Home राज्य सूरजपुर: बिना पंजीयन चल रहा गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट सील, फीस लेकर छात्रों...

सूरजपुर: बिना पंजीयन चल रहा गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट सील, फीस लेकर छात्रों को परीक्षा से वंचित रखने का आरोप

28
0
Surajpur: Gurukul Paramedical Institute, operating without registration

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में ग्राम तिलसिवां स्थित गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट को बिना पंजीयन संचालित पाए जाने पर तत्काल सील कर दिया गया है। संस्थान पर डीएमएलटी और बीएमएलटी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों से पूरी फीस वसूलने के बाद उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल होने से वंचित रखने का आरोप है। कलेक्टर के निर्देश पर कराई गई जांच में संस्थान का छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल, रायपुर में पंजीयन नहीं होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की।

छात्रों की शिकायत पर शुरू हुई जांच

जिला प्रशासन को मिली शिकायत में कहा गया था कि संस्थान ने डीएमएलटी और बीएमएलटी के विद्यार्थियों से पूरी फीस जमा करा ली, लेकिन उन्हें मुख्य परीक्षा में बैठने का अवसर नहीं दिया गया। इससे छात्रों का पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होने की बात भी शिकायत में सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश दिए। जांच में पाया गया कि संस्थान का छत्तीसगढ़ पैरामेडिकल काउंसिल में पंजीयन ही नहीं है। बिना आवश्यक पंजीयन और मान्यता के संस्थान का संचालन नियमों के विपरीत पाए जाने पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

CMHO, तहसीलदार और नोडल अधिकारी की मौजूदगी में सील

कलेक्टर के निर्देश के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह, तहसीलदार सूर्यकांत साय तथा नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश श्रेष्ठ और उनकी टीम की उपस्थिति में गुरुकुल पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट को सील करने की कार्रवाई पूरी की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संस्थान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

जिले के अन्य संस्थानों पर भी होगी जांच

इस कार्रवाई के साथ ही प्रशासन ने जिले के दूसरे निजी पैरामेडिकल संस्थानों पर भी नजर दौड़ाने का फैसला लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार, जिले में संचालित अन्य संबंधित संस्थानों की भी जांच की जाएगी। जांच में पंजीयन, मान्यता और निर्धारित मापदंडों के पालन की स्थिति की पड़ताल होगी। किसी भी संस्थान में नियमों का उल्लंघन मिलने पर संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो यह जांच इसलिए भी जरूरी है कि बिना पंजीयन चल रहे संस्थानों से निकले प्रमाणपत्रों को नौकरी और दाखिले के समय मान्यता नहीं मिलती, जिससे छात्रों की सालों की मेहनत और पैसा दोनों बेकार हो जाता है।

फीस वापसी और भविष्य पर मंडराते सवाल

कार्रवाई से संस्थान बंद हो गया है, लेकिन छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी जमा की गई फीस वापस होगी या नहीं और वे अपनी बाकी पढ़ाई तथा मुख्य परीक्षा कहां से करेंगे। इस संबंध में प्रशासन की ओर से अभी कोई विस्तृत योजना सार्वजनिक नहीं हुई है, और यही वजह है कि छात्र परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावित विद्यार्थियों को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में समायोजित करने या उनकी परीक्षा का वैकल्पिक इंतजाम करने की घोषणा जल्द होनी चाहिए। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन के अगले कदम पर हर किसी की नजर टिकी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here