कोरिया ट्रिपल मर्डर केस: CBI करेगी जांच, राज्य सरकार ने दी मंजूरी : Korea triple murder case: CBI to investigate

Uday Diwakar
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Korea triple murder case: CBI to investigate: कोरिया:​ 01 july 2026: मनेंद्रगढ़: कोरिया जिले का बहुचर्चित नौगई ट्रिपल मर्डर केस अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की जांच में जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले में मंजूरी दे दी है, जिसके बाद इस हत्याकांड की जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई है। लंबे समय से पीड़ित परिवार, स्थानीय लोग और कई राजनीतिक-समाजिक संगठन इस केस की CBI जांच की मांग कर रहे थे। सरकार के फैसले के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि इस वारदात से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे।

यह मामला कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र अंतर्गत नौगई गांव का है, जहां 16 जून 2026 को यह दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। रेत खनन और परिवहन को लेकर चल रहे विवाद ने इतना उग्र रूप ले लिया कि भाजपा नेता भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह, ठेकेदार नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी गई। बताया गया कि वारदात के दौरान आरोपियों ने गाड़ी को घेरकर उसमें आग लगा दी, जिससे तीनों की मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ कोरिया, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर दिया।

घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों के बीच आक्रोश था और प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे थे। शुरुआती जांच में पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई तेज हुई और अब तक 12 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई। हालांकि, गिरफ्तारी के बावजूद पीड़ित पक्ष और विरोधियों का कहना था कि मामले के पीछे की असली साजिश अभी सामने नहीं आई है। यही वजह रही कि जांच को लेकर लगातार CBI की मांग उठती रही।

नौगई ट्रिपल मर्डर केस को लेकर शुरुआत से ही यह चर्चा रही कि यह केवल सामान्य आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे रेत के अवैध कारोबार, वर्चस्व की लड़ाई और स्थानीय प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी हो सकती है। कई रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि त्रिपाठी और ठाकुर परिवार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। रेत खनन और परिवहन को लेकर दोनों पक्षों में पहले भी तनातनी की बातें कही गईं। इसी संदर्भ में यह हत्याकांड देखा जा रहा है। इसलिए इस केस ने एक आपराधिक घटना से आगे बढ़कर प्रशासनिक और राजनीतिक बहस का रूप भी ले लिया।

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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर साफ तौर पर CBI जांच की मांग की थी। बघेल का कहना था कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर जांच निष्पक्ष नहीं रह सकती। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को बड़ी साजिश बताया था और विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाने की बात कही थी। उनके बयान के बाद मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया।

Korea triple murder case: CBI to investigate

इसी बीच पीड़ित परिवार की ओर से भी बार-बार न्याय की मांग उठाई जाती रही। मृतक भाजपा नेता के परिजनों ने भी मंत्री रामविचार नेताम से मुलाकात के दौरान CBI जांच की मांग रखी थी। परिजनों का कहना था कि वे निष्पक्ष जांच चाहते हैं ताकि यह पता चल सके कि हत्या के पीछे कौन लोग थे, किसने साजिश रची और किस स्तर पर संरक्षण मिला। परिवार ने बुलडोजर कार्रवाई की मांग भी की थी। सरकार की मंजूरी के बाद अब उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हो गई है।

राज्य सरकार का यह निर्णय इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे जांच अब राज्य पुलिस से निकलकर केंद्रीय एजेंसी के हाथ में चली जाएगी। CBI के पास तकनीकी, प्रशासनिक और जांच संबंधी बेहतर संसाधन होते हैं, जिससे उम्मीद की जाती है कि वह केस के हर पहलू की गहराई से पड़ताल करेगी। गवाहों के बयान, कॉल डिटेल, घटनास्थल, वाहन में आग लगाने की परिस्थितियां, आपराधिक साजिश और आरोपियों के आपसी संबंधों की नए सिरे से जांच हो सकती है। अगर कोई बड़ा नेटवर्क या प्रभावशाली कड़ी इसमें शामिल हुई, तो उसके उजागर होने की संभावना भी बढ़ गई है।

यह घटना छत्तीसगढ़ में अवैध रेत कारोबार और स्थानीय स्तर पर बढ़ते आपराधिक वर्चस्व की गंभीर तस्वीर पेश करती है। कोरिया जैसे जिले में इस तरह की वारदात ने प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और खनन नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। लोग अब यह जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी, अपराधियों को इतनी हिम्मत कैसे मिली और क्या समय रहते सख्त कार्रवाई की जा सकती थी।

अब CBI जांच की मंजूरी के बाद इस केस से जुड़ी नई जानकारी सामने आने की उम्मीद है। पीड़ित परिवार, स्थानीय जनता और राजनीतिक हलकों की निगाहें अब केंद्रीय जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। इस मामले में दोषियों तक पहुंचना और साजिश की परतें खोलना ही अब सबसे बड़ी चुनौती होगी। अगर जांच निष्पक्ष और तेज गति से आगे बढ़ती है, तो यह न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए राहत होगी, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर भी एक मजबूत संदेश देगा।

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