Agriculture Department advises planting groundnut and urad instead of paddy in Jashpur: जशपुर:(छत्तीसगढ़)। जशपुर जिले में संभावित कम वर्षा और एल‑नीनो के प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को धान की खेती से बचकर मूंगफली और उड़द जैसी वैकल्पिक फसलें लगाने की सलाह दी है। इसी कड़ी में शासन ने मूंगफली‑उड़द आदि दलहन‑तिलहन फसलों लगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी कर दी है।
मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार जशपुर और आसपास के कुछ क्षेत्रों में अब तक की वर्षा औसत से कम दर्ज की गई है और अगले कुछ दिन में भी भारी से अतिभारी बारिश की उम्मीद नहीं बनाई जा रही है। ऐसे में कम वर्षा की आशंका को संभावित वर्षा‑घाट के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर खरीफ धान की फसल पर स्पष्ट हो सकता है। इसी कारण कृषि विभाग ने समय पाकर धान‑निर्भरता से बचने के लिए वैज्ञानिक विकल्प लेने की हिदायत दी है।
कृषि विभाग की सलाह: धान से बचाव, मूंगफली‑उड़द पर जोर
कृषि विभाग की ओर से जारी सलाह के अनुसार जशपुर में जो क्षेत्रों में बारिश कम होने की आशंका है, करते हुए किसानों को पारंपरिक धान की जगह मूंगफली और उड़द जैसी फसलें अपनाने की दिशा दी गई है। ये फसलें कम वर्षा में भी अच्छा मुनाफा दे सकती हैं और उनकी खेती में सिंचाई की भारी बोझ भी नहीं लगती। खासतौर पर उड़द और मूंगफली को खरीफ के जायद सीजन में लाभकारी विकल्प कहा गया है।
उड़द की उन्नत किस्में जैसे IPU‑10‑26, IPU‑11‑02, IPU‑13‑1, पंत उड़द‑8 और कोटा उड़द‑3 (KPU‑524‑65) अपनाने से किसान 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन ले सकते हैं। वहीं मूंगफली की रोग‑प्रतिरोधक किस्में जैसे गिरनार‑4/5, GG‑37/35, GJG‑32, K‑1812, TCGS‑1157 (नित्य हरता) और TAG‑73 से 22–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन की संभावना बताई गई है।
प्रोत्साहन राशि: 15 हजार रुपये प्रति एकड़
किसानों को धान की जगह दलहन‑तिलहन फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की गई है। इस राशि का मुख्य उद्देश्य नई फसल अपनाने वाले किसानों को जोखिम कम करना और तिलहन‑दलहन फसलों की खेती में बढ़ोतरी करना है। जशपुर में कम बारिश की आशंका के चलते कृषि विभाग ने विशेष रूप से मूंगफली‑उड़द की खेती को प्राथमिकता देने पर ध्यान केंद्रित किया है।
विभाग ने इन फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए कुछ तकनीकी सुझाव भी दिए हैं। उड़द की खेती में 15–18 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई, बीज उपचार, संतुलित पोषण प्रबंधन एवं 10–12 दिन के अंतराल पर सिंचाई की सलाह दी गई है। मूंगफली के लिए 100–120 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर, उचित बीज उपचार, NPK 20:80:20 पोषण प्रबंधन और 12–15 दिन के अंतराल पर सिंचाई की सिफारिश की गई है। बीजोपचार, मृदा उपचार, खरपतवार नियंत्रण और उर्वरक प्रबंधन को आवश्यक माना गया है, क्योंकि वैज्ञानिक तरीके से इन फसलों की खेती करने पर काफी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
Agriculture Department advises planting groundnut and urad instead of paddy in Jashpur
मूंगफली और उड़द जैसी फसलों की खेती कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी स्थिर उत्पादन और मुनाफा दे सकती है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। इन फसलों से मिट्टी में पोषण संतुलन भी बना रहता है और धान की खेती में होने वाली अत्यधिक जल‑आवश्यकता से बचाव होता है। इस प्रकार जशपुर में कम वर्षा की स्थिति में न केवल किसानों की आय सुरक्षित रहेगी, बल्कि जल‑संसाधनों की बचत भी होगी।
कृषि विभाग ने किसानों को इस निर्णय को सामूहिक रूप से अपनाने और समय पर बुवाई करने पर विशेष ध्यान देने की अपील भी की है, ताकि प्रोत्साहन राशि का लाभ पूरे क्षेत्र में मिल सके और फसल सफलतापूर्व विकसित हो।
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