Ambikapur: Constable accused of fraud: सरगुजा:अंबिकापुर (08 july 2026): । शहर के गांधीनगर की रहने वाली एक महिला ने स्थानीय थाना में मुकदमा दर्ज कराया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि नगर पुलिस विभाग में तैनात आरक्षक प्रवीण प्रताप सिंह और उनकी पत्नी अलका प्रताप सिंह ने जमीन खरीदने व PWD (पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट) के भुगतान का झांसा देकर कुल 30 लाख रुपये ठग लिए। रकम न लौटने और कुछ चेक बाउंस होने पर पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई; पुलिस ने तहरीर मिलने के बाद प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार घटना का प्रारम्भ वर्ष 2023 में हुआ जब पीड़िता — गांधीनगर निवासी — ने प्रवीण व अलका पर भरोसा करते हुए उन्हें अलग-अलग किश्तों में कुल 30,00,000 रुपये उधार दिए। पीड़िता का कहना है कि दंपती ने उन्हें बताया था कि वे एक जमीन खरीदने वाले हैं और जल्द ही PWD से संबंधित भुगतान भी मिलने वाला है, जिससे उधार दी गयी राशि शीघ्र वापस कर दी जाएगी। आरोप है कि इस भरोसे के कारण पीड़िता ने बैंक ट्रांजैक्शन, नकद भुगतान और कुछ पारिवारिक गहनों की कीमत के बदले रकम दंपती को दे दी।
बाद में जब पीड़िता ने राशि वापस मांगी तो दंपती ने समय-समय पर बहाने बनाए और चेक देकर भुगतान का आश्वासन दिया। पीड़िता के अनुसार दिये गए कई चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गए। कई बार दंपती ने फोन कर आश्वासन दिया कि भुगतान शीघ्र हो जाएगा, लेकिन न तो चेक क्लियर हुए और न ही रकम वापस मिली। अंततः पीड़िता को जब संदेह हुआ तो उन्होंने संबंधित कागजात, बैंक स्टेटमेंट व चेक की प्रतियाँ इकट्ठा कर 5 जुलाई को अंबिकापुर थाने में तहरीर दी।
Ambikapur: Constable accused of fraud
थानाध्यक्ष ने बताया कि शिकायत मिलते ही प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आवश्यक प्रारंभिक जांच आरम्भ कर दी गयी है। उन्होंने कहा, “प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर हमने धोखाधड़ी व जालसाज़ी से संबंधित धाराओं के अन्तर्गत मामले को पंजीबद्ध किया है। दोनों आरोपियों के बैंक रेकॉर्ड, लेन-देन और चेक बाउंस से जुड़ी रिपोर्टें मांगी जा रही हैं। साथ ही कुछ गवाहों व पीड़िता के साथ हुई बातचीत के बारे में पूछताछ की जा रही है।” पुलिस ने यह भी कहा कि यदि मामले में और पीड़ित सामने आते हैं तो उन्हें भी दर्ज किया जाएगा।
क्या वाकई जमीन का सौदा न था या यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला है — यह जांच का केंद्र होगा। जमीनी जांच के दौरान पुलिस यह भी पता लगाएगी कि कहीं आरोपियों ने जमीन के कोई वैध दस्तावेज या PWD से जुड़ा कोई संदिग्ध नहीं दिखाया। विधिक जानकारों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित हुआ कि दंपती ने जानबूझकर झांसा देकर पैसे लिये और असली इरादा वादे निभाने का न था तो उन पर गंभीर आपराधिक धाराएँ लागू होंगी और न्यायालय द्वारा कड़ी सजा की मांग की जा सकेगी।
स्थानीय वकील अजय त्यागी ने बताया कि ऐसी धोखाधड़ी के मामलों में मुख्य रूप से जालसाज़ी (आईपीसी की धारा 420), धोखाधड़ी व अन्य संबंधित धाराओं के तहत अभियोजन होगा। उन्होंने कहा, “यदि चेक बाउंस के प्रमाण मौजूद हैं तो बँकिंग कानून के तहत भी धाराएँ चल सकती हैं। पीड़िता को अपने बैंक स्टेटमेंट, लिखित संचार, चेक की प्रतियां और किसी भी तरह के आदान-प्रदान के प्रमाण सहेज कर रखना चाहिए ताकि सशक्त मामला बनाया जा सके।”
इस प्रकरण ने स्थानीय आबादी में चिंता भी पैदा कर दी है, क्योंकि आरोपित में एक पुलिस कर्मी का नाम होने से लोगों का विश्वास प्रभावित हुआ है। नागरिक समाज के कुछ सदस्य कहते हैं कि इस तरह के मामलों से आम नागरिकों का सरकारी संस्थाओं पर भरोसा कम होता है। मानवाधिकार कार्यकर्ता मीना यादव ने कहा, “यदि कानून-व्यवस्था के दरोगा ही गुनाह में शामिल पाए जाते हैं तो यह बहुत बड़ा मुद्दा है। प्रशासन को पारदर्शिता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”
प्रवीण प्रताप सिंह फिलहाल अपने पद पर तैनात हैं; पुलिस अभी उनकी निलंबन संबंधी औपचारिक निर्णय नहीं बता पाई है। थाना सूत्रों के अनुसार आरोपियों को जल्द ही समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी भी की जा सकती है। अगर प्राथमिकी में और भी सुस्पष्ट सबूत मिलते हैं तो आरोपितों के खिलाफ मानहानि-रहित ठोस आपराधिक चार्ज कायम किये जाएंगे।
दूसरी ओर, पीड़िता का कहना है कि इससे न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक और पारिवारिक स्तर पर भी उसे भारी क्षति हुई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों से रकम वसूली जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। स्थानीय समाज के लोगों ने भी पुलिस से आग्रह किया है कि मामले की शीघ्र निष्पक्ष जांच कर सार्वजनिक भरोसा बहाल किया जाए।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अगर किसी ने भी ऐसे ही किसी झांसे या धोखाधड़ी का सामना किया है तो वे संबंधित थाने में दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराएं। मामले की प्रकृति व जांच के परिणामों के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही और संभावित पब्लिक सर्विस नियमावली के तहत अनुशासनात्मक कदम उठाये जाएंगे। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों व जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले की दिशा साफ होगी।
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