहमान प्राइवेट जेट से पहुंचे थे।
उनके सह-संस्थापक रवि उप्पल फिलहाल फरार हैं। दोनों 2019 में संयुक्त अरब अमीरात भाग गए थे; अक्टूबर 2024 में दुबई में चंद्राकर की संक्षिप्त घरेलू नजरबंदी के बाद भी प्रत्यर्पण नहीं हो सका था, जबकि नवंबर 2025 में अमीराती अधिकारियों द्वारा उप्पल के खिलाफ प्रत्यर्पण कार्यवाही बंद करने के बाद वे भी गायब हो गए।
CBI के लिए यह प्रत्यर्पण इस मायने में अहम है कि मामले में अब तक मुख्य आरोपी विदेश से ही सिंडिकेट चला रहे थे। अब देखना होगा कि रिमांड के दौरान पूछताछ में संरक्षण राशि, हवाला रूट और विदेशी संपत्तियों से जुड़े कितने नए सुराग सामने आते हैं।








