Misuse of Ayushman Card: Private hospital in Ambikapur: सरगुजा:अंबिकापुर (08 july 2026): । शहर के गुदरी चौक स्थित निजी लक्ष्मी नारायण अस्पताल पर इलाज के नाम पर मरीज के परिजनों से लाखों रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अस्पताल संचालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत में आरोप है कि अस्पताल ने परिवार को यह बताकर गुमराह किया कि उनके आयुष्मान कार्ड को ब्लॉक कर दिया गया है, इसलिए तत्काल इलाज के लिए नकद भुगतान करना होगा। इस झांसे में अस्पताल ने परिजनों से 1 लाख 60 हजार रुपये नकद वसूल लिए, जबकि बाद में पता चला कि अस्पताल ने आयुष्मान भारत योजना के तहत भी 1 लाख 50 हजार रुपये से अधिक की राशि क्लेम कर ली थी।
पीड़ित परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनके 56 वर्षीय मरीज को अचानक स्वास्थ्य समस्या हुई और उसे लक्ष्मी नारायण अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने शुरुआत में बताया कि योजना के कागजात में कुछ तकनीकी समस्या आ गई है और कार्ड कुछ समय के लिए ब्लॉक दिखा रहा है। इसके बाद मरीज की तात्कालिक हालत को देखते हुए अस्पताल ने उपचार और दवाइयों के लिए परिवार से नकद वसूली की। परिवार के अनुसार, उन्होंने भरोसे में आकर अस्पताल को 1,60,000 रुपये नकद दिए और साथ ही कई छोटे-छोटे खर्च भी बाद में नकद-स्पष्ट तरीके से चुकाए।
हालांकि जब परिवार ने योजना के संचालन केंद्र और अस्पताल से संबंधित दस्तावेजों की जाँच करवाई तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि अस्पताल ने उसी इलाज के लिये आयुष्मान भारत के अंतर्गत 1,50,000 रुपये से अधिक का क्लेम भी कर लिया था। यानी अस्पताल ने एक ही केस के लिये डबल पेमेंट किया था — मरीज के परिजनों से नकद और योजना से अलग से राशि। पीड़ित पक्ष ने कहा कि अस्पताल ने बिल में भी कई तरह के संशोधन किए और कुछ हिम्मत रखने वाले बिल दिखाकर वास्तविक किए गए खर्च छिपा दिए।
परिवार की शिकायत पर 3 जुलाई को अंबिकापुर थाना में तहरीर मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी। थानाध्यक्ष हरिओम सिसोदिया ने बताया, “मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल संचालक के विरुद्ध धोखाधड़ी और जालसाज़ी के संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। प्रारंभिक जांच में अस्पताल के कुछ बिलिंग रिकॉर्ड और वित्तीय ट्रांजेक्शन सम्बन्धी दस्तावेज मिले हैं जिन्हें आगे सत्यापित किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि बैंक स्टेटमेंट, अस्पताल की बिलिंग मशीनों की लॉग फाइलें और कंप्यूटर रेकॉर्ड आदि की जांच की जा रही है ताकि क्लेम और नकद वसूली के तार जोड़े जा सकें।
Misuse of Ayushman Card: Private hospital in Ambikapur
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी मामले में संज्ञान लिया है। आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक डॉ. रीता साहू ने कहा, “हम इस प्रकार की अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हैं। यदि किसी अस्पताल द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें योजना से जुड़ी भुगतान प्रक्रिया को रोका जाना और अस्पताल के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कदम शामिल हैं।” उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य के संबंधित प्राधिकरणों के साथ मिलकर आडिट कराया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्लेम वैध थे या नकली दावे किए गए।
अस्पताल संचालक का कहना है कि अस्पताल ने मरीज की सुविधा और जटिल हालत को देखते हुए तत्काल उपचार सुनिश्चित किया और जो भी अतिरिक्त भुगतान लिया गया वह मरीज के अनुरोध पर निजी सुविधाओं के लिये था, न कि किसी योजना के तहत। मिश्रा ने कहा, “हमने हमेशा सभी नियमों का पालन किया है। आयुष्मान क्लेम भी नियमों के अनुसार किए गए हैं। हम जांच में पूरा सहयोग देंगे।” हालांकि पीड़ित परिवार के पास मौजूद कुछ रसीदें और अस्पताल द्वारा दी गई लिखित जानकारी विपरीत दावे को उजागर करती हैं, जिनमें क्लेम और नकद भुगतान दोनों की मौजूदगी नजर आती है।
स्थानीय नागरिक समाज और स्वास्थ्य अधिकार समूहों ने घटना की निन्दा की है और मांग की है कि दोषियों को सख्त दण्ड दिया जाए। मानवाधिकार कार्यकर्ता मीना यादव ने कहा, “ऐसे मामलों से ग्रामीण एवं मध्यमवर्गीय परिवारों का भरोसा जन-कल्याणकारी योजनाओं पर कम होता है। जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत जांच कर पहचान कर दोषियों को दंडित करना चाहिए और पीड़ित को मुआवजा दिलाना चाहिए।” उन्होंने स्थानीय प्रशासन से अन्य संभावित पीड़ितों की सूची तैयार कर सामूहिक जांच की अपील भी की है।
यदि जांच में यह सिद्ध हुआ कि अस्पताल ने जानबूझकर आयुष्मान कार्ड के ब्लॉक होने का झूठ बोला और दोनों स्रोतों से पैसे वसूले तो संचालक व संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ जालसाज़ी, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराओं में कड़ी सजा का प्रावधान है। साथ ही अस्पताल के लाइसेंस पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, जिसमें अस्थायी या स्थायी बंद करने तक के आदेश दिए जा सकते हैं।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि यदि किसी और परिवार को इस तरह के अनुभव का सामना करना पड़ा हो तो वे त्वरित रूप से थाने में शिकायत दर्ज कराएं ताकि मामलों का समेकित सत्यापन हो और दोषियों के खिलाफ तेज़ कार्रवाई की जा सके। मामले की आगे की जांच और दस्तावेजी प्रमाण मिलने के बाद पुलिस फ़ैसला लेने और आगे की कानूनी प्रक्रिया आरंभ करने वाली है।
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